फोटो पत्रकारिता क्या है? (PhotoJournalism in Hindi) – जानिए हिंदी में।

फोटो पत्रकारिता हिंदी में। (PhotoJournalism in Hindi)

विषय-सूची

फोटो पत्रकारिता हिंदी में आज हम जानेगे की फोटो पत्रकारिता की परिभाषा (What is PhotoJournalism in Hindi), फोटो पत्रकारिता का इतिहास क्या है? (What is the History of PhotoJournalism in Hindi)फोटो पत्रकारिता क्या है? (What is PhotoJournalism in Hindi),  फोटो पत्रकारिता की अर्थ एवं परिभाषा क्या हैं? (What is the Meaning and Definition of PhotoJournalism)फोटो पत्रकारिता हिंदी में (Photojournalism in Hindi)

फोटो पत्रकारिता का स्वरूप एवं उदेश्य क्या है? (What is the Nature and Purpose of PhotoJournalism) जानिए हिंदी में

फोटो पत्रकारिता का इतिहास (History of PhotoJournalism in Hindi)

 फोटो पत्रकारिता का इतिहास

चित्रों के माध्यम से किसी घटना को प्रमाणित करने का इतिहास उतना ही पुराना हैं। जितना की आदिमानव का गुफाओ में चित्र बनाना, जिसका वह शिकार किया करते थे। गुफाओ में बने चित्र उस कल के चित्रमय समाचारों के समान हैं।

  • फोटो पत्रकारिता के इतिहास मे रेखा चित्रों का प्रचलन 1839 में हुए अविष्कार से पहले 1607 से आरम्भ हो चुका था
  • 1839 में फोटो पत्रकारिता का अविष्कार हुआ
  • जब यूरोप में लकड़ी के ठप्पों पर नक्काशी करके समाचार पत्रों और पत्रिकाओ में रेखाचित्र छापे जाने लगे
  • जर्मनी, आस्ट्रिया, नीदरलैंड और इटली में ऐसे समाचार पत्रों और पत्रिकाओ का प्रकाशन हुआ करता था
  • उस समय छोटी पुस्तिका और न्यूज लैटर ही प्रकाशित किये जाते थे और उन्हें दुकानों और मेलो में बेचा जाता था
  • उसमें अधिकतर उन लोगो के बारे में जानकारी मिलती थी, जिनका या तो क़त्ल कर दिया गया होता था या फिर वे किसी प्राकृतिक आपदा में मर चुके होते थे
  • 18वी शताब्दी तक ऐसी पुस्तिकाएं और न्यूज लैटर काफी लोकप्रिय रहे
  • 1632 में स्वीडिश ( Swedish Intelligencer) नामक ऐसा पहला समचार पत्र प्रकाशित किया गया। जिसमे रेखाचित्र छापे गाये थे।

लकड़ी के टप्पों का प्रचालन (Operation of Wood Clippers)-

  • 19वी शताब्दी क मध्य से समाचार पत्रों और पत्रिकाओ में लकड़ी के टप्पों के प्रयोग से चित्र प्रकाशित करने की परम्परा अधिक प्रचलित हुई
  • उन दिनों लगभग 16 पन्नो की साप्ताहिक पत्रिकाए प्रकाशित की जाती थी। जिनमे बहुत संख्या में रेखा चित्र छापे जाते थे।
  • उस समय के फोटो पत्रकारों का मुख्य उद्देश्य कला के माध्यम से फोटो समाचार पत्रों को रोचक बनाना था
  • लेकिन चित्रों में समाचार के महत्व को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी
  • लकड़ी के ठप्पों पर बड़ी बारीकी से उभरी हुई तस्वीर बनाई जाती थी
  • लकड़ी के ठप्पे बन्ने के लिए प्रयोग की जाने वाली लकड़ी बहुत सख्त होती थी
  • उस पर चित्र उल्टे बनाये जाते थे। ताकि वे छपने के बाद सीधे नजर आये।
  • लकड़ी की रूपरेख बनाने के लिए पहले लकड़ी को छोटे छोटे हिस्सों में काट लिया जाता था
  • ताकि नक्काशी करने वाला उस रुपरेखा के अनुरूप लकड़ी के प्रत्येक ठप्पे पर अपनी दक्षता\ होशियारी (Efficiency) से मीनाकारी कर सके
  • समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में ऐसे चित्र छापने से आकर्षक लगने लगे
  • समाचारों और विज्ञापनों का स्वरूप ही बदल गया और इसके पाठको की संख्या बदने लगी
  • चित्र छापने की इस जटिल प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए और प्रयत्न किये गये
  • उन दिनों प्रयोग किए गये लकड़ी के ठप्पों का आज भी कला की दुनिया में बहुत मूल्य लगे जाता था
  • क्योकि उन्हें कला की दुन्मिया का मौलिक नमूना मन जाता हैं

