अस्थमा या दमा क्या है? (What is Asthma in Hindi) जानिए हिंदी में।

दोस्तों, आज हम बात करेंगे। अस्थमा या दमा क्या हैं? जानिए हिंदी में (What is Asthma in Hindi)। आज के समय में सबसे जायदा लोगों में सांस की समस्या उत्पन्न हों रही हैं। अस्थमा (दमा) एक ऐसा रोग हैं, जिसमें रोगी की सांस नालियों में कुछ प्रभाव से सुजन आ जाती हैं।

अस्थमा क्या हैं जानिए हिंदी में (What is Asthma in Hindi)

इस कारण रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती हैं। जिन कारणों से दमा की समस्या बढ़ती हैं। उन कारणों को एलर्जन्स कहते हैं. ऐसे कारणों में धूल (घर या बहार की) या पेपर की डस्ट, रसोई की धुआं, नमी, सीलन, फास्टफूड, मानसिक चिंता, पालतू जानवर और पेड़-पौधे आदि प्रमुख होते हैं। ज्यादातर लोगो में दमा बचपन से प्रारंभ हो जाता हैं। अस्थमा या दमा क्या हैं? जानिए हिंदी में (What is Asthma in Hindi)।

अस्थमा के होने के कारण – (Due to Asthma)

आनुवांशिक और पारिवारिक कारण। जैसे परिवार के किसी सदस्य को दमा रहा हैं, तो घर के दुसरे सदस्य में दमा से ग्रस्त होने का जोखिम बढ़ जाता हैं। इसके आलावा दमा की समस्या को बढ़ाने वाले दो प्रमुख कारण हैं।

अस्थमा के होने के कारण - (Due to Asthma)

  1. घर के अन्दर ( इनडोर एलर्जन)
  • हाउस डस्ट माइट यानि घरेलू धूल में उपस्थित कीट
  • जानवरों के शारीर पर उपस्थित एलर्जन
  • कॉकरोच
  1. बाह्य करक (आउटडोर एलर्जन)
  • पौधों के फूलों में पाए जाने वाले सूक्ष्म कणों को परागकण कहते हैं, जो एलर्जी के प्रमुख कारक हैं।
  • विभिन्न लोगों में कुछ खाद्य पदार्थो को ग्रहण करने से भी दमा की समस्या बढती हैं. जैसे अनेक लोगो को अंडा, मांस, मछली, फास्टफूड, शीतल पेय और आइसक्रीम आदि खाने से दमा की समस्या बढ़ जाती हैं।

 अस्थमा  होने के लक्षण – (Symptoms of Asthma)

  • सांस लेने में कठिनाई, जो दौरों के रूप में तकलीफ देती हैं।
  • खांसी जो रात में गंभीर हो जाती हैं।
  • सीने में कसाव या जकड़न।
  • सीने में घरघराहट जैसे आवाज आना।
  • गले में सिटी जैसे आवाज आना।
  • बार-बार जुकाम होना।

अस्थमा से पाएं निदान – (Get Asthma Diagnosis)

सीने में आला लगा कर और म्यूजिकल साउंड सुनकर दमा का पता लगाया जा सकता हैं। इसके आलावा फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच पी. ई. एफ. आर. और स्पाइरोमीट्री द्वारा की जाती हैं। अन्य जांचो में रक्त की जांच, छाती और पैरानेसल साइनस का एक्सरे आदि की जाती हैं।

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इन बातो पर दे ध्यान

  • दमा की दावा हमेशा पास रखे और कंट्रोलर इनहेलर हमेशा समय से ले।
  • सिगरेट और सिगार के धुएं से बचे।
  • अपने फेफड़ों से सम्बन्धित व्यायाम करे।
  • यदि बलगम गाढ़ा हो गया हैं। खांसी घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाए अ रिलीवर इनहेलर की जरूरत बढ़ गई हो, तो शीघ्र ही अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अस्थमा का इलाज और बचाव इस तरह करे – (Treat Asthma and Defend this Way)

