खोजी पत्रकारिता क्या है? (What is Investigative Journalism in Hindi) – जानिये हिंदी में।

खोजी पत्रकारिता क्या है? (What is Investigative Journalism in Hindi)

खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism in Hindi)” का मतलब है जिन खबरों को दूसरे लोग छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उसे समाज के सामने बेनकाब करना है। पत्रकारों (Journalists) का काम लोगों को यह बताना है कि उनके आसपास के समुदाय (Community), समाज (society) और दुनिया (world) में क्या चल रहा है। पत्रकार तथ्यों (Facts) को खोजने और उन्हें अपने पाठकों या श्रोताओं के सामने लाना होता हैं।

खोजी पत्रकारिता क्या है?” एक खोजी पत्रकार (Investigative Journalist) को अधिकांश कार्यों में ऐसी जगहों पर अदालतों (Courts) और सांसदों (MPS), आपदाओं (Disasters), सार्वजनिक बैंकों (Public Banks), बच्चों (Children) और खेल आयोजनों (Sporting Events) के रूप में तथ्यों को खोजना आसान है। “खोजी पत्रकारिता क्या है?” लोग आमतौर पर पत्रकारों को समाचार बताने में खुशी महसूस करते हैं। दरअसल, कई देशों में हजारों लोग जनसंपर्क में पूरा समय देते हैं। पत्रकारों को बयान देना, प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) और अन्य प्रकार की जानकारी देते हैं।

खोजी पत्रकारिता क्या है? (What is Investigative Journalism in Hindi)
खोजी पत्रकारिता (Investigative journalism in Hindi) को जासूसी पत्रकारिता भी कहा जाता है। वास्तव में, हर प्रकार की पत्रकारिता में किसी न किसी रूप में जाँच-पड़ताल कर के ही समाचार बनाया जाता है। यानि कुछ नया खोजने का प्रयास किया जाता है। खोजी पत्रकारिता तथ्यों को खोजने की वजह से थोड़ा अलग हटकर माना गया है। तथ्यों पर आधारित खबर को खोज कर निकालना खोजी पत्रकारिता है।

कई मामलों में सरकारें (Governments), कंपनियां (Companies), संगठन (Organization)और व्यक्ति निर्णय या घटनाओं को छिपाने की कोशिश करते हैं जो अन्य लोगों को प्रभावित करते हैं। जब एक पत्रकार उन मामलों पर रिपोर्ट करने की कोशिश करता है जो कोई गुप्त रखना चाहता है, तो यह खोजी पत्रकारिता है। खोजी पत्रकारिता, पत्रकारिता का एक रूप है। जिसमें पत्रकारों ने गंभीर अपराधों (Crimes), राजनीतिक (Political), भ्रष्टाचार (Corruption) या कॉर्पोरेट (Corporate) गलत कामों जैसे ब्याज के किसी एक विषय की गहराई से जांच की है। एक खोजी पत्रकार महीनों या वर्षों तक शोध और रिपोर्ट तैयार कर सकता है। प्रैक्टिशनर या व्यवसायी (Practitioner) कभी-कभी “वॉचडॉग रिपोर्टिंग” या “जवाबदेही रिपोर्टिंग” शब्दों का उपयोग करते हैं।

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खोजी पत्रकारिता का अर्थ (Investigative Journalism Meaning in Hindi)

खोजी पत्रकारिता का अर्थ है। जिसमें पत्रकार गहरी दिलचस्पी के विषय की पड़ताल करता है, जो अक्सर अपराध, राजनीतिक भ्रष्टाचार या कॉर्पोरेट गलत काम से जुड़ी होती है। एक खोजी पत्रकार को महीनों एक खबर का विश्लेषण करने में लग जाता हैं। शोध और तैयारी की एक रिपोर्ट खोजी पत्रकारिता का प्राथमिक स्रोत है। जानकारी की हाल खोजी पत्रकारिता के द्वारा किया जाता है। समाचार पत्र, तार सेवाओं और स्वतंत्र पत्रकारीता है। दस्तावेजों के इस तरह के रूप में विश्लेषण, मुकदमा और अन्य कानूनी दस्तावेजों , कर रिकॉर्ड (Tax Records), सरकार की रिपोर्ट है।

