नगर निगम क्या है? (What is Municipal Corporation in Hindi) – जानिए हिंदी में।

नगर निगम क्या है? (What is Municipal Corporation in Hindi)

नगर निगम क्या है?” भारत के विभिन्न शहरों में बढ़ती आबादी और शहरीकरण को एक स्थानीय शासी निकाय की आवश्यकता थी जो की राज्य सरकार (State Government) ने निश्चित अनुदान एकत्र करके आवश्यक सामुदायिक सेवाएं जैसे स्वास्थ्य (Health), शैक्षणिक संस्थान (Educational Institutions), आवास (Housing), परिवहन (Transport) आदि प्रदान करने के लिए नगर निगम (Municipal Corporation) को बनाया है। किसी भी शहर का स्थानीय सरकार और उस राज्य के शहरों का विकास का काम करती है। दस लाख से अधिक आबादी वाली महानगर (Metropolitan) के विकास के लिए स्थानीय सरकार कार्य करती है। जिसे भारत में नगर निगम (Municipal Corporation) के रूप में जाना जाता है।

नगर निगम क्या है? (What is Municipal Corporation in Hindi)

नगर निगम (Municipal Corporation) शहर की स्वच्छता का ध्यान रखता है। शहर में गंदगी नहीं दिखती है। क्योंकि नगर निगम (Municipal Corporation) अपने सफाईकर्मीयों से 24 घंटा सफाई करवाते रहती है। शहर का हर चौराहा और हर गली में जा-जा कर नगर निगम (Municipal Corporation) के सफाईकर्मी कूड़ा और कचरा का सफाई करती रहती है। जिस वजह से हमारा और आपका शहर स्वच्छ और सुन्दर दिखता है। “नगर निगम क्या है? (What is Municipal Corporation in Hindi)“, “नगर निगम का इतिहास (History of Municipal Corporation in Hindi)“, “नगर निगम के सदस्य कौन-कौन हैं? (Members of the Municipal Corporation in Hindi)“, “नगर निगम चुनाव आयोजन (Municipal Election Planning in Hindi)“, “नगर निगम के कार्य क्या है? (Functions of Municipal Corporation in Hindi)” आदि। तो आइये इन सारे सवालों का जवाब जानते हैं।

नगर निगम का इतिहास (History of Municipal Corporation in Hindi)

भारत में नगर निगम (Municipal Corporation), देश में शीर्ष श्रेणी के शहरों के नागरिक के प्रशासन के लिए बनाया गया नगरपालिका (Municipality) सरकार का सर्वोच्च रूप है। भारत में नगर निगम की सरकार वर्ष 1687 में मद्रास (Madras) और 1726 में कलकत्ता (Calcutta) और बॉम्बे (Bombay) में अस्तित्व में रही है।   1850 में, टाउनस अधिनियम में सुधार भारत सरकार (Indian Government) द्वारा पारित किया गया था जिसने एक प्रणाली पार्षद (Councilor) की स्थापना की और उन्हें प्रशासनिक अधिकार दिया। 1870 में लॉर्ड मेयो (Lord Mayo) ने शहर की नगरपालिकाओं की प्रणाली को स्थापित किया। 1882 में, लॉर्ड रिपन (Lord Ripon) ने स्थानीय स्वशासन के लिए भारत में नगरपालिका शासन की रूपरेखा और संरचना तैयार की।

1935 में भारत सरकार के एक अन्य अधिनियम ने स्थानीय सरकार को राज्य या प्रांतीय सरकार के दायरे में लाया और विशिष्ट शक्ति दी गई। नगर निगम (Municipal Corporation) शहरी स्थानीय सरकार का शीर्ष और उच्चतम रूप है क्योंकि यह दिन-प्रतिदिन के प्रशासन में तुलनात्मक रूप से अधिक शक्तियों और स्वयं शासन का आनंद लेता है। ग्रामीण-स्थानीय सरकार के विपरीत, भारत में शहरी स्थानीय सरकार श्रेणीबद्ध नहीं है। एक संस्था के रूप में नगर निगम (Municipal Corporation) अधिक सम्मानजनक है और स्थानीय सरकार के अन्य रूपों की तुलना में स्वराज्य का अधिक से अधिक उपाय करता है।