दि पैनी मैगजीन (The Penny Magazine)-

  • 1832 में लंदन से दि पैनी मैगजीन नामक एक पत्रिका का प्रकाशन हुआ जिसमे बहुत से रेख चित्र छापे जाते थे
  • इसका सम्पादन चार्ल्स व्हाइट द्वारा किया जाता था और यह हर शनिवार को प्रकाशित की जाती थी
  • इसका प्रकाशन मादुरो को ध्यान में रख कर किया जाता था क्योकि इसका उद्देश्य समाज में सुधर लाना था
  • लेकिन पाठको के लिए यह पत्रिका सामान्य ज्ञान की सूचना की स्रोत थी
  • इस पत्रिका में इंग्लैण्ड के प्रमुख स्थानों के बारे में जानकारी होती थी
  • पशुओं और पक्षियों पर लेख प्रवासियो की समस्याएँ और यह तक की इसमें कवितायए  भी प्रकाशित की जाती थी

दि इलस्ट्रेटिड लंदन न्यूज (The Illustrated London News)-

  • 1839 में फोटोग्राफी के अविष्कार की घोषणा की गई थी। लेकिन फोटोग्राफी से सज्जा हुआ पहला पत्रिका 1842 में सप्ताहिक दि इलस्ट्रेटिड लन्दन न्यूज के प्रकाशन से हुआ।
  • इसका प्रकाशन आरम्भ होने के बाद आबजरवर, सन्डे टाइम्स और विकली क्रोनिकल ने धीरे-धीरे रेखाचित्रो का प्रकाशन बंद हो गये थे
  • हर्बरट इन्ग्राम नमक एक युवक, जो छापाई का काम भी जनता था और न्युज एजेंट भी था, 1842 में नाटिंघम से लन्दन आया
  • हर्बरट इन्ग्राम दि इलस्ट्रेटिड लन्दन न्यूज का पहला संस्करण 14 मई 1842 को प्रकाशित किया।

 भारत में फोटो पत्रकारिता का इतिहास (History of PhotoJournalism in India)

  • भारत में पत्रकारिता का इतिहास गरिमापूर्ण है। जब 72 साल पहले भारत आजाद हुआ, समाचार पत्र , पत्रिकाए राष्ट्रीयता की भावना से ओत-प्रोत थी।
  • समाचार पत्रों और पत्रिकाओ ने न केवल स्वतंत्रता आन्दोलन को बल दिया।
  • बल्कि समाजिक बुराइयों के हटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1550 में पहली मुद्रण प्रेस पुर्गालियों ने हमारे देश में स्थापित की।
  • दूसरी अंग्रेजो ने सन 1684 में स्थापित हुआ।
  • 1780 में James Augustus Hickey ने पहला समाचार पत्र “दि बंगाल गजट” प्रकाशित किया
  • 1818 में बंगाल से समाचार द्र्पर्ण नामक पहला स्थानीय भाषा का समाचार पत्र प्रकाशित किया गया।
  • 20 वी शताब्दी के आरम्भ में समाचार पत्र  और पत्रिकाओ में चित्र प्रकाशित किये जाने लगे
  • जब 1947 में देश आजाद हुआ तो समाचार पत्रों को एक अनुकूल वातावरण मिला

फोटो पत्रकारिता का अर्थ (Meaning of Photojournalism in Hindi)