अमेरिका के वाटरगेट कांड के कारण दो साहसी पत्रकार बुकवर्ड और बर्नस्टेन, जब इस घोटाले को सामने लाये तो अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी थी। खोजपूर्ण पत्रकारिता का विकास उन्नीसवीं सदी में हुआ। इसका उद्देश्य जल्दी व सही ऐसी न्यूज देना होता था जो कि बहुत सारे व्यक्तियों को एक साथ प्रभावित कर सकती हो। अभी हाल ही में तहलका डॉट कॉम के पत्रकारों द्वारा देश के रक्षा सौदों में दलाली का जो तथ्यपूर्ण समाचार प्रस्तुत किया गया। उससे सम्पूर्ण देश राजनीतिक स्तर पर हिल उठा था। जनता व सरकार इस हेतु सही दिशा में सोचने को मजबर हुए। एक संवाददाता अश्विनी सरीन धोलपुर के देह व्यापार को उजागर करने के उद्देश्य से खुद ही भेष बदलकर कमला नामक एक औरत को खरीद लाये और देश भर में चर्चा का विषय बने।

1988-89 में योफोर्स तोपों की खरीद में रिश्वत के मामले का पर्दाफाश भी खोजपूर्ण पत्रकारिता से सम्बन्धित था। इस विषय पर ‘हिन्दू‘ समाचार पत्र ने कुछ दस्तावेजों की प्रतिलिप छापकर सरकार को मुसीबत में डाल दिया था। 2 खोजी पत्रकारिता का अर्थ ऐसी जानकारी देना होता है जो गोपनीयता की परतें उघाड़ कर लायी गई हों। खोजी पत्रकार अपनी पैनी नजर से समाचारों की जुगाड़ में लगा रहता है। खोजी पत्रकार का सबसे कठिन कार्य गोपनीयता की दीवार को भेदना होता है क्योंकि खबर तो वह होती है।

जिसके बारे में किसी को पता नहीं हो व अचानक एक नग्न सच्चाई पाकर पाठक अभिभूत हो जाता है। इस प्रकार के समाचारों को ‘स्कूप‘ कहते हैं। पत्रकारिता ऐसे ही कंधे पाकर नई जमीन कुरेदती व नए क्षितिज छूती है। प्रशासनिक भ्रष्टाचार, राजनीतिक अनाचार व सामाजिक दुष्प्रवृत्तियों का पर्दाफाश करना पत्रकारों का कर्तव्य माना जाता है। जो पत्रकार अन्याय के खिलाफ कलम चलाता है। उसकी ताकत उसके द्वारा खोजे गये तथ्य होते हैं। यही उसकी शक्ति होती है।

खोजी पत्रकारिता का जनक (Father of Investigative Journalism in Hindi)

भारत में खोजी पत्रकारिता के जनक “रूसी खुरशेदजी करंजिया” थे। पत्रकारिता के इस पेशे मे उन्हें पचास बरस हो गए। यह अपने आप में एक संस्था हैं। वे सफल संपादक, उद्यमी, संगठक और जनसम्पर्क अधिकारी है। वे भारत के दस बेहतरीन पौशाक पहनने वालों में से है। नफासत (उत्तम कोटि का) पसंद, स्पष्टवक्ता और तहजीब वाले व्यक्ति है। “रूसी खुरशेदजी करंजिया” का जन्म मुम्बई में 15 सितम्बर, 1912 को एक पारसी परिवार में हुआ था।

भारत में खोजी पत्रकारिता के जनक “रूसी खुरशेदजी करंजिया” थे। कई भंडाफोड़ किए। अनेक अंर्तराष्ट्रीय हस्तियों से दोस्ती-दुश्मनी की। इंदिरा गांधी का समर्थन किया और इमर्जेन्सी का विरोध भी किया। लोग उन्हें ‘कम्युनिस्ट’ मानते हैं। लेकिन वे कहते हैं कि मैं शुद्ध पत्रकार हूं।

इन्होने पत्रकारिता की शुरुआत “टाइम्स ऑफ इण्डिया” से की थी। अपने पचास साल के केरियर में उन्होंने अनेक विवादों को जन्म दिया। कई भंडाफोड़ किए। अनेक अंर्तराष्ट्रीय हस्तियों से दोस्ती-दुश्मनी की। इंदिरा गांधी का समर्थन किया और इमर्जेन्सी का विरोध भी किया। लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी की पहली ही मुलाकात में उन्होंने इमर्जेन्सी लगाने की सलाह दे डाली थी। नेहरू के पंचशील के सद्धिांतों को प्रचारित किया। लोग उन्हें कम्युनिस्ट मानते हैं। लेकिन वे खुद कहते हैं कि मैं शुद्ध पत्रकार हूं।