नगर निगम के सदस्य (Members of Municipal Corporation in Hindi)

  • नगर निगम में एक समिति (Committee) होती है। जिसमें सदस्यों के साथ एक मेयर भी शामिल होता है।
  • पंचायती राज व्यवस्था  (Panchayati Raj System) के निगम अधिनियम 1835 के तहत बनते हैं जो निगम मेट्रोपॉलिटन शहरों को आवश्यक सामुदायिक सेवाएं प्रदान करते हैं।
  • मेयर नगर निगम (Municipal Corporation) का प्रमुख होता है।
  • निगम नगर कमिशनर (Commissioner) के प्रभार में रहता है।
  • निगम के विकास की योजना बनाने के लिए अध्यक्ष और सदस्य के साथ-साथ कार्यकारी अधिकारी का भी होता है।
  • सदस्यो की संख्या शहर के क्षेत्रफल और जनसंख्या पर भी निर्भर करती है।
  • सबसे बड़े निगम भारत के, चार महानगरी ( Metropolis) शहर दिल्ली (Delhi), मुंबई (Mumbai), कोलकाता (Kolkata) और चेन्नई (Chennai) हैं।

नगर निगम चुनाव आयोजन (Municipal Election Planning in Hindi)

  • नगर निगम का चुनाव ‘राज्य चुनाव आयोग‘ के दिशा निर्देश, निरीक्षण, देख-रेख और नियंत्रण के तहत किए जाते हैं।
  • निगम राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
  • इसलिए नगर निकायों के चुनाव के लिए एक समान नियम नहीं हैं।
  • कुछ राज्यों में, नगर निकायों का चुनाव, राज्य सरकार आयोजित करता है।
  • जबकि कुछ राज्यों में कार्यकारी अधिकारी आयोजित करता है।

नगर निगम चुनाव कैसे होता है? (Municipal Corporation in Hindi)


  • नगर निगम के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा किए गए मतदान के माध्यम से चुना जाता है।
  • निगम चुनाव शहर के एक विशेष वार्ड में आयोजित होता है।
  • वार्ड के लिए प्रतिनिधि या सदस्यों का चुनाव एक निजी वार्ड की निर्वाचक नामावली के द्वारा किया जाता है।
  • प्रत्येक वार्ड के लिए मतदाता सूची को एक या कई हिस्सों में विभाजित किया जाता है जो वार्ड के भीतर के क्षेत्र पर निर्भर करता है।
  • जहां प्रत्येक भाग के मतदाता रहते हैं।
  • यानि कि प्रत्येक भाग में शामिल मतदाता सड़क या कस्बा उस वार्ड के भीतर एक नामित क्षेत्र से संबंधित हैं।
  • सभी भागों के मतदाता एक साथ मिलकर एक विशेष वार्ड की मतदाता सूची बनाते हैं।

नगर निगम चुनाव को लड़ने के लिए योग्यता

  • भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • उम्र 21 साल की होनी चाहिए।
  • नाम वार्ड की निर्वाचक नामावली में पंजीकृत हो।
  • नगर निगम के चुनाव को लड़ने के लिए उसे पहले कभी भी अयोग्य घोषित नहीं किया गया हो।
  • वह व्यक्ति भारत में किसी भी नगर निगम का कर्मचारी नहीं होना चाहिए।

कुछ ऐसी भी सीटें हैं जो अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes), अनुसूचित जातियों (Scheduled Castes), पिछड़े वर्गों (Backward Classes) और महिलाओं (Women) के लिए आरक्षित (Reserved) हैं। प्रत्येक प्रत्याशी के नामांकन फॉर्म में एक घोषणा होनी चाहिए कि वह किस वर्ग, जाति या जनजाति का है। यदि महिला उम्मीदवार के लिए सीट आरक्षित है तो इस बात की घोषणा होनी चाहिए कि उम्मीदवार महिला है।

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मेयर, रीव या आईडी चेयर पर्सन का चुनाव कैसे होता हैं?