फोटो पत्रकारिता में फोटो के प्रयोग से पत्रकारिता का स्वरूप ही बदल गया हैं

फोटो पत्रकारिता में फोटो चित्रों की भाषा हैं। सबसे प्रभावी चित्र वही मन जाता हैं जो बिना किसी अन्य भाषा के सहारे अपनी पूरी बात स्वंय कह सके।

संचार क्या है? (What is Communication in Hindi) – जाने हिंदी में। यहाँ पढ़ें

फोटो पत्रकारिता का परिभाषा (Definition of Photojournalism in Hindi)

डॉ. बद्रीनाथ कपूर के अनुसार

पत्रकारिता पत्र-पत्रिकाओं के लिए समाचार लेख आदि को सम्पादित करता हैं

लेकिन उस खबर में फोटो न लगे तो वो अधूरी सी लगती हैं फोटो उस घटना को और प्रभावी बना देता हैं।

ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी शब्दकोश के अनुसार

फोटो पत्रकार के व्यवसाय का प्रमुख साधन हैं – पत्रकारिता जिसमें लेखन, खबर इकठा करने के साथ-साथ खबर या घटना का फोटो भी लेना

कर्ल. जी. मुलर के अनुसार

पत्रकारिता तत्कालिक घटनाओ का सूक्ष्म विश्लेषण पर आधारित ज्ञान का कार्य हैं

ऐसा कार्य जिसमें आवश्यक तथ्यों को प्राप्त करके उसकी महत्ता के अनुसार ही फोटो के साथ तात्कालिक घट्नाओ को बुद्धिमता से जनजीवन के सन्मुख प्रस्तुत करना पड़ता हैं।

चैम्बर तथा न्यू वेब्सटर्ज शब्दकोश के अनुसार

प्रकाशन, सम्पादन, लेखन एवं प्रसारण युक्त समाचार माध्यम का व्यवसाय ही पत्रकारिता हैं।

फोटो पत्रकारिता अभिवयक्ति की एक मनोरम कला हैं।

इसका कम घटनों को बिना कोई भाषा के पाठको के दिमाग पर छाप छोड़ना।

महात्मा गाँधी के अनुसार

पत्रकारिता का एक उदेश्य जनता की इच्छाओं-विचारों को समझना और उन्हें व्यक्त करना हैं

दूसरा उद्देश्य अनपढ़ लोगो तक घटना को समझाना। और वह हैं फोटो पत्रकारिता द्वारा समझाना।

महादेवी वर्मा के अनुसार

पत्रकारिता एक रचनाशील विधा हैं।

इसके बिना समाज को बदलना असम्भव हैं।

पत्रकारिता को और प्रभावशाली फोटो पत्रकारिता ने बना दिया हैं।

डॉ. हरिमोहन के अनुसार

पत्रकारिता शब्द का प्रयोग करते ही हमारे मांस पटल पर मुद्रित अक्षरों से भरे समाचार-पत्र आ जाते है

लेकिन पत्रकारिता को और गंभीर फोटो पत्रकारिता बना दिया हैं।

फोटो पत्रकारिता का स्वरूप एवं उद्देश्य (Nature and Purpose of Photojournalism in Hindi)

इन्हें भी पढ़े- कैमरा क्या है? (What is Camera in Hindi) – जानिए हिंदी में।

पत्रकारिता समाज की दर्पण होती हैं

इस दर्पण को और गंभीर रूप से प्रभावशाली फोटो पत्रकारिता ने बना दिया हैं

समाज में जो घटित हुआ या जो घटित होगा उन सब का वर्णन-विवरण पत्र-पत्रिकाओ में किसी न किसी रूप में अवश्य होता हैं।

पत्रकार घटनाओ को और भी बेहतर तरीके से समझाने के लिए चित्र (फोटो) का प्रयोग करते हैं।