खोजी पत्रकार के गुण-

  • समझने की योग्यता (Talent to Understand)
  • तेज आंखें व श्रवण शक्तिं (Sharp Eyes and Ears)
  • संघने की शक्ति (Nose for News)
  • जिज्ञासा, उत्सुकता व उत्तरदायित्व (Emphasis to Know, Curiosity, Responsibility)
  • विश्वसनीयता, निडरता एवं सत्यता (Reliability, Boldness & Truthfulness)
  • खबरों हेतु असीमित स्रोत (Unlimited Resources for Nows)
  • भौगोलिक कार्य-सीमाओं का ज्ञान (Knowledge of Geographical Work Limits)
  • समाचार की महत्ता का आकलन (Knowledge to Evaluate News Value)
  • विस्तृत अध्ययन क्षेत्र (Enlarge Study Field)
  • मनोरंजक शैली (Entertaining Style)
  • ज्ञान की भिन्न-भिन्न शाखाओं (Different Branches of Knowledge)

खोजी पत्रकारिता के औज़ार

  1. छानबीन
  2. दस्तावेज हासिल करना
  3. सवाल-जवाब या साक्षात्कार
  4. निगरानी या औचक निरीक्षण
  5. धन का अनुवर्तन
  6. घात लगाकर सुबूत जुटाना
  7. इतिहास खंगालना
  8. प्रयोगशाला और यंत्र परीक्षण
  9. ऑनलाइन खोज
  10. केस स्टडीज यानि घटनाओं का संदर्भ
  11. आंकड़ा विश्लेषण
  12. हर समाचार का मूल मंत्र खोज है

खोजी पत्रकारिता में सोशल मीडिया की भूमिका

सोशल मीडिया एक ऐसी प्लेटफॉर्म है। जिसने खोजी पत्रकरिता को ही बदल दिया है। सोशल मीडिया से खोजी पत्रकरिता का नए-नए मुद्दे खोजने में पत्रकारों का मदद कर रहा है। लोग सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में हर अपराध को एक-दुसरे तक पहुचाने में सफल हो रहे है। सोशल मीडिया के जरिये दुनियाभर के तमाम बड़े नेताओं और उद्योगपतियों के भ्रष्टाचार उजागर होते दिख रही है। किस तरह सैकड़ों पत्रकारों ने लाखों दस्तावेजों की पड़ताल की और बेहद गोपनीय तरीके से दुनिया को इस भ्रष्टाचार से अवगत कराया।

अविकसित देशों में किस तरह सरकार के दबाव में पत्रकार हर चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे देशों में खोजी पत्रकारिता की कितनी गुंजाइश है। एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अपनी आप बीती बताते हुए कहा था की “उसका अपहरण किया गया और उसकी पिटाई की गई। इसके बावजूद पत्रकार ने हिम्मत नहीं हारी और दुनिया को पाकिस्तान के हालात के बारे में बताया। बाद में उसी पत्रकार को “डेनियल पर्ल अवॉर्ड” दिया गया था।

खोजी पत्रकारिता में सोशल मीडिया की भूमिका

सोशल मीडिया पर खोजी पत्रकारिता के मुद्दे तलाशने के मामले को “क्राउड सोर्सिंग” भी कहा जाता है। इस क्राउड सोर्सिंग में नई चुनौतियां भी होती है। सोशल मीडिया के आगमन के साथ, खोजी पत्रकारिता की सफलता का पैमाना भी बदल रहा है। यह भी देखा जा रहा है की “किस रिपोर्ट को कितने लोग लाइक और शेयर करते हैं यह भी महत्वपूर्ण हो गया है।” आम जनता भी खोजी पत्रकारिता पर अपना राय देने में पीछे नहीं रही है। जिससे पाठकों के पास पहुंचने वाली जानकारियां और ज्यादा संपन्न होती है।

