टेलीविजन (Television) क्या है? (What is Television in Hindi) जानिए हिंदी में।

टेलीविजन क्या है? (What is Television in Hindi)

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टेलीविजन क्या है? (What is Television in Hindi)” भारत में आज हर जगह टी.वी. कार्यक्रमों और समाचार चैनलों पर चलने वाली विवादित बयानों वाली खबरों की चर्चा हेते रहती है। जब महिलाएं एक-दुसरे से गौसिप के लिए मिलती है, तब वह टीवी धारावाहिकों (Serials) पर चर्चा किए बिना उनकी गॉसिप समाप्त नहीं होती है। “टेलीविजन क्या है?” युवाओं में, देखा जाये तो सबसे जयादा चर्चा का विषय क्रिकेट मैच (Cricket Match), टेनिस (Tennis) के प्रसारण के बारे में तरह-तरह की बातें की जाती हैं।

टेलीविजन क्या है?” शहर के क्लबों से लेकर नुक्कड़ या गाँव की चौपाल में लोग न्यूज-चैनलों पर खबरों को लेकर बात करते देखे जा सकते हैं। ये बदलाव दो दशकों से भी कम समय में हुए हैं। “टेलीविजन क्या है?” यूं तो पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे प्राचीन माध्यम समाचार पत्रों का है। समाचार पत्र (Newspaper) केवल देखकर पढ़े जा सकते हैं। रेडियो (Radio) को सुना जा सकता है लेकिन टेलीविजन (Television) देखा-सुना-पढ़ा जा सकता है।

आज हमलोग जानेगे की “टेलीविजन क्या है? (What is Television in Hindi)“, “टेलीविजन का आविष्कार किसने किया (Who Invention of Television in Hindi)“, “टेलीविजन का इतिहास (History of Television in Hindi)“, “टेलीविजन का अर्थ (Meaning of Television in Hindi)“, “टेलीविजन का विकास (Development of Television in Hindi)“, “भारत में टेलीविजन का विकास (Development of Television in India)“, “टेलीविजन का कार्य (Use of Television in Hindi)“, “टेलीविजन पत्रकारिता क्या है? (What is Television Journalism in Hindi)“, “टेलीविजन रिपोर्टिंग (Television Reporting Format in Hindi)“, “खोजी पत्रकारिता एवं साक्षात्कार तकनीक (Investigative Reporting & Interview Techniques)” आदि। आप इस पोस्ट को “टेलीविजन पर निबंध (Essay on Television in Hindi)” के रूप में भी उपयोग कर सकते है।

टेलीविजन क्या है? (What is Television in Hindi)

What is Television in Hindi

टेलीविजन क्या है? (Television Kya Hai)” यह ‘आंख‘, ‘कान‘ ‘मन‘ तीनों पर एक साथ प्रभाव डालता है। यही कारण है कि इसकी प्रभावित सहज ही होती है। समाचार पत्र में संवाददाता (Reporter) खबरें संकलित करते हैं और सम्पादक (Editor) द्वारा उन्हें सम्पादित किया जाकर ही छापा जाता है। आकाशवाणी में खबरों को संकलित कर सुनाया जाता है किन्तु दूरदर्शन में कैमरा आपको उस स्थान पर ले जाता है। जहां खबर घटित हुई है। इस प्रकार दर्शक स्वयं उन तथ्यों से रूबरू हो जाता है।

टेलीविजन (अंग्रेजी: Television) एक वैज्ञानिक उपकरण है। टेलीविजन जनसंचार का श्रव्य-दृश्य माध्यम है। यह ध्वनि के साथ-साथ छवियों के लाइव प्रसारण के कारण अपने कार्यक्रम को दिलचस्प बनाता है।

टेलीविजन क्या है?” भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत सन् 1924 में हो चुकी थी। अंग्रेजी शासनकाल में मद्रास में एक निजी रेडियो सेवा की शुरुआत को भारत में प्रसारण का प्रारंभ माना जाता है। सन् 1930 में ही दूरदर्शन का नाम “इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (Indian State Broadcasting Corporation)” रखा गया। उस समय तक दूरदर्शन नाम का कोई भी चीज नहीं थी।

फिर 1936 में इसका नाम बदलकर “ऑल इंडिया रेडियो” (AIR) कर दिया गया। इसे भारत सरकार के संचार विभाग के अधीन कर दिया गया। सामाजिक विकास संचार की गति को तेज करने के उद्देश्य से ऑल इंडिया रेडियो को सूचना और प्रसारण मंत्रालय विभाग (Ministry of Information and Broadcasting Department) से जोड़ दिया गया। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए रेडियो सेवा ने 1959 में भारत में टेलीविजन की शुरुआत की गयी। उम्मीद करती हु की अब तो आपको “टेलीविजन क्या है?” यह समझ आ गया होगा।

टेलीविजन का आविष्कार किसने किया (Who Invention of Television in Hindi)

टेलीविजन का आविष्कार” 1925 में अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन लोगी बेयर्ड (John Logie Baird) ने लंदन (London) में किया था। 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में दूरदर्शन केंद्र की स्थापना हुआ था। इसके साथ ही भारत में टेलीविजन का पहली बार इस्तेमाल किया गया था। जब भारत में 1982 में आयोजित एशियाड खेलों का लाइव प्रसारण पहली बार टेलीविजन या दूरदर्शन पर हुआ था। वर्तमान में टी. वी. सौ प्रतिशत लोगो तक पहुच चूका है।

टेलीविजन का आविष्कार किसने किया (Who Invention of Television in Hindi)

Who Invention of Television in Hindi

जब दूरदर्शन को लॉन्च किया गया था। उस समय सप्ताह में केवल तीन दिन, आधा घंटा का प्रोग्राम प्रसारित किया जाता था। पहले इसे ‘टेलीविजन इंडिया‘ (Television India) नाम दिया गया था। 1975 में इसका नाम बदलकर “दूरदर्शन” (Doordarshan) कर दिया गया था। 1959 में शुरू हुआ दूरदर्शन 1965 में रोजाना प्रसारित होने लगा। 5 मिनट का न्यूज बुलेटिन (News Bulletin) भी इसी साल से शुरू हुआ।

टेलीविजन का इतिहास (History of Television in Hindi)

भारत में “टेलीविजन का इतिहास” (History of Television in Hindi) की कहानी दूरदर्शन के इतिहास से ही शुरू होती है। आज भी, दूरदर्शन का नाम सुनते ही आपको अतीत की कई गुदगुदाने वाली बातें याद आ जाती होगी। भले ही आज टीवी चैनलों पर कार्यक्रमों की बाढ़ आ गई हो, लेकिन दूरदर्शन की पहुंच का मुकाबला करने में सक्षम होना किसी के बस की बात नहीं है।