फोटो पत्रकारिता का स्वरूप एवं उद्देश्य निम्नलिखित हैं।

समाज की गतिविधियों का दर्पण

पत्रकारिता समाजिक जीवन की सत-असत, दृश्य-अदृश्य, और शुभ-अशुभ छवियों को दिखने वाला दर्पण हैं। समाज में फैली हुई कुरीतियों, अंधविश्वासों जैसी बुराइयों को दूर करने में लगे हुए हैं। पत्रकारिता समाज में जो कुछ भी घटित होता हैं। चाहे वह देश, धर्म, राजनीती, साहित्य आदि।

किसी भी अंग का क्यों न हो, उसका विश्लेष्ण करती  र समाज को सही-गलत न फर्क दिखाती हैं। पत्रकारिता में  लिखाकर लोगो तक बाते पहुचाई जाती हैं अब आधुनिक युग में फोटो द्वारा भीना कुछ लिखे हुए लोगो के दिल और दिमाग दोनों पर कब्ज़ा कर रहे हैं।

समाज का दिशा-दर्शन

पत्रकारिता समाज की दिशा-दर्शक और नियामक (नियम पर चलाने वाला) हैं। यह बुराइयों को दूर करने का प्रयास करती हैं और समाज को सही दिशा की ओर बदने के लिए प्रेरित करती हैं। एक स्वास्थ समाज  निर्माण न स्वस्थ पत्रकारिता का महत्त्वपूर्ण योगदान रहता हैं। स्वस्थ पत्रकारिता ही  को सही दिशा दे सकती हैं।

मानवीय गुणों के विकास में सहायक

पत्रकारिता मानवीय गुणों को विकसित करती हुई उसी की सूक्ष्म दृष्टि पर पड़े हुए आवरण को चीरकर ज्ञानलोक में ले जाती हैं

हर मनुष्य साहसी, स्पष्टवादी होने की आकांक्षा रखता हैं।

कहने की आवश्यकता नही की इन गुणों का विकास पत्रकारिता के माध्यम से सहज रूप में ही हो जाता हैं।

क्योंकि एक पत्रकार जो कुछ भी कहता हैं वह निर्भीक व डंके की चोट पर कहता हैं।

मनुष्य समाचार पत्रों अपने सहज स्वभाव को पढ़कर उत्तेजित हो उठता हैं।

इससे मनुष्य में साहस का संचार और निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता हैं।

 समाजिक जागृती का परिचायक

पत्रकारिता समाज का प्रतिबिम्ब हैं।

वह समाज में जागृति लाने का माध्यम भी हैं।

जैसे – समाचार-पत्रों, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट इन सभी माध्यमों द्वारा पाठकों, श्रोताओं, दर्शकों को जागृति पैदा करती हैं।

विविधात्मक और व्यापक

पत्रकारिता का क्षेत्र ने केवल विविधात्मक नही बल्कि व्यापक भी हैं। आज पत्रकारिता के  क्षेत्र में इतनी विविधता आ गयी हैं की उसे सिमित परिधि में नही रखा जा सकता हैं। पत्रकारिता अब सिर्फ रोचक जानकारी, राजनीती तक ही सिमित नहीं हैं बल्कि साहित्य, फिल्म, खेलकूद, व्यवसाय, विज्ञान, धर्म तथा अब तो ग्रामीण क्षेत्रो में भी प्रवेश चुकी हैं।

मनोरंजन

पत्रकारिता ज्ञान, सूचना, के साथ-साथ मनोरंजन का भी साधन हैं। मनोरंज मनुष्य के लिए उतना ही आवश्यक हैं जितना की भोजन। उदहारण –  फ़िल्मी दुनिया के समाचार, नाटक, हलकी फुल्की रचनाएं, मनोरंजन समाचार, चुटकुले आदि।

सम्प्रेषण का माध्यम

21वी सदी का युग विज्ञानं और प्रौद्योगिकी का युग हैं। विज्ञानं ने पूरी दुनिया को एक ही सूत्र में बांध दिया हैं। विज्ञानं ने रेडियो, टेलीविजन, और इंटरनेट आदि ऐसे माध्यम दिये हैं जिससे साडी दुनिया का समाचार पलक झपकते ही मिल जाते हैं। समाज में घटने वाली घटनाएं चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में, राजनीती के क्षेत्र में, आर्थिक क्षेत्र में, या साहित्यक क्षेत्र में हो सभी के सम्प्रेषण का कार्य करती हैं।