वह महिला पत्रकार जिसने खोजी पत्रकारिता का इतिहास बदल दिया

जब “एलिजाबेथ कोचरीने सीमान (Elizabeth Cochrane Seaman)” उर्फ नीली बलाई (Nellie Bly) को हमेशा की तरह इस बार भी “पिट्सबर्ग डिस्पैच अखबार” द्वारा 1887 में थिएटर और कलाओं की रिपोर्टिंग का काम सौंपा गया, तो उसने मन ही मन में फैसला किया कि पिट्सबर्ग डिस्पैच में उसके दिन खत्म हो गए। यानि वह अब इस अखबार में काम नहीं करेगी। इसलिए, वह यहां से (पिट्सबर्ग डिस्पैच अखबार) जाने के बाद वह सीधे “जोसेफ पुलित्जर” के अखबार, द न्यूयॉर्क वर्ल्ड की ओर रुख किया। जिसे आधुनिक पत्रकारिता का पिता कहा जाता है।

नीली बलाई अमेरिकी पत्रकार थी। नीली बलाई वह महिला पत्रकार है। जिसने खोजी पत्रकारिता जगत में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर ली। नीली बलाई ने “ब्लैकवेल आइलैंड पागलखाने” में एक पागल के रूप में दाखिल लिया था। ताकि, वह वहां की रिपोर्ट तैयार कर सके और पूरी दुनिया के सामने उसकी सच्चाई ला सके।

यह एक ऐसा कदम था। जो उन्हें गुमनामी के अंधेरे से निकालकर पत्रकारिता की प्रसिद्धि में ले आया। द न्यूयॉर्क वर्ल्ड में क़दम रखने के कुछ वर्ष बाद उन्हें अख़बार की तरफ से एक अंडरकवर रिपोर्टिंग की पेशकश की गई। इस रिपोर्टिंग में बहुत ज्यादा खतरा था। यह बात अखबार के एडिटर को पता था। इस लिए वह नीली बलाई को इस बात पर विचार करने के लिए कहा।

क्योंकि नीली बलाई को “ब्लैकवेल आइलैंड पागलखाने” में एक पागल के रूप में दाखिल होना था। जिसमें मेडिकल जांच की प्रक्रिया से भी गुजरना शामिल था। काम बहुत ही खतरनाक और नाज़ुक था, क्योंकि एक गलत कदम पूरे मिशन को तहस-नहस कर देता। हालाँकि, नीली बलाई ने तमाम दुर्व्यवहारों के बावजूद न सिर्फ यह मिशन कामयाबी के साथ पूरा किया। बल्कि खोजी पत्रकारिता जगत में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर ली।


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निष्कर्ष (Conclusion)

“खोजी पत्रकारिता क्या है?” खोजी पत्रकारिता (Investigative journalism in Hindi) को जासूसी पत्रकारिता भी कहा जाता है। वास्तव में, हर प्रकार की पत्रकारिता में किसी न किसी रूप में जाँच-पड़ताल कर के ही समाचार बनाया जाता है। यानि कुछ नया खोजने का प्रयास किया जाता है। खोजी पत्रकारिता तथ्यों को खोजने की वजह से थोड़ा अलग हटकर माना गया है। “खोजी पत्रकारिता क्या है?” तथ्यों पर आधारित खबर को खोज कर निकालना खोजी पत्रकारिता है। खोजी पत्रकारिता वह है। जिसमें तथ्य जुटाने के लिए गहन पड़ताल की जाती है और जैसे-जैसे जांच पड़ताल आगे बढ़ती है।

“खोजी पत्रकारिता क्या है?” उसी प्रकार रहस्य की परतें खुलती जाती है। खोजी पत्रकार संघ के सदस्यों को अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए ही जाना जाता है। संघ में विभिन्न समाचार पत्रों, न्यूज चैनल एवं पत्रिकाओं में कार्य करने वाले पत्रकार सदस्य हैं। “खोजी पत्रकारिता क्या है?” यदि किसी भी प्रकार की जानकारी को दबाया या छिपाया जा रहा हो, जो तथ्य किसी भी प्रकार की लापरवाही (Negligence), शोषण (exploitation), अनियमितता (Irregularity), रिश्वतखोरी (Bribery), गबन (Embezzlement), भ्रष्टाचार (Corruption) को सार्वजनिक करता हो या जनता के धन को गलत ढंग से प्रयोग किया जा रहा हो या जनता का काम करने में जानबूझ कर अफसर आनाकानी कर रहे हों तो ऐसे समाचारों को सामने लाना खोजी पत्रकारिता है और यही खोजी पत्रकार का कर्तव्य भी है।

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Karuna Tiwari is an Indian journalist, author, and entrepreneur. She regularly writes useful content on this blog. If you like her articles then you can share this blog on social media with your friends. If you see something that doesn't look right, contact us!

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