लेख (Article) क्या है? (What is Article in Hindi) – जानिए हिंदी में।

लेख क्या है? (What is Article in Hindi)

लेख क्या है? (What is Article in Hindi)लेख (Article) साहित्य की एक आधारभूत विधा है। जिसमें हम किसी भी विषय पर विस्तार से लिखते हैं। इसका आरंभ (Start) अंत ( Ending) और मध्य (Middle) होता है। “लेख क्या है?” लेख (Article) को अनुच्छेदों में, विषय को विभाजित किया जाता है और विषय से संबंधित जानकारी को रोचक तरीके से समझाने का प्रयास किया जाता है। “लेख क्या है?” लेख रचनात्मक साहित्य (Creative Literature) और सूचनात्मक साहित्य (Informative Literature) हो सकते हैं। विज्ञान (Science), प्रौद्योगिकी (Technology) और कला (Art) पर लेख (Article) भी लिखे जा सकते हैं। वे सूचनात्मक (Informational) हैं। यानी उनमें विषयों से संबंधित जानकारी होती है। “लेख क्या है?” रचनात्मक साहित्य (Creative Literature) के अंतर्गत अनेक प्रकार के निबंध आते हैं।

लेख क्या है? (What is Article in Hindi)

What is Article in Hindi


जिसमें मौलिकता (Originality), रोचकता (Interesting), सूचना (Information) और रचनात्मक शरीर (Creative Body) सौष्ठव (Swiftness) का मिश्रित प्रभाव होता है। इस तरह के लेख (Article) साहित्य (Literature) की श्रेणी में आते हैं। कभी-कभी किसी अन्य शब्द के साथ लेख शब्द का उपयोग किया जाता है, तो इसका अर्थ भी बदला जाता है। जैसे शीर्ष लेख (Header) या पाद लेख (Footer\Foot Note) है। इन शब्दों का उपयोग टिप्पणियों (Observations), पृष्ठ संख्याओं या अन्य जानकारी नीचे लिखने के लिए किया जाता है। सुलेख (Calligraphy) शब्द का उपयोग हाथ से लिखे गए सुंदर अक्षरों के लिए किया जाता है। इसी प्रकार आलेख (script) शब्द का प्रयोग पत्र या छोटे लेख के लिए होता है और लिखित लेख के लिए एक श्रुतलेख या इमला (Dictation) का उपयोग किया जाता है।


लेख क्या है? (What is Article in Hindi)“, “लेख का अर्थ (Meaning of Article in Hindi)“, “लेख की परिभाषा (Definition of Article in Hindi)“, “लेख के प्रकार (Types of Article in Hindi)“, “लेख का आधार बिंदु“, “लेख लिखने की विधि (Article Writing Method in Hindi)” इस पोस्ट में, मैं आप लोगों को “लेख क्या है? (What is Article in Hindi)” और लेख (Article) से सम्बन्धित सभी सवालों का जवाब देने जा रही हूं।

लेख की परिभाषा (Definition of Article in Hindi)

  • लेख उद्देश्यपूर्ण लक्ष्यों की एक परिपूर्ण लेखन होता है। जिसके माध्यम से लेख किसी भी प्रकार के अनछुएँ या अछूता विषयों, पहलुओं, मुद्दों गम्भीर समस्याओं की ओर पाठकों अथवा श्रोताओं का ध्यान आकृष्ट करता हैं।
  • लेख के माध्यम से लोगो में जागरूकता फैलाया जाता है। उन विषयों के ऊपर लेख लिखा जाता है। जो हमारे युवा वर्ग उन विषयों को जानते तक नहीं है। लेख के ही माध्यम से युवा वर्ग को बताया जाता है की समाज में ऐसे कितने पहलू है जो उनकी समझ और उनकी सोच से भी परे है।
  • लेख शब्द रूपी जिव का वह ज्ञानेन्द्रियाँ है, जिसके माध्यम कोई लेखक तात्कालिक मगर कटु सच्चाई से इस प्रकार पाठकों अथवा श्रोताओं को स्पर्श व अनुभव कराता है कि उनका सोया हुआ मन, मस्तिस्क जागृत व झंकृत हो उठता है।

लेख के प्रकार (Types of Article in Hindi)

लेख किसी भी विषय वस्तु का हो सकता है। इसलिए इसका कोई निश्चित प्रकार नहीं है। तो चलिए लेख के प्रकार (Types of Articles in Hindi) को जानते है।

  • सकारात्मक लेख (Positive Note Article)
  • नकारात्मक लेख (Negative Article)
  • शोधपरक लेख (Research Paper Article)
  • विचारात्मक लेख (Reflective Article)
  • व्यंगात्मक लेख (Satirical Article)
  • प्रसंगात्मक लेख (Relevant Article)
  • चित्रात्मक लेख (Graphic Article)
  • तुलनात्मक लेख (Comparative Article)
  • मनोरंजनात्मक लेख (Recreational Articles)

वास्तव में लेख अनुभूति (feeling) और ज्ञान (Knowledge) का माध्यम है। यह संचार माध्यमों में लेखन का एक प्रकार है। लेख का विकास संचार करने के लिए ही सकारात्मक लेख (Positive Note Article), नकारात्मक लेख (Negative Article), शोधपरक लेख (Research Paper Article), विचारात्मक लेख (Reflective Article), व्यंगात्मक लेख (Satirical Article), प्रसंगात्मक लेख (Relevant Article), चित्रात्मक लेख (Graphic Article), तुलनात्मक लेख (Comparative Article), मनोरंजनात्मक लेख (Recreational Articles) पर विस्तार पूर्वक लेख को लिखा जाता है। ग्रामीण समस्याओं पर भी आप लेख लिख सकते है।


अत: किसी गद्य प्रधान शैली को लेख कहा जाता है। इसमें शोधात्मक और विचारात्मक के साथ विषय का गहरा ज्ञान छुपा रहता है। इसके प्रमुख अंगों में भूमिका, विषय प्रतिपादन, तुलनात्मक चर्चा और निष्कर्ष उल्लेखनीय है। सर्वप्रथम इसमें शीर्षक के अनुकूलन भूमिका को छोटा रखा जाता है। यानि दस पंक्तियों वाली भूमिका पर्याप्त होती है। विषय का प्रतिपादन में, विषय का वर्गीकरण (Subject Classification), आकार (Shape), रूप (Form) और क्षेत्र (Area) आते है। इसके अतिरिक्त सम्बन्धित विषय में तालमेल का क्रम आवश्यक होता है। इसमें विषय-वस्तु का तुलनात्मक (Comparative) अध्ययन करके निष्कर्ष (Conclusion) का प्रतिपादन किया जाता है।


लेख का आधार बिंदु (Article Base Point)

लेख लिखने के पहले लेख का आधार बिंदु पता होना चाहिए। तभी जा कर एक सुन्दर और परिपूर्ण लेख लिखा जा सकता है। अगर आपको लेख का आधार बिंदु नहीं पता है तो आप लेख नहीं लिख सकते है। वह सही तरीका नहीं होगा जो लेख लिखने के लिए एक आधार बिंदु का जरूरत होता है। चाहे आप किसी भी विषय या अन्छुएं पहलुओं पर लेख क्यों न लिख रहे हो। आपको लेख लिखने के पहले आधार बिंदु एक निश्चित करना पड़ता है। तभी जा कर एक पाठक या श्रोता को उस लेख का कड़ी दर कड़ी समझ में आयेगी। आधार बिंदु लेख का एक लोहे की कड़ी जैसी होती है। जो आपस में एक दुसरे को बांधे हुई रहती है। लेख का आधार बिंदु निम्नलिखित है।

1. शीर्षक (Title)

लेख लिखने के पहले एक शीर्षक होना चाहिए। शीर्षक (Title) से ही पाठक को पता चल जाता है की यह किस विषय पर लेख लिखा गया है। शीर्षक ऐसा होना चाहिए की पाठक (Reader) देखते ही उसे पढ़ने के लिए आतुर या उत्सुक (Eager) हो जाये। वह शीर्षक देखते ही बाद में पढ़ने के लिए टाल नहीं सके। शीर्षक हमेशा तड़क-भड़क, दिलचस्प और आकर्षित करने वाली लिखनी चाहिए। शीर्षक को देख कर ही पाठक अनुमान लगा लेता है की यह किस प्रकार का लेख होगा। इसकी कहानी क्या होगी।

2. भूमिका या प्रस्तावना (Introduction)

चाहे आप किसी भी विशेष विषय पर लेख लिखे, गैर-कल्पना-साहित्य पुस्तक, कोई उपन्यास या लघु कथाओं को ही क्यों ना लिख रहे हो। भूमिका लिखना अति-आवश्यक होता है। एक बात गौर करने वाली है की कितनी बार आप भी भूमिका या प्रस्तावना नहीं पढ़ते है। उसे पढ़ना छोड आगे कहानी या लेख पढने की तरफ बढ़ जाते है। परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि लेखक को भूमिका में कोई उटपटांग चीज लिख कर छोड़ देनी चाहिए। एक मनोहर भूमिका आपकी लेख पर चार चाँद लगा देगी, क्योंकि भूमिका के द्वारा आप पाठकों के लिए अपनी लेख में लाना सुगम या आसान कर रहे हैं। इसलिए, अपने लेख पर आकर्षित करने के लिए एक मनोहर भूमिका लिखना जरुरी है।

3. विषय-वास्तु (Subject Object)

विषय-वस्तु में पूरी कहानी होती है। जिस टॉपिक पर आप लेख लिख रहे होते है। उसी लेखा का पूरा विवरण होता है। चाहे आप कोई भी विषय पर साहित्य, पुस्तक, कोई उपन्यास या लघु कथाओं को लिख रहे हो। विषय-वस्तु में उस लेख, साहित्य पुस्तक, कोई उपन्यास या लघु कथाओं का पूरा विवरण यही से शुरू होता है।

4. विवेचना या विचार-विमर्श (Deliberation)

किसी विषय के सभी पहलुओं को तौल कर और तथ्य और वास्तविकता को ध्यान में रखकर विचार करने की प्रक्रिया को विवेचना या विचार-विमर्श कहा जाता है। सत्य और असत्य, तर्क, मीमांसा, अनुसंधान एवं परीक्षण विवेचना के मुख्य अंग हैं।