ज्ञान-विज्ञान

पत्रकारिता ज्ञान-विज्ञानं का विश्वसनीय सूचना माध्यम हैं। यह समाज को विज्ञानं, कृषि, सिनेमा, खेलकूद, साहित्य, कला, संस्कृति, राजनीति, अपराध आदि विविध विषयों से सम्प्रेषित करती हैं।

फोटो पत्रकारिता का आवश्यकता एवं महत्व (Need and Importance of Photojournalism in Hindi)

हर व्यक्ति अपनी जिज्ञासा को पूरा करना चाहता हैं। हर व्यक्ति की जिज्ञासा की पूर्ति पत्रकारिता करती हैं। जैसे – समाजशास्त्री को सामाजिक व्यवस्था के बारे में जानकारी देती हैं, साहित्यकारों को साहित्यिक जानकारियां देती हैं और व्यापारियों को आर्थिक जानकारियाँ देती हैं

जिस प्रकार किसी पौधे के जीवन के लिए पानी, खाद और वायु की आवश्यकता होती  ठीक उसी प्रकार व्यक्ति और समाज  के विकास के लिए  पत्रकारिता की आवश्यकता हैं।

पौराणिक युग में जो स्थान और महत्त्व नारद मुनि का था, वही स्थान और महत्व आज के समय में पत्रकारिता का हैं। उस समय नारद मुनि ही ख़बरों को देवताओं को दिया करते थे। आज वही काम पत्रकारिता करती हैं।

पत्रकारिता एक प्रकार से सूचना देने वाला “मौसमी पक्षी” होता हैं। अगर एक दिन समाचार पत्र के न आने पर पूरा समाज व्याकुल हो जाता हैं।

प्रजातांत्रिक देशों में तो समाचार-पत्रों को लोकसभा का स्थाई अधिवेशन कहा गया हैं। यानि चौथा स्तंभ मन गया हैं। श्री विधालंकार ने पत्रकारिता को “5वा वेद” माना हैं। पत्रकारिता समाज का अविभाज्य अंग हैं।

पत्र-पत्रिकाओं के द्वारा ही आधुनिक समाज सामूहिक जानकारी और दृष्टिकोण का निर्माण करते हैं और अपने लिए भविष्य का मार्ग चुनते हैं।

पत्रकारिता ज्ञान के प्रकाशक मनोरंजन की दात्री, घटनाओं की विस्तृत विवरण करने वाली, धार्मिक, राजनितिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्क्रतिक और साहित्यिक परिस्थितियों की व्याख्याता और व्यापक भूमिका पर प्रतिबद्ध करने वाला अनिवार्य साधन हैं

इस प्रकार सामान्य पाठक के ज्ञानवर्द्धन, रुचि, वास्तु स्थिति के चित्रण, जनमत निर्माण में पत्रकारिता का विशेष महत्व हैं।

फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र व प्रकार – (Fields & Types of Photojournalism)

फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र व प्रकार इस प्रकार हैं –

  • खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism)
  • आर्थिक एवं वाणिज्य पत्रकारिता (Economical and Commercial)
  • ग्रामीण एवं कृषि पत्रकारिता (Rural and Agricultural Journalism)
  • व्याख्यातम पत्रकारिता (INterpretative Journalism)
  • विकास पत्रकारिता (Development Journalism)
  • खेल पत्रकारिता (Sports Journalism)
  • सन्दर्भ पत्रकारिता (Reference Journalism)
  • संसदीय पत्रकारिता (Parliamentary Journalism)
  • फिल्म पत्रकारिता (Film Journalism)
  • रेडियो पत्रकारिता (Radio Journalism)
  • दूरदर्शन पत्रकारिता (Television Journalism)
  • विधि पत्रकारिता (Law Journalism)
  • अंतरीक्ष पत्रकारिता (Space Journalism)
  • पित पत्रकारिता (Yellow Journalism)
  • सर्वोदय पत्रकारिता (Sarvodaya Journalism)