टेलीविजन का आविष्कार “जॉन लोगी बेयर्ड (John Logy Baird)” ने किया था। उन्होंने वर्ष 1925 में बेसिक टीवी (Basic T.V) का निर्माण किया। यह एक CRT (Cathode Ray Tube) टेलीविजन था। जिस पर फिल्में (Films) प्रसारित होती थीं।

वर्ष 1927 में, फिलो फ़ार्नस्वर्थ (Philo Fansworth) वैज्ञानिक ने टेलीविजन का आविष्कार किया। यह एक ब्लैक एंड व्हाइट (Black and White) टीवी था। रंगीन टेलीविजन को आने में ज्यादा समय नहीं लगा और अगले साल 1928 में जेएल बेयर्ड (JL Baird) ने रंगीन टेलीविजन (Color Television) का आविष्कार किया।

टेलीविजन का इतिहास (History of Television in Hindi)

History of Television in Hindi

  • 15 सितंबर 1959 को भारत में टेलीविजन की शुरुआत हुई।
  • आकाशवाणी भवन में ही एक छोटे से स्टूडियो का उद्घाटन किया गया था।
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इस स्टूडियो का उद्घाटन किया था।
  • दूरदर्शन के पहले निर्देशक ‘शैलेन्द्र शंकर’ थे।
  • इसका पहला ट्रांसमीटर 500 वाट का था।
  • 1960 में स्वतंत्रता-दिवश समारोह का सीधा प्रसारण दूरदर्शन से किया गया था।
  • पहला सार्वजनिक प्रसारण (Broadcast) वर्ष 1940 में किया गया था।
  • भारत में टेलीविजन पर राष्ट्रीय प्रसारण की शुरुआत 1982 में हुई।
  • उसी वर्ष यानि 1982 में भारत में रंगीन टीवी की भी शुरुआत हुई।
  • रिमोट से संचालित टेलीविजन का भी आविष्कार किया गया था।
  • टेलीविजन रिमोट का आविष्कार “यूजीन पोली” ने किया था।
  • भारत का पहला निजी चैनल  Zee TV था।
  • उत्पाद विपणन (Product Marketing) भी टीवी पर किया जाता है।
  • टीवी चैनलों पर अपना विज्ञापन दिखाने के लिए कंपनियां लाखों करोड़ों रुपये का भुगतान करती हैं।
  • वर्तमान में एचडी (HD), अल्ट्रा एचडी (Ultra HD) गुणवत्ता (Quality) वाले टेलीविजन भी आते हैं।
  • 21 नवम्बर के दिन विश्व टेलीविजन दिवस मनाया जाता है।
  • दुनिया के पहले मून मिशन अपोलो (Apollo) 11 को टीवी पर लाइव दिखाया गया था।

टेलीविजन का अर्थ (Meaning of Television in Hindi)

टेलीविजन (Television) शब्द का प्रयोग सबसे पहले रूस के वैज्ञानिक “कांस्टेटिन पेर्सकी” (Constantin Perskyi) ने किया था। टीवी यानि टेलीविजन (Television) शब्द ग्रीक प्रीफिक्स से “टेले” (Tele) और लैटिन शब्द “विजीओ” (Vision) से मिलकर शब्द बना है “टेलीविजन”। जिसे हम सब टेलीविजन (Television) कहते है।टेलीविजन (Television) का अर्थ” “दूर दृष्टि” या “दूरदर्शन” होता है।

शुरुआती दौर में CRT (Cathode Ray Tube) Television हुआ करते थे। यह टीवी (Television) आकार में मोटे और वजन में भारी होते थे। काफी अरसे बाद ‘Led‘ (Light Emitting Diode) और ‘LCD‘ (Liquid Crystal Display) टीवी आये जो वजन में हल्के और पतले होते है।

टेलीविजन का विकास (Development of Television in Hindi)

टेलीविजन का विकास (Development of Television in Hindi)

Development of Television in Hindi

ऐसे तो “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे” श्लोक से ज्ञात होता है कि महाभारत में संजय ने धृतराष्ट्र को टेलीविजन की सहायता से युद्ध का सीधा प्रसारण सुनाया था। आजकल, भौतिकवादी या नास्तिक (Atheist) लोग इस प्रसारण में विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन यह तो मानना होगा कि टेलीविजन और रेडियो से साम्य रखने वाले जनसंचार के माध्यम का विकास भारत में बहुत पहले ही हो चुका था।

विश्व स्तर पर टेलीविजन का विकास (Development of Television in Globalization in Hindi)

  • 1925 में अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन लोगी बेयर्ड (John Logie Baird) ने टेलीविजन का अविष्कार लन्दन (London) में किया था।
  • 1936 ई० में सर्वप्रथम टीवी के नियमित कार्यक्रम को बी०बी०सी० (BBC) ने प्रारम्भ किया।
  • 1939 में न्यूयॉर्क में लगे विश्व मेला में जनता ने टीवी को देखा।

भारत में टेलीविजन का विकास (Development of Television in India)

  • 15 सितंबर 1959 को भारत में टेलीविजन की शुरुआत हुई।
  • 15 अगस्त, 1982 से भारत में रंगीन दूरदर्शन का शुरूआत हुआ था।
  • नवम्बर 1982 में नवें एशियाई खेलों को दूरदर्शन के माध्यम से प्रदर्शित करने हेतु 100 वाट के 20 ट्रांसमीटर आयात हुए।
  • भारत के दूरदस्थ क्षेत्रों में दूरदर्शन का आनन्द उठाया गया।
  • भारत में पहला स्वदेशी उपग्रह इनसैट 1-ए अप्रैल 1982 में छोडा गया।
  • जिसके कारण राष्ट्रीय कार्यक्रमों का एक साथ प्रसारण हुआ था।
  • अक्तूबर 1983 से इनसैट 1-बी कार्य कर रहा है।
  • पहले दूरदर्शन महानगरीय संस्कृति के सज्जन वर्ग के मनोरंजन का साधन-मात्र था।
  • जिसमें कला, संगीत तथा नाटक का ही प्रदर्शन होता था।
  • 1984-1985 तक यह माध्यम सारे देश के घर-घर में पहुँच गया।
  • इसकी प्रसारण अवधि भी सारे देश में क्षेत्रीय कार्यक्रमों के साथ राष्ट्रीय कार्यक्रमों के रूप में बढ़ गई।
  • धारावाहिकों और राष्ट्रीय प्रसारणों ने दर्शकों की रुचियों में परिवर्तन प्रारम्भ कर दिया।
  • नेटवर्ककार्यक्रमों ने संस्कृति, साहित्य, कला एवं जीवनोपयोगी प्रसारणों द्वारा जनता जर्नादन को गौरवान्वित किया है।
  • कुतुबमीनार से तीन गुना ऊंचा पीतमपुरा टीवी टावर का उद्घाटन 1988 को हुआ।

टेलीविजन का कार्य (Use of Television in Hindi)

  1. सूचनात्मक कार्य (Informational Work) :- सुचना का सबसे अच्छा माध्यम टेलीविजन हैं। इसकी सहायता से हम सुचना (Information), समाचार व जानकारियों (News and Information) को दर्शकों तक पंहुचा पाते हैं। देश के साथ-साथ पूरी दुनिया की ख़बरों को बड़ी आसानी से लोगों तक पंहुचाते हैं।
  2. शिक्षात्मक कार्य (Educational Work) :- टेलीविजन के शिक्षात्मक कार्य का उदेश्य केवल पढ़ना-लिखना नहीं हैं। बल्कि अपने दर्शकों को समाज में उपलब्ध साधन को उपयोग करने बताता हैं।
  3. जागरूकात्मक कार्य (Awareness Work) :- टेलीविजन अपने कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता फ़ैलाने का काम करता हैं। वर्तमान समय में टेलीविजन जातिवाद (Casteism), सम्प्रदायवाद (Communalism), दहेज प्रथा (Dowry System), क्षेत्रवाद (Regionalism) जैसी सामाजिक बुराईयों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा है।
  4. मनोरंजनात्मक कार्य (Recreational Work) :- टेलीविजन का चौथ और सबसे प्रमुख कार्य अपने दर्शकों का मनोरंजन करना है। टेलीविजन पर गीत (Song), संगीत (Music), कविता (Poem), नाटक (Drama), फ़िल्में (Movies), सीरियलस (Serials), पौराणिक कथाओं पर बने नाटक, बच्चो के लिए कार्टून (Cartoon), इत्यादि का प्रसारण किया जाता है। अपने दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए टेलीविजन उनकी भाषा में सूचना (Information), जागरूकता (Awareness) व शिक्षा (Education) ये सभी का प्रसारण के साथ स्थानिये फिल्मे, संगीत आदि का भी प्रसारण करता है।

टेलीविजन पत्रकारिता क्या है? (What is Television Journalism in Hindi)

टेलीविजन पत्रकारिता क्या है? (What is Television Journalism in Hindi)

What is Television Journalism in Hindi

पत्रकारिता को अंग्रेज़ी में “जर्नलिज्म” (Journalism) शब्द का प्रयोग किया जाता है जो ‘जर्नल’ से निकला है। इसका शाब्दिक अर्थ है ‘दैनिक’। दिन प्रतिदिन की गतिविधियों, सरकारी बैठकों आदि का विवरण जर्नल या पत्रिका में रहता था। अन्य संदर्भ के मुताबिक ‘जर्नलिज्म’ शब्द फ्रैंच भाषा के शब्द ‘जर्नी’ से निकला है। जिसका अर्थ रोजमर्रा के कामों या घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करना होता है।

पत्रकारिता या जर्नलिज्म शब्द का अर्थ दिन-प्रतिदिन की घटनाओं की तथ्यात्मक सूचनाओं का संकलन और संप्रेषण ही होता है। धीरे-धीरे यह सूचनाओं के संकलन से आगे बढकर सूचनाओं के अन्वेषण तथा विश्लेषण तक पहुंच गया। जब पत्रकारिता को टेलीविजन के साथ जोड़ते हैं तो शाब्दिक अर्थ के अनुसार सूचनाओं अथवा समाचारों का सदृश्य विवरण तथा विश्लेषण प्रस्तुत करना ही टेलीविजन पत्रकारिता होता है।

टेलीविजन के लिए समाचार लेखन (News Writing for Television in Hindi)

टेलीविजन के लिए समाचार लेखन (News Writing for Television in Hindi)

News Writing for Television in Hindi

देखा जाये तो, यूं तो पत्रकारिता (Journalism) के क्षेत्र में सबसे प्राचीन माध्यम समाचार पत्रों का है। समाचार पत्र या प्रिंट मीडिया केवल देखकर पढ़े जा सकते हैं। रेडियो को सुना जा सकता है लेकिन टेलीविजन देखा-सुना-पढ़ा जा सकता है। यह आंख“, “कान“, “मन तीनों पर एक साथ प्रभाव डालता है।

यही कारण है कि इसकी प्रभावित सहज होती है। समाचार पत्र में संवाददाता खबरें संकलित करते हैं और सम्पादक द्वारा उन्हें सम्पादित किया जा कर छापा जाता है। आकाशवाणी में खबरों को संकलित कर सुनाया जाता है।

किन्तु दूरदर्शन में कैमरा आपको उस स्थान पर ले जाता है। जहां खबर घटित हुई है। जहां से समाचार पनपा है। इस प्रकार दर्शक स्वयं उन तथ्यों से रूबरू हो जाता है किन्तु तकनीकी दृष्टिकोण से यह कार्य इतना आसान नहीं है।

विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों व सहयोगियों की मेहनत से दूरदर्शन समाचार अस्तित्व में आता है। इस माध्यम में जहां दर्शकों को लुभाने की उत्तम कला है वहीं दृश्यों व कथ्य का समन्वय भी खासा महत्त्वपूर्ण है।

कई बार ऐसा होता है कि समाचार प्रस्तुति तक स्थितियां विपरीत हो चुकी होती हैं। ऐसी स्थिति के लिए समाचार सम्पादक (News Editor) को सतर्क रहना होता है। जब समाचार सुनते समय दर्शक समाचार को देखते हुए समाचार वाचकों (News Readers) के हंसते-मुस्कराते चेहरे देखते हैं तो कोई सोच भी नहीं पाता होगा कि इन सबके पीछे कितना तनाव भरा माहौल चल रहा होता है।

इस माध्यम की व्यापकता एवं शीघ्रता के कारण छोटी से छोटी भूल भी अनर्थ कर सकती है। दूरदर्शन हेतु समाचार लेखन (News Writing) में दृष्टिगत रखने हेतु सभी तत्त्व रेडियो लेखन (Radio Writing) की भांति ही होते हैं। पर जो अन्य विशिष्टताएं हैं। वे इस प्रकार हैं।

  1. सरलता, स्पष्टता व संक्षिप्त प्रस्तुति।
  2. नवीनता, रोचकता एवं सामयिकता।
  3. राष्ट्रीय, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा।

टेलीविजन कार्यक्रमों के लिए लेखन (Writing for TV Program in Hindi)

दूरदर्शन के व्यापक फैलाव में मूलतः कार्यक्रमों की श्रृंखला में उनके उद्देश्य के आधार पर वर्गीकरण इस प्रकार किया जा सकता है।

  1. शैक्षणिक कार्यक्रम (Educational Programme)
  2. सूचना कार्यक्रम (Informative Programme)
  3. समाचार व समसामयिक कार्यक्रम (News & Current Affairs)
  4. प्रेरक कार्यक्रम (Motivative Programme)
  5. प्रचारार्थ (Publicity)
  6. खेल (Games)
  7. मनोरंजन (Entertainment)

उपर्युक्त सभी कार्यक्रमों की प्रस्तुति एवं स्थिति के अनुरूप लेखन में विभिन्न उतार-चढ़ाव आते हैं। किन्तु मूल रूप में सभी के स्रोत बिन्दु एक ही हैं। वैसे भी दृश्य-श्रव्य कार्यक्रमों में प्राथमिक प्रभाव दृश्य का ही पड़ता है। ध्वनि उस प्रभाव को व्यापक या बड़ा कर देती है।

इसी दृष्टिकोण को लेकर सामान्य रूप में टी. वी. कार्यक्रमों के लिए लेखन का बिंदु इस प्रकार हैं।

  1. लेखन में दृश्य के कथ्य का स्पष्टीकरण हो।
  2. भाषा बहुत प्रांजल व परिष्कृत न हो क्योंकि टेलीविजन आम वर्ग से खास वर्ग तक अपनी पहुंच रखता है।
  3. जन-मानस के रचे-बचे शब्दों व सन्दर्भो के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाए। जैसे वर्तमान के जम्मू-कश्मीर चुनावों के समाचार के क्रम में प्रमुख समाचार की लीड थी ‘बुलेट पर बैलेट हावी‘।
  4. सरलता (Simplicity), संक्षिप्तता (Conciseness) व स्पष्टता (Clarity) का ध्यान रखा जाए क्योंकि आधी बात तो चित्र स्वयं कह देता है।
  5. नवीनता (Newness), रोचकता (Interesting) व सामयिकता (Timeliness) का पुट दिया जाए जाकि दर्शकों को जुड़ाव की भावना महसूस हो।
  6. राष्ट्रीय/सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा हो व देश की सम्प्रभुता पर कोई आंच न आए।
  7. विभिन्न नियमनकारी कानूनों (Regulatory Laws), वर्जनाओं (Taboos) व गोपनीयता (Privacy) का खंडन न हो।
  8. दर्शकों की रुचि व आवश्यकता के बीच सेतु (Bridge) स्थापित किया जाए।
  9. कार्यक्रम की प्रस्तुति के अनुरूप भाषा का पुट हो। जिस वर्ग की आवश्यकता के लिए कार्यक्रम का निर्माण हो रहा है। उस वर्ग की मूल अभिवृत्ति का ध्यान रखा जाए।
  10. दृश्य व भाषा के समुचित तालमेल को बैठाएं ताकि कार्यक्रम सरल हो सके।

टेलीविजन फीचर कैसे लिखते है? (Writing for Television Features in Hindi)

टेलीविजन फीचर (Television Feature) हेत विषय का कोई बन्धन नहीं होता है। आवश्यकता व परिस्थिति के अनुरूप समसामयिकता को ध्यान में रखते हुए फीचर का निर्माण किया जाता है। किसी भी अच्छे फीचर हेतु यह आवश्यक है कि कार्यक्रम सम्पादक व आलेख लेखक मिल-बैठकर फीचर्स या फीचर के विभिन्न बिन्दुओं पर विचार-विमर्श कर लें। इससे यह तय हो जाता है कि :

  • प्रस्तुतीकरण कैसे किया जाए?
  • तकनीकी पक्ष क्या हो?
  • दृश्य पक्ष क्या हो?
  • कार्यक्रम प्रस्तुति किस प्रकार हो?
  • आलेख-प्रस्तुति व विवरण कैसे हों?

उपर्युक्त तथ्यों के तय हो जाने के पश्चात् फीचर लेखन का उद्देश्य, समय-सीमा, दृश्य-सामग्री आदि के आधार पर मूल स्क्रिप्ट के विवरणानुसार दृश्यों की शूटिंग की जाती है। स्क्रिप्ट की मांग के अनुरूप दृश्य व दृश्य-ध्वनि होने के साथ की स्थितियों का चयन किया जाता है। उसके बाद दृश्यों के अनुक्रम व प्रस्तुति के तकनीकी पक्ष को ध्यान में रखते हुए फीचर लेखन किया जाता है।

फीचर लेखन के प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं :-

  1. शब्दों व लेखन की प्रकृति फीचर की प्रकृति से मेल खाएं।
  2. शब्द व प्रस्तुति रोचक, सहज, प्रभावी व सरल हो।
  3. विवरण इतने ही हों कि दर्शक दृश्य के प्रभाव को आत्मसात कर लें।
  4. सामाजिक पदों, मुहावरों, लोक-रीति, सहज उद्धरणों आदि का प्रयोग विवेकानुसार किया जाए।
  5. तकनीकी पहलुओं में शब्दावली आम बोलचाल व सहज प्रयोग की जाने वाली परिस्थितियों के अनुरूप हो।
  6. लेखन में सहजता, प्रभाव, सरलता व वाक्यों के समावेश का समचित ध्यान रखा जाए।
  7. ताकि विवरण को लिपिबद्ध करते समय रुकावट, अटकाव व असहजता न हो।
  8. वाक्य छोटे व प्रभावी हों।
  9. संवादों में कृत्रिमता या बनावट (Artificiality) न हो।
  10. वार्ता व विवरण आदि में मूल आलेख को ही प्रयोग किया जाए।
  11. टिप्पणी, मतों, चर्चा में सरकारी रीति-नीति, निषेधों आदि का उल्लंघन ना हो।

टेलीविजन के लिए वार्ता लेखन (Writing for Talks)

वार्ता (Talks) यूं तो अपने आप में लेखन की दरकार नहीं रखती पर आधारभूत रूप में कुछ बिन्दु इस्तेमाल किए जाएं तो वार्ता अधिक प्रभावी बन पड़ती है।

  • वार्ता में पूछे जा सकने वाले प्रश्नों का ढांचा लिखित रूप में रख लें। ताकि आवश्यकता के अनुसार उनका प्रयोग हो सके।
  • सन्दर्भो, आंकड़ों, सूचनाओं के स्रोतों को लिख लें ताकि। प्रश्नोत्तर के साथ वे प्रयोग हो सकें।
  • तारतम्यता (Sequence) व प्रवाह बनाए रखने के लिए एक खाका बिन्द तय कर लें। ताकि वार्ता का क्रम व गति सुचारु हो सके।
  • शुरुआत व अन्त के लिए विषय से सम्बन्धित प्रमुख उक्तियां, उद्धरण आदि रोचकता हेतु लिख लें।
  • आधार उपलब्ध होने से इन्हें यथास्थान प्रयक्त किया जा सकता है।
  • मुख्य एवं पूरक प्रश्नों को क्रमानुसार अलग-अलग लिख लें।
  • समय शेष रह जाने पर पूरक प्रश्नों का प्रयोग किया जा सकता है।

टेलीविजन के लिए भेंटवार्ता या साक्षात्कार (Interview for Television in Hindi)

टेलीविजन के लिए साक्षात्कार (Interview for Television in Hindi)

Interview for Television in Hindi

दूरदर्शन भेंटवार्ता या साक्षात्कार (Interview) में केवल प्रश्न पूछना और उत्तर देना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि यह प्रस्तुति (Presentation) एवं कला (Art) का अभिनव पक्ष है। इंटरव्यू (Interview) अपनी प्रस्तुती (Presentation) में अधिक स्वाभाविक (Natural) एवं गतिशील (Dynamic) होता है।

वह अपने प्रश्नों से दर्शकों की जिज्ञासा को संतुष्ट करता है। प्रश्न पूछने का तरीका (Way), शब्द (Word), चयन (Selection), उसकी अभिव्यंजनाएं (Expressions), हाव-भाव (Gesture) भी इसमें बहुत महत्त्व रखते हैं। उपर्युक्त सभी प्रकारों में भेटवार्ता या साक्षात्कारता का दायित्व इस प्रयोजन से बढ़ जाता है।

क्योंकि उसे देखने के साथ सुना भी जाता है। यदि वह किसी कारण वश अपसेट (Upset) या दुखी भी है, तो उसे माध्यम की प्रस्तुति के कारण मुस्कुराते रहना होता है। वह लगातार कैमरे (Camera) की निगाह से दर्शकों से रूबरू होता रहता है।

अत: उसकी प्रस्तुति, हाव-भाव, बातचीत इत्यादि सभी का एक खास पहल ही दर्शकों को मिल पाता है। भेंटकर्ता के गुणों व कार्यकारी प्ररूपों पर कोई ढांचा तैयार करना कठिन है।

उसकी अधिकांश सफलता प्रश्नों के चयन पर निर्भर करती है। प्रश्न पूछे जाने का तौर-तरीका वार्ता या पूछने का क्रमिक विकास व सटीक प्रस्तुति आदि तो पूर्व निर्धारित प्रारूप में ही होता है। लेकिन समय व परिस्थिति के अनुसार समायोजन आवश्यक है। यदि परिकल्पना व प्रारूप को पूर्व-निर्धारित नहीं किया जाए तो कार्यक्रम में बिखराव आ जाने की सम्भावना रहती है।

भेंटवार्ता या साक्षात्कार निम्नलिखित प्रकारों की होती हैं :-

  • विषय आधारित (Factual)
  • कल्पना युक्त (Idea)
  • खोजबीन प्रधान (Investigative)
  • व्यक्तित्व (Personality)
  • संवेगात्मक (Emotional)

सफल सुचारु व मनोरंजक भेटवार्ता के प्रमुख पक्ष इस प्रकार हैं :-

  • भेंटवार्ता की शुरुआत परिचय व नर्म सवालों से की जानी चाहिए।
  • औपचारिक स्थितियों व व्यवहार से वार्ता का माहौल खुशगवार बनाया जाना चाहिए।
  • ठोस, तार्किक व कठिन मुद्दों के प्रश्नों में शिष्टता व प्रोफेशनलिज्म (Professionalism) का ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • भेंटकर्ता अतिथि से किसी प्रकार की प्रतिद्वंद्विता न रखे।
  • बल्कि वह यह प्रयास करे कि सहज व सामान्य वातावरण में भेंटवार्ता का दौर चले।
  • अगर तीखे, विवादास्पद व आवश्यक प्रश्न भी ‘शिष्टता‘ के नाम पर न पूछ जाएं तो यह बात भी गलत है।
  • अत: कार्यक्रम की भूमिका के अनुरूप व दर्शकों के प्रति न्याय करते हुए उचित प्रश्न पूछे जाने चाहिए।
  • अतिथि की रीति-नीति, शिक्षा-परिवार, अभिरुचियों आदि का पूर्व आकलन करना भेंटवार्ता को समृद्ध करता है।
  • इससे वार्ता में नवीनता व रोचकता आती है।
  • समय सीमा से अधिक प्रश्नों की तैयारी करनी चाहिए।
  • अन्तिम समय के प्रश्न विकल्प के तौर पर रखे जाएं।
  • समय बचने पर उनका इस्तेमाल उचित होगा।
  • भेंटकर्ता का प्रयास यह होना चाहिए कि वह कम से कम बोले।
  • अतिथि के मत व विचारों के लिए अधिक समय रखा जाए।
  • वार्ता का आरम्भ व अंत दोनों ही सटीक व सुखद होने चाहिए।

टेलीविजन पर पैनल चर्चाएं (Panel Discussion for Television)

टेलीविजन पर पैनल चर्चाएं (Panel Discussion for Television in Hindi)

Panel Discussion for Television in Hindi

घटना, क्षेत्र-विशेष, समसामयिक पहलू आदि के लिए पैनल चर्चाएं (Panel Discussions) आयोजित की जाती हैं। इसमें एंकर एक पक्ष को लेकर अलग-अलग व्यक्तियों से चर्चा करता है। अन्तर केवल इतना सा है कि भेंटवार्ता में वार्तालाप सवाल-जवाब की शैली में होता है और पैनल चर्चा (Panel Discussions) में सभी से केवल विषय केन्द्रित सवाल ही रखे जाते हैं।

सभी भाग लेने वालों को एक ही दर्जा और महत्ता दी जाती है। इस प्रकार की वार्ताओं में भाग लेने वाले अपने-अपने क्षेत्र के प्रखर विद्वान होते हैं। इन भाग लेने वालों का एक ही बराबर ‘पद‘ और ‘स्टेटस‘ का होना अति आवश्यक माना जाता है। भाग लेने वालों का चयन कार्यक्रम निर्माता केवल खुले विभाग, सूझबूझ, ध्यान व कल्पना शक्ति से ही कर सकता है।

प्राय: पैनल चर्चा (Panel Discussions) के लिए ऐसे विषय को लिया जाता है जो विवादास्पद और बहुचर्चित  हो। साथ ही जिस पर वाद-विवाद (Debate), टिप्पणियों (Comment) आदि की गुंजाइश हो। ऐसे विषय राजनीतिक (Political), सामाजिक (Social), आर्थिक (Economic), भौगोलिक (Geographic) कुछ भी हो सकते हैं। इन विषयों पर चर्चा के समय विरोध व विपक्ष भी हावी होता है।

पर यही इस चर्चा की विशेषता है। ‘भेंटवार्ता‘ से इसका रूप थोडा भिन हो ने पर भी यह लगभग उसी प्रारूप पर कार्य करता है। साथ ही अगर इसमें शामिल किए गए मुद्दे प्रखरता से उठाए गए हों तो लोग इन्हें अवश्य ही पसन्द करते हैं।

वृत्तचित्र लेखन (Writing for Documentaries in Hindi)

वृत्तचित्र लेखन (Writing for Documentaries in Hindi)

Writing for Documentaries in Hindi

  • फीचर लेखन की तरह ही वृत्तचित्र (Documentary Film) के लिए लेखन के पहलू लागू होते है।
  • वृत्तचित्र के लिए गहन अनुसंधान (Research) व विमर्श (Discussion) के बाद वृत्तचित्र की सामग्री का चयन किया जाता है।
  • इस स्रोत सामग्री से तकनीकी (Technology) व दृश्यात्मक (Visual) पहलुओं के अनुसार प्रारम्भिक स्क्रिप्ट (Script) लिखी जाती है।
  • जिसमें सम्पूर्ण विवरण, दृश्य व तकनीकी पहल होते हैं।
  • शूटिंग के के बाद उपलब्ध दृश्यों का प्राथमिक आकलन लेखक (Author) करता है।
  • दृश्यों व विवरणों की प्रकृति के अनुसार वह उनके बीच की योजक (Connector) कड़ी को संयोजित करके दूसरी विस्तृत स्क्रिप्ट (Script) लिखता है।
  • उस स्क्रिप्ट (Script) को ध्वनि व संगीत के प्रभावों के साथ वृत्तचित्र के दृश्यों में गूंथा जाता है।
  • ऐसे जगह जहां इनके बावजूद जानकारी व स्पष्टीकरण (Explanation) की आवश्यकता होती है।
  • वहा नेपथ्य (Backstory) से डिस्क्रिप्टर (Descriptor) की आवाज वृत्तचित्र के विवरण लेख को पढ़ती है।
  • श्रोता-दर्शक दृश्य व ध्वनि के योग से पूरी स्थिति से अवगत होते हैं।
  • भाषा की सहजता, शब्द-चयन, वाक्य-विन्यास उद्धरण विवरण सटीकता आदि वृत्तचित्र लेखन के वह पहलू हैं।
  • जो इसे नवीनता व रोचकता देते हैं।

टेलीविजन रिपोर्टिंग (Television Reporting Format in Hindi)

टेलीविजन रिपोर्टिंग (Television Reporting Format in Hindi)

Television Reporting Format in Hindi

टेलीविजन रिपोर्टिंग के विभिन्न पक्षों के अध्ययन के लिए निम्नांकित बिन्दु विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

1. समाचार परिकल्पना (Visualizing News)

कैमरा आपकी आंखों से देखता है और आपके मस्तिष्क की सोची हई बात को अंकित करता जाता है। न्यूज को विजुअलाइज करते समय एक प्रखर मस्तिष्क के साथ तकनीकी व वैचारिक समृद्धता आवश्यक है। दूरदर्शन समाचार तीन तरह से प्रभाव डालते हैं।

  • आंख पर
  • कान पर
  • मन पर।

अत: ‘न्यूज‘ के विषय में परिकल्पना करते समय तीनों पक्षों पर दृष्टि डाला जाना जरूरी है। तकनीकी दृष्टि से यह कार्य भले ही जटिल हो पर विभिन्न कोणों से तालमेल बैठाने पर इसके बेहतर परिणाम सामने आते हैं। समाचार-संकलन से प्रस्तुति तक बहुधा (Frequently) ऐसा होता है कि समाचार नई करवट ले लेता है। ऐसे में न्यूज की परिकल्पना का सटीक होना आवश्यक है।

बाढ़, भूकम्प, रेल-विमान दुर्घटना, आतंकवादी कार्यवाहियों आदि में इस प्रक्रिया की जरूरत बहुत प्रखरता से महसूस होती है। यदि समाचार दिया गया है कि भीषण दुर्घटना में 10 मरे और प्रसारण तक यह संख्या 100 तक पहुंचती है तो संयोजन व प्रस्तुति की यह एक भूल होगी। वैसे भी यह सर्वमान्य नियम है कि ‘देखी हई स्थिति‘ दर्शकों को लम्बे समय तक प्रभावित करती है। अत: न्यूज-विजुअलाइज करते समय इस तथ्य को दृष्टिगत रखें।

न्यूज-विजुअलाइजेशन हेतु प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं :-

  1. तार्किकता व दृश्यता का सम्बन्ध सटीक हो।
  2. दृश्य को इस प्रखरता से कैमरे में कैद किया जाए कि वह जनमानस को सकारात्मक रूप में उद्वेलित करे।
  3. परिकल्पना व प्रस्तुति में आए बदलाव को ध्यान रखा जाए।
  4. समाचार साधारण से लेकर अति-विशिष्ट तक के लिए होता है और उसके प्रभाव व्यापक होते हैं। अत: यह दृष्टिकोण हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
  5. प्रेरक, सकारात्मक, सांस्कृतिक, ऊर्जावान मूल्यवर्द्धक समाचारों में न्यूज विजुअलाइजेशन को प्राथमिकता मिले।

2. खोजी पत्रकारिता एवं साक्षात्कार तकनीक (Investigative Reporting & Interview Techniques)

खोजी पत्रकारिता एवं साक्षात्कार तकनीक (Investigative Reporting & Interview Techniques)

Investigative Reporting in Hindi

इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों में खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) का एक सफल पक्ष यह है कि वह दूरदर्शन हेतु समस्त कार्यवाहियों के लिए कैमरे का इस्तेमाल करता है। कैमरा वह पहलू है जो हर क्षण दर्शकों के सामने ‘आंखों-देखी‘ प्रस्तुत करता है। यह तय बात है कि आंखों देखे सच को झुठलाया नहीं जा सकता है।

खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) हेतु सक्षम संवाददाता (Reporter) व कैमरा मिलकर क्रान्ति कर सकते हैं। हाल ही में रक्षा मंत्रालय में की गई सौदेबाजी व पाकिस्तान टी. वी. पर भारत विरोधी दुष्प्रचार के सच का खुलासा खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) के सबल पक्षों का उदाहरण है।