किसी शहर या कस्बे के सीईओ (CEO) को नगरपालिका (Municipality) के मतदाताओं के वोट से चुना जाता है। जब तक कि परिषद (Council) सदस्यों के बीच से सीईओ (CEO) को नियुक्त करने के लिए समिति द्वारा अपेक्षित उपचुनाव पारित नहीं करता है। नगरपालिका जिले में, परिषद सदस्यों के बीच से सीईओ (CEO) को नियुक्त करती है। जब तक कि यह उपचुनाव पास नहीं करता है। जब तक सीईओ (CEO) की भूमिका, निर्धारित न हो जाये। तब तक एक डिप्टी सीईओ (Deputy CEO) इस भूमिका को ग्रहण करेगा। जो इस प्रकार हैं-

  • परिषद की अध्यक्षा
  • परिषद के सदस्यों के बीच आम सहमति साधक
  • वरिष्ठ निर्वाचित अधिकारियों के साथ संपर्क
  • विभिन्न बोर्डों और समितियों पर पदेन सदस्य
  • औपचारिक जिम्मेदारियों के संबंध में प्रमुख प्रतिनिधि
  • सरकार के अन्य स्तरों के साथ संपर्क
  • नीति विकास के संबंध में सलाह

नगर निगम का कार्यकाल अवधि

नगर निगम का कार्यालय अपनी पहली बैठक की शुरुआत से पांच साल की अवधि के लिए चलता है। इसके विभिन्न परिस्थितियों में कार्रवाई की जा सकती है।

  • यदि राज्य, नगर निगम के कर्तव्यों में लापरवाही को देखती है।
  • यदि राज्य को ऐसा लगता है कि नगर निगम अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है।
  • राज्य में नगरपालिका चुनाव रद्द करने या नगर निगम के संचालन से वार्ड के पूरे क्षेत्र को वापस लेने की घोषणा।

नगर निगम के कार्य क्या है? (Functions of Municipal Corporation in Hindi)

नगर निगम अपने क्षेत्र के लोगों को आवश्यक सेवाएं प्रदान कराती है जो इस प्रकार है।


  • अस्पतालों (Hospitals)
  • जलापूर्ति (Water Supply)
  • जल निकास (Drainage)
  • बाजार स्थानों (Market Places)
  • फायर ब्रिगेड (Fire Brigade)
  • सड़कें (Roads)
  • पुल के ऊपर (Over the Bridge)
  • ठोस अवशेष (Solid Residue)
  • स्ट्रीट लाइटिंग (Street Lighting)
  • पार्क (Park)
  • शिक्षा (Education)
  • जन्म और मृत्यु क्षेत्र में रिकॉर्ड (Birth and Death Records)

एक सदस्य की भूमिका और कर्तव्य

  • हर तरह से नगर पालिका के कल्याण और हितों के लिए काम करना।
  • परिषद की बैठकों, परिषद समिति की बैठकों और अन्य संबंधित निकायों की बैठकों में भाग लेना।
  • नगरपालिका के कार्यक्रमों और नीतियों के विकास और मूल्यांकन में भाग लेना।
  • निजी तौर पर परिषद की बैठकों में चर्चित मामलों को आत्मविश्वास के साथ रखना।
  • नगर पालिका के संचालन और प्रशासन के बारे में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी से सभी जानकारी प्राप्त करना।
  • इन्हीं कर्तव्यों के समान या आवश्यक कर्तव्यों को करना।

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निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, मुझे आशा है कि “नगर निगम क्या है? (What is Municipal Corporation in Hindi)” “नगर निगम के कार्य क्या है?” इसके इतिहास से संबंधित सभी सवालों के जवाब मिल गए होंगे। फिर भी अगर कुछ कन्फ्यूजन है, तो आप टिप्पणी कर सकते हैं, हम आपकी मदद करेंगे। अपने आस-पास साफ-सफी रखे। जरुरी नहीं है की नगर निगम के ही सफाईकर्मी आपके शहर को स्वच्छ और सुन्दर बनाये। ये आपकी भी जिम्मेदारी बनती है की अपने शहर को स्वच्छ और सुन्दर बनाये। आपको यह पोस्ट अच्छा लगा तो, इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूलें।

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Municipal Corporation
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