फोटो पत्रकार के गुण ( Qualities of Photojournalist in Hindi)

  1. एक अच्छा फोटो पत्रकार बनने के लिए यह जरुरी हैं की उसमें एक संवाददाता के सभी गुण मौजूद हों और उसे अपने विषय में दक्षता हासिल हो
  2. वह हर दिन नया विषय पर काम करे व हर विषय पर तरह-तरह का काम करे
  3. विचारों की मौलिकता, नवीनता एवं प्रभावशाली फोटो पत्रकार के लिए अधिक जरुरी हैं
  4. कैमरों के सभी कल-पुर्जों के ज्ञान के साथ–साथ डार्करूम में भी काम करना जनता हो
  5. किसी भी विचार या घटना को चित्र रूप में सोचना ही अच्छे फोटो पत्रकार की पहचान हैं
  6. फोटो पत्रकारिता का काम अकेलेपन का होता हैं। उसका विश्वाश पात्र सिर्फ कैमर होता हैं। इसलिए फोटो पत्रकार में दृढ़ निश्चय और आताम्विश्वास होना चाहिए।
  7. फोटो पत्रकार निडर, धैर्यशील, जुझारू व संघर्षशील हो तभी वह दंगो, हिंसा-संघर्ष, युद्धों व प्रकृति आपदाओं को कैमरे में कैद कर सकता हैं
  8. फोटो पत्रकार के लिए समय बडा महतवपूर्ण होता हैं वह समय के साथ होड़ करता हैं। समय उसकी प्रतिक्षा नहीं करता हैं। समय का पाबन्द होना मुख्य गुण हैं।
  9. फोटो पत्रकार को सचचाई और ईमानदारी के सिधान्तों का पालन करना चाहिए
  10. फोटो पत्रकार को प्रेस सम्बन्धी कानूनों का ज्ञान होना बहुत जरुरी हैं

इन्हें भी देखें –

Karuna Tiwari is an Indian journalist, author, and entrepreneur. She regularly writes useful content on this blog. If you like her articles then you can share this blog on social media with your friends. If you see something that doesn't look right, contact us!

7 thoughts on “फोटो पत्रकारिता क्या है? (PhotoJournalism in Hindi) – जानिए हिंदी में।”

  1. करुणा जी, इतनी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद। मैंने पी.जी.डी.जे.एम.सी. में प्रवेश लिया है,अतः इस प्रकार की सामग्रियों की जरूरत रहती है। वैसे मैं एक इंजीनियर हूँ और प्रबंधक के पद पर हूँ। हमारी आदत जरा caculated & amp; technical मूल बात को पकडने की बन जाती है। गैर तकनीकी / गैर विज्ञान संकायों में किसी भी साधारण बिंदु को इतना लिखा जाता है कि कोफ्त होने लगती है, यानी एक ही बात को घुमा फिरा कर paragraph बढ़ाते रहना। ये ज्ञान मापने का कौन सा मापदंड बनता जा रहा है? अधिक पृष्ठ अधिक अंक?? मजे की बात ये कि आठ पृष्ठों में लिखी बात का वास्तविक ज्ञान आपने बस दस लाइन में लिख दी हैं। ।

    प्रतिक्रिया
    • धन्यवाद। मयंक कुलश्रेष्ठ आपको आर्टिकल पसंद आया मुझे इस बात की ख़ुशी हैं की मै आप लोगों के लिए to the point लिखा रही हु। कोई भी TOPIC पर समस्या हो तो आप बता सकते हैं की DurgaNews आपके लिए और किस TOPIC पर पोस्ट ला सकता हैं। धन्यवाद।

      प्रतिक्रिया
    • धन्यवाद, आपका मयंक कुलश्रेष्ठ आपने मुझे इस काबिल समझा। मै आपका मार्गदर्शन आवश्य करुँगी। आप ईमेल के जरिये सम्पर्क करे। कृप्या अपना फ़ोन नंबर वेबसाइट पर ना दे। धन्यवाद।

      प्रतिक्रिया

Leave a Comment

error: DMCA Protected !!
20 Shares
Share20
Tweet
Pin
Share