ग्रामीण पत्रकारिता क्या है? जानिए हिंदी में

आज हम जानेगे की ग्रामीण पत्रकारिता क्या हैं? जानिए हिंदी में (What is Rural Journalism in Hindi)ग्रामीण पत्रकारिता की चुनौतियां क्या-क्या हैं? (Challenges of Rural Journalism in Hindi), इस पोस्ट में ग्रामीण पत्रकारिता से सम्बन्धित कुछ ऐसे सवालों का जवाब देने जा रही हूं।ग्रामीण पत्रकारिता क्या है? जानिए हिंदी में (What is Rural Journalism in Hindi)

मुझे पूर्ण विश्वाश हैं की आपको आपके सवालों का जवाब आवश्य मिल जायेंगे। ग्रामीण पत्रकारिता क्या हैं? इसके साथ-साथ हम जानेगे की कृषि पत्रकारिता क्या हैं? (What is Agricultural Journalism in Hindi) कृषि पत्रकारिता से जुड़े हर सवाल का जवाब आपको मिलेंगा।

ग्रामीण पत्रकारिता क्या हैं? जानिए हिंदी में (What is Rural Journalism in Hindi)

भारत देश अपने कुछ शहरों में नहीं बल्कि सात लाख गावों में बसा हुआ हैं। ये कहना गलत नहीं होगा की भारत गांवों का और किसानों का देश है। कुछ सालो से गावों में भी शिक्षा के प्रसार के साथ अखबारों और अन्य संचार माध्यमों की पहुंच हो गई है। वर्तमान की बात करे तो गांव के लोग भी समाचारों में रुचि लेने लगे हैं। यही कारण है कि अब अखबारों में गांव की खबरों को महत्व दिया जाने लगा है। शिक्षितों का सोच शहरी हो गयी हैं। वो गावों को अज्ञात अपराध कुरीतियों से भरा और पिछड़ेपन का प्रतीक मानते हैं।

यह कहना गलत नहीं होगा की शहर में धूर्तता, अपराध का बोलबाला हैं। शहर में बातूनी और चालाकी की शिक्षा दी जाती हैं। वही गाँव के सीधे सपाट बयानी वाले उनसे हर क्षेत्र में पीछे रह जाती हैं। संचार विविध माध्यमों द्वारा मात्र 7% प्रतिशत स्थान गाँव को मिलता हैं। आजकल भारतीय बाजारों में तकनीकी वस्तुओं का बोलबाला है। तकनीकी इतनी सस्ती होती जा रही है, कि हर कोई इससे अछूता नहीं रह सकता। शहर के कारोबारी से लेकर गांव के किसान तक तकनीकी वस्तुओं का उपयोग कर रहे हैं। आज किसान भी गांव में रंगीन टीवी, डी0टी0एच0, एफ0एम0 रेडियो, पंखा तक उपयोग कर पा रहा है।

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ग्रामीण पत्रकारिता में मुख्य रूप से क्षेत्र हैं –

  • कृषि
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • रीती-रिवाज
  • भेद-भाव
  • गरीबी
  • कुपोषण
  • वनों का क्षरण

पत्रकार को ग्रामीण क्षेत्र में रिपोर्टिंग करनी चाहिए। गाँव के हर समस्या पर लेखी करना। गांव में समाजिक मामलों से जुड़े ऐसे समाचार होते हैं जो पाठकों को नया अनुभव देते हैं। समय-समय पर गांवों में विभिन्न सरकारी योजनाएं चलती रहती हैं। इन याजनाओं से गांवों को अवगत करना पत्रकार ही होता हैं और इन याजनाओं में आए बदलाव के साथ साथ योजना में भ्रष्‍टाचार के समाचार भी गांव के हित में होते हैं। अगर  पत्रकार इन योजनाओं पर  पैनी नजर रखेंगे तो योजना का जो लाभ मिल रहा है वह और अधिक मिलने लगेगा क्योकि सरकारी दफ्तरों को पता चलेगा की इन योजनाओ पर पत्रकार की नजर बखूबी बनी हुई हैं हैं और यह खबरों में रह रही हैं तो वह गलत काम करने से पहले सोचेगा और गलत काम करने से बचेगा।

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ग्रामीण पत्रकारिता का महत्व – (Importance of Rural Journalism in Hindi)