  • इनहेलर व दवाएं विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह की अनुसार ही लेनी चाहिए।
  • मौसम बदलने से सांस की तकलीफ बढती हैं। इसलिए मौसम बदलने के  4- 6 सप्ताह पहले ही सजग हो जाना चाहिए।
अस्थमा के लिए डाइट प्लान, क्या खाएं और किसे कहें ना
  1. अस्थमा में आप अपने दिन की शुरुआत ग्रीन या ब्लैक टी से कर सकते हैं। इसके आलावा मछली का तेल, अखरोट, कद्दू का बीज, सोया पनीर, सोयाबीन, दालचीनी, सरसों कला तेल, सूखे अंजीर का सेवन भी अस्थमा रोगी क्ले लिए फायदेमंद होता हैं।
  2. अपने खाने में हरी सब्जियां, शलगम, पुदीना, अदरक, लहसुन, आलू, ब्रोकोली और तुलसी आदि शामिल करें।
  3. अस्थमा में आते की रोटी, जई आते की रोटी, दलीय और मुंग की दाल आदि का सेवन करें।
  4. अस्थमा रोगी को विटामिन सी से भरे भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। इसके लिए जयादा से जयादा खरबूजा, तरबूज, पपीता, अंगूर, कीवी, आंवला, अनार, सेब, खजूर, अंजीर और शहतूत, संतरा, निम्बू, टमाटर, शिमला मिर्च आदि ये सब चीजो का सेवन जयादा करे।
  5. अस्थमा रोगियों को बीटा कैरोटिन से भरपूर भोजन करना चाहिए। गाजर, हरी मिर्च, चेरी, शिमला मिर्च आदि का सेवन करे।
  6. अस्थमा रोगी को अदरक, अनार का जूस और शहद को बराबर मात्रा में मिला कर दिन में 2 से 3 बार लेना चाहिए। इसके आलावा आप 1 चमच अदरक के रस को 1/2 कप पानी में मिलकर रात को सोने से पहले लें। अच्छी अदरक का सेवन भी अस्थमा रोगी के लिए फायदे मंद होता हैं।
  7. अस्थमा में कॉफ़ी पीना भी फायदेमंद होता हैं।
अस्थमा में इन चीजो से करे परहेज
  • अस्थमा रोगी जितना हो सके टेल भोजन से दुरी बना ले। इसमें जयादा नमक से भी परहेज करना चाहिए।
  • अस्थमा में चावल, दही, दूध, छाछ, अमचूर, इमली, शराब, मांस, चिकन, गुड्ड, चना और आइसक्रीम से भी परहेज करें।
  • वसा युक्त आहार जैसे- जंक फ़ूड, डिब्बाबंद भोजन, मिर्च-मसालेदार या बासी भोजन और मख्खन आदि का सेवन भी हानिकारक होता हैं।
  • अंडे और उससे बने उत्पादों का सेवन भी अस्थमा रोगी को नहीं करना चाहिए।

अस्थमा को जड़ से ख़त्म करते है ये 8 घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे 

  1. मेथी के दाने – मेथी बको पानी में उबालकर इसमें शहद और अदरक का रस मिलकर रोजाना पिएं। इससे आपको अस्थमा में रहत मिलेगी।
  2. आंवला पाउडर – एक चमच आंवला पाउडर में एक चम्मच शहद मिलकर सुबह खली पेट सेवन करे। रोजाना इसे सेवन से अस्थमा को कंट्रोल करता हैं।
  3. पलक और गाजर – पलक और गाजर के रस को मिलकर रोजाना सेवान्म्म करने से लाफ मिलता हैं।
  4.  पीपल के पत्तें – पीपल के पत्ते को सुखा कर जला ले। इसके बाद इसे छान इसमें शहद मिलाएं। दिन में 3 बार इसे चाटने से अस्थमा की समस्या में ही दूर हो जाएगी।
  5. बड़ी इलायची – बड़ी इलायची, खजूर, और अंगूर को समान मात्र में पीसकर शहद के साथ खाएं।
  6. सोंठ – सोंठ, सेंधा नामक, जीरा, भुनी हुई हिंग और तुलसी नके पत्ते को पीसकर पानी में उबल ले और इसक,अ सेवन करे।
  7. तेजपत्ता – तेजपत्ता और पीपल के पत्ते को 2 ग्राम मात्र में पीसकर मुरब्बे की चासनी के साथ खाएं।
  8. सुखी अंजीर – सुखी अंजीर के चार दाने रात को पानी में भिगों दे। सुबह खाली पेट इसे पीसकर खाने से लाफ मिलता हैं।

अस्थमा का इलाज है संभव, जानें इसकी सबसे सुरक्षित थेरेपी के बारे में

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के रेस्पिरेटरी मेडिसिन के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. ज्ञानदीप मंगल के मुताबिक, “सभी में अस्थमा के लक्षण एक जैसे नहीं होते हैं। ऐसे में अस्थमा के लक्षणों की पहचान करना जरूरी हो जाता है, उसके बाद ही इसका इलाज शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अस्थमा के उपचार में सबसे सुरक्षित तरीका इन्हेलेशन थेरेपी को माना जाता है। अस्थमा अटैक होने पर मरीज को सांस लेने में बहुत कठिनाई होती है। ऐसी स्थिति में इन्हेलर सीधे रोगी के फेफड़ों में पहुंचकर अपना प्रभाव दिखाना शुरू करता है। जिससे मरीज के फेफड़ों की सिकुड़न कुछ कम होती है और मरीज को राहत महसूस होती है। लेकिन इसके अत्यधिक इस्तेमाल से कई प्रकार के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।”

मेडिकवर फर्टिलिटी में फर्टिलिटी सॉल्यूशंस की क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. श्वेता गुप्ता ने कहा, “अगर गर्भावस्था से पहले अस्थमा से प्रभावित महिलाओं का अस्थमा रोग पर्याप्त ढंग से नियंत्रित नहीं है। तो गर्भावस्था के दौरान उनके द्वारा अस्थमा के खराब लक्षणों का अनुभव करने की संभावना बढ़ जाती है। अपर्याप्त ढंग से नियंत्रित अस्थमा के कारण भ्रूण के लिए नवजात हाइपोक्सीया, अंतर्गर्भाशयी विकास प्रतिबंध, समय से पहले जन्म, कम वजन के साथ पैदा होना, भ्रूण और नवजात की मृत्यु होने जैसे जोखिम पैदा हो सकते हैं।”

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