खोजी पत्रकारिता में निम्नलिखित तथ्य प्रभावी भूमिका निभाते है।

  1. किसी भी स्रोत की अनदेखी न करें।
  2. बहुधा ना उम्मीद वाले स्रोतों से महत्त्वपूर्ण लीड मिलती है।
  3. कानून की परिधि की पालना आवश्यक है वरना यह आपको परेशानी में डाल सकती है।
  4. योजना, विवरणों, तथ्यों को साथ लेकर चलें।
  5. कठिन परिस्थितियों हेतु जोश व तकनीकी समृद्धता रखें।
  6. मानसिक प्रक्रिया पूरी रखें। संकेत, स्रोत, अध्ययन, कार्य-पद्धति,दृष्टिकोण निरीक्षण आदि तत्त्व बेहद उपयोगी होते हैं।
  7. अच्छे विश्वसनीय सूत्र जुटाएं। जन-सम्पर्क अधिकारी, जैसे लोग इसमें सहायक हो सकते हैं।
  8. संस्था व विभाग की रीति-नीति के अनुरूप छोटे व बड़े अधिकारियों से मिलकर तथ्यों की पुष्टि करें।
  9. स्रोत एवं सम्पर्कों को निरन्तर बनाए रखें।
  10. व्यक्तियों से निजी सम्पर्क व सामाजिक मेल-मिलाप से खोजी पत्रकार विश्वसनीय सिद्ध होता है।
  11. मौके- बेमौके उसे काम की सूचनाएं मिलती हैं।
  12. अपने सम्पर्क सूत्र से आत्मीयता रखें।
  13. यदि आप उससे कुछ छिपाएंगे तो वह आपसे बहुत कुछ छिपाएगा।
  14. चुगली, दोषारोपणछिछली बातों से बचें।
  15. राजनीतिक दलों व विशिष्टजनों से सम्पर्क रखना अच्छा है किन्तु साथ ही सच्चे पत्रकार का कर्तव्य निर्वहन भी आवश्यक है।
  16. मनोविज्ञान व समाज विज्ञान के सूत्र इस्तेमाल करिए।
  17. इससे आप सही वर्ग में घुलमिल सकेंगे व अच्छे सूत्र तलाश लेंगे।
  18. सरकारी रीति-नीति,उद्योग समाचार पाठकों के पत्र संस्थानों के मुखपत्र व छोटी-बड़ी अनदेखी घटनाओं पर दृष्टि रखिए।
  19. आपको काम की ठोस सामग्री मिल सकती है।
  20. प्रेस एक्ट, विधायिका, कार्यपालिका की वर्जनाओं को दष्टिगत रखिए।
  21. धैर्य-संयम-विवेक अपनाएं।
  22. घटना के निम्नलिखित तत्त्वों को तलाशिए :-
  • क्या
  • कहां
  • कब
  • किस पर
  • क्यों
  • कैसे।

3. आर्थिक रिपोर्टिग (Economic Reporting in Hindi)

आज का युग ‘उद्योग‘ का युग है। पूरा संसार आज एक वृहत बाजार बन रहा है। यही कारण है कि आज आर्थिक पत्रकारिता अहम स्थान रखती है। देश के बाजारों में कौन से उत्पाद उपलब्ध हैं और “आम जनता के सम्मुख बाजार क्या प्रस्तुत कर रहे हैं?

सेंसेक्स कितने अंक चढ़ा या उतरा?“, “विश्व बाजार में रुपए की साख कितनी बनी-बिगड़ी?पेट्रोल-गैस-बिजली की कीमतें उपभोक्ता सामान की स्थिति उत्पादनों का परिदृश्य व दाल-चावल-चीनी की समस्याएं आर्थिक पत्रकारिता का हिस्सा हैं।

किसानों को उपज का सही मूल्य, बाढ़-सूखे से खेती को नुकसान, बिजली-पानी के मूल्य आदि आर्थिक समाचारों का अंग है। क्योंकि पूरा समाज आर्थिक अवधारणा से ही जुड़ा है। अत: दूरदर्शन पर आज “इकोनॉमिक रिपोटिंग” मुख्य आधार रखती है। समाज का पूरा जीवन क्रम पैसे-रुपये के इर्द-गिर्द ही घूमता है।

अतः इकोनॉमिक रिपोटिंग (Economic Reporting) में अर्थव्यवस्था के सुलझे पहलुओं का समावेश आवश्यक है। आम जनता में जापति लाने वाले, सही निवेश वाले व अल्प बचत जैसी प्रवत्तियों के सकारात्मक विकास युक्त आर्थिक समाचार समाज को सही राह दिखा सकते हैं।

4. खेल रिपोर्टिंग (Sports Reporting in Hindi)

खेल रिपोर्टिंग (Sports Reporting in Hindi)

Sports Reporting in Hindi

भारत एक विशाल एवं प्रभुता सम्पन्न देश है किन्तु विश्व परिदृश्य में खेलों में हमारी स्थिति संतोषजनक नहीं है। जीवन व शिक्षा में खेलों की प्राथमिकता का अभाव इसकी एक वजह है। क्रिकेट मैच के समय खेल रिपोर्टिंग का श्रेष्ठ रूप सामने आता है। समूचा देश जैसे उसमें डूबा जाता हो।

खेल रिपोर्टिंग (Sports Reporting) में तकनीकी सम्पन्नता की खासी आवश्यकता होती है। प्रमुख खेल आयोजनों के समय उनके जीवन्त सीधे प्रसारण की व्यवस्था की जाती है। वैसे टेलीविजन के लिए खेलों का कवरेज आसान नहीं है। खेलों में गति अधिक होती है।

इससे उनकी कवरेज में अच्छे निर्माता (Creator), कैमरामैन (Cameraman), साउंड रिकॉर्डिस्ट (Sound Recordist), एडिटर्स (Editors) आदि की टीम का योगदान रहता है।

खेलों के कवरेज के प्रमुख बिन्दू इस प्रकार हैं :-

  • कैमरे को ऐसी जगह रखा जाए जिनसे ‘गति व एक्शन‘ लोगों तक बेहतरीन तरीके से पहुंच सकें।
  • खेलों के रोमांच को बढ़ाती दर्शकों की आवाज की रिकार्डिंग समुचित हो।
  • तकनीकी सुदृढ़ता हो ताकि खेल के बेहतरीन क्षण कवर हो सकें।
  • कार रेस में कारों की गति, क्रिकेट में छक्का और हॉकी में गोल में घसती दनदनाती गेंद के साथ कैमरा प्रभावी होता है तो दर्शक दृश्य से बंध जाता है।
  • आंखों देखा हाल सुनाने वाले कॉमेंटेटर (Commentator) खेल-रिपोर्टिंग (Sports Reporting) में महत्त्वपूर्ण योग देते हैं।
  • उन्हें खेल के हर पल बदलते पहलू की जानकारी होनी चाहिए।
  • खेलों की कवरेज (Coverage) के साथ सही आंकडे व जानकारी अच्छी रिपोर्टिग को प्रभावित करते हैं।
  • वर्तमान तकनीकी क्षमताओं से स्लो-मोशन (Slow motion), एक्शन रिपीट (Action repeat) व महत्त्वपूर्ण दृश्यों के पुनरावलोकन से खेल रिपोर्टिंग की प्रायकिता व जुड़ाव बढ़ जाता है।