पत्र- पत्रिकाओं में सदा से ही समाज को प्रभावित करने की क्षमता रही है। समाज में जो हुआ, जो हो रहा है, जो होगा, और जो होना चाहिए यानी जिस परिवर्तन की जरूरत है, इन सब पर पत्रकार को नजर रखनी होती है।

  • दिन प्रतिदिन की घटनाओ का सुरूचिपूर्ण (मनोहर) प्रकाशन करना।
  • वैचारिक आदान-प्रदान का सफल माध्यम बनाना।
  • समाचारों, समीक्षाओ, स्तम्भों, लेखों, अग्रलेखों द्वारा स्वस्थ जनमत का निर्माण करना।
  • समाजोपयोगी एवं स्वस्थ मनोरंजन के साधन उपलब्ध करना।
  • राष्ट्रिय एवं सामाजिक एअकता में योगदान एवं सकारात्मक तत्त्वों को बढावा देना।
  • साहित्यिक, संस्कृतिक, औधोगिक विकास को बदावा देना।

ग्रामीण पत्रकारिता का उद्देश्य – (The Purpose of Rural Journalism in Hindi)

  • नई जानकारियां उपलब्ध कराना।
  • सामाजिक जनमत को अभिव्यक्ति देना।
  • समाज को उचित दिषा निर्देश देना।
  • स्वस्थ मनोरंजन की सामग्री देना।
  • सामाजिक कुरीतियों को मिटाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना।
  • धार्मिक सांस्कृतिक पक्षों का निष्पक्ष विवेचन करना।
  • सामान्यजन को उनके अधिकार समझाना।
  • कृषि जगत व उद्योग जगत की उपलब्धियां जनता के सामने लाना।
  • सरकारी नीतियों का विश्लेषण और प्रसारण।
  • स्वास्थ्य जगत के प्रति लोगों को सतर्क करना।
  • सर्वधर्म समभाव को पुष्ट करना।
  • संकटकालीन स्थितियों में राष्ट्र का मनोबल बढ़ाना।
  • वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का प्रसार करना।
ग्रामीण विकास पत्रकारिता – (Rural Development Journalism – in Hindi)
  1. गाँव के विकास की निति का निर्माण ग्रामीणों द्वारा किया जाना।
  2. कार्यक्रमों में पारदर्शिता एवं संवेदनशीलता करना।
  3. गाँव के विकास से संदर्भित लोगो की मानसिकता में परिवर्तन करना।
  4. गाँव की जरूरते और साधन को उपलब्ध करना।
  5. स्थानीय अभिक्रम से हो रहे कार्य और सरकारी कार्य को बदावा देना।
  6. गाँव वालों की परस्पर पूरकता और उनकी तयारी।
  7. पहले के कार्यक्रम में कमजोरियों और मजबूतियों में विकास करना।
  8. गाँव में उपलब्ध कच्चा माल एवं संसाधन तथा उसका उपयोग करना।
  9. गाँव जे नवयुवकों में उद्यमिता (Entrepreneurship) का विकास करना।
  10. बैंक के माध्यम से लाभदायी योजना का वित्त पोषण करना।

ग्रामीण विकास में योगदान –

  क्रियावान्य   निति विषयक 
 बहार कम करने वाले  शिक्षिक, पत्रकार, 
 गाँव के मूल निवासी  बी. डी. ओ. , वी. डी. ओ. 
  किसान, व्यवसायी  राजनितिक, समाजसेवी  
 उधोगपति पुजारी, मौलवी, पादरी 
 शासन  बाहरी संस्थाएँ, 
बैंक  बाहरी शक्तियाँ 
 स्वैछिक संगठन पड़ोसी 
मजदूर बाहरी पुराने अनुभव 
 निर्माणकर्ता  चिकत्सक, वैध, हाकिम

ग्रामीण पत्रकारिता की प्रतिष्ठा तभी होगी जब वे गाँधीजी के बैटन को याद रखेंगे। “आप लोग गाँव आयें और काम करें क्योकिं भारत की आत्मा तो गाँव में ही बस्ती हैं। सबसे पहला कम गाँव की स्वच्छता और शुद्ध पिने की पानी की व्यवस्था करे। दूसरा, शराबबंदी करने का प्रयास करे। तीसरा, बुनियादी शिक्षा का प्रचार करें। चौथा, गाँव में बहुत साड़ी कुरीतियाँ हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास करें।

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