टेलीविजन के फायदे और नुक्सान (Advantages and Disadvantages of Television in Hindi)

लाभहानि
  • टीवी मनोरंजन का एक प्रमुख साधन है। टीवी पर बच्चों, युवाओं, प्रौढ़ तथा वृद्ध सभी लोगों के लिए कार्यक्रम आते हैं।
  • जैसे कि हमने आपको बताया कि टेलिविजन समय बिताने का एक बेहतरीन उपकरण है पर अगर टेलीविजन देखना आदत बन जाए तो यह आपका महत्वपूर्ण समय भी बर्बाद कर सकता है।
  • अधिकांश विश्वसनीय जानकारी टीवी के द्वारा ही प्राप्त होती हैं। टेलीविजन के माध्यम से हम विश्व भर की सभी जानकारियाँ प्राप्त कर पाते हैं।
  • ज्यादा टीवी देखने से मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान के साथ, चिड़चिड़ा स्वभाव, स्मरण शक्ति कमजोर और निर्णायक शक्ति कम हो सकती है।
  • टीवी पर बच्चों को शिक्षित करने हेतु भी कई कार्यक्रम आते हैं। यह बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहन देते हैं।
  • लंबे समय तक लगातार झुक कर टीवी देखने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए हमेशा 2 घंटे तक टीवी न देखें।
  • यदि कोई एक कार्यक्रम भी परिवार के लोग साथ में बैठकर देखते हैं, तो इससे उन्हें साथ में वक्त बिताने का मौका मिलता है।
  • अनिद्रा, तनाव, बैचेनी, नाइटमेयर आदि रोगों का कारण भी आपका ज्यादा टीवी देखना है।
  • टेलीविजन के माध्यम से हम विश्व भर की सभी जानकारियाँ प्राप्त कर पाते हैं तथा इससे हमको कई प्रकार का ज्ञान भी मिलता है।
  • इससे लोगों में बड़ों का सम्मान करना और छोटों के प्रति स्नेह की भावना भी कम होती है। इसके अलावा ज्यादा टीवी देखने से आप आलसी हो जाते हैं और कोई काम भी नहीं करते।
  • टेलीविजन के माध्यम से भी लोग बहुत कुछ सीख सकते हैं। टीवी पर कई प्रकार के ज्ञान वर्धक प्रोग्राम भी टेलीकास्ट किये जाते हैं जिससे बच्चों और बड़ों दोनो का कई प्रकार के टॉपिक पर ज्ञान बढ़ता है।
  • यादा टीवी देखने से न सिर्फ आपका समय खराब होता है बल्कि इससे बच्चों का पढ़ाई या किसी और काम में मन नहीं लगता। इससे आपकी शारीरिक और मानसिक शक्ति कमजोर होने लगती है।
  • सभी लोगों के लिए अंग्रेजी सिखना उतना आसान नहीं होता है। लेकिन बहुत सारे लोग टेलीविजन देख कर बहुत आसानी से अंग्रेजी सीख लेते हैं।
  • ज्यादा टीवी देखने से व्यक्ति के अन्दर अकेलापन घर कर जाता है। वह ख्वाबों की दुनिया मे जीने लगता है। जब वह अपने रियल लाइफ मे खुद को वैसा नही पाता है तो दुखी होता है।
  • जो लोग छुट्टी पर हैं या जो अब रिटायरमेंट पर घर पर हैं उनके लिए खाली समय को बिताना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे मैं उन लोगों के लिए टेलीविजन खाली समय को बिताने का एक अच्छा उपकरण है।
  • टेलीविजन जितना बच्चों के लिए अच्छा, उतना ही ज्यादा खतरनाक भी है। कुछ ऐसे टेलीविजन शो होते हैं जो बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालते हैं। कुछ ऐसे 18 + TV शो, क्राइम पेट्रोल शो या कंडोम का विज्ञापन जो बच्चों के लिए बिलकुल सही नहीं है। खुले आम टीवी पर चल रहे हैं।
  • बच्चों के लिए विशेष एपिसोड देखकर हमारे बच्चे मजेदार तरीके से नैतिक पाठ सीख सकते हैं।
  • रिसर्च के अनुसार, कलर्ड टीवी देखने से हर साल करीब 500 बच्चे ब्लड कैंसर के शिकार हो जाते हैं। इसलिए बच्चों को कम से कम टीवी देखने का आदत डालें और उन्हें आउटडोर गेम्स खेलने के लिए ले कर जाए।

इन्हें भी देखे –


निष्कर्ष (Conclusion)

मुझे आशा है कि “टेलीविजन क्या है? (What is Television in Hindi)“, “टेलीविजन पत्रकारिता क्या है? (What is Television Journalism in Hindi)“, “टेलीविजन का इतिहास (History of Television in Hindi)” टेलीविजन पत्रकारिता (Television Journalism) से सम्बन्धित सारे सवालों का जवाब आवश्य मिल गये होंगे। टेलीविजन मुख्य रूप से दृष्टि-निर्बन्ध के सिद्धान्त पर आधारित है।

टेलीविजन क्या है?” जिस वस्तु या व्यक्ति का बिम्ब टेलीविजन के माध्यम से प्रसारित करना होता है। “टेलीविजन क्या है?”उस पर बहुत तेज़ प्रकाश डाला जाता है। वस्तु या व्यक्ति की तस्वीर को क्रम में विभक्त कर छोटे-छोटे विभिन्न घनत्वों वाले अवयव में बदल दिये जाते है तथा उनकी संगत तरंगों का माडुलन कर एक निश्चित दिशा में प्रेषित द्वारा संचारित किया जाता है।

ग्राही द्वारा छोटे-छोटे उसी क्रम में इन अवयवों को जोड़कर मूल तस्वीर प्राप्त कर ली जाती है। जैसा की हमारी आँखों के सामने एक सेकेण्ड में 20-25 क्रमिक परिवर्तन वाले चित्र के गुजरने पर वह गतिमान चित्र के रूप में दिखाई देता है।

अगर आपको “टेलीविजन क्या है? (What is Television in Hindi)“, “टेलीविजन पत्रकारिता क्या है? (What is Television Journalism in Hindi)” पर पोस्ट पसंद आया तो आप इसे अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर शेयर आवश्य करे। अगर इस पोस्ट में कोई भी समस्या हो तो, आप मुझे कमेंट करे। हमारी टीम आपकी पूरी मदद करेगी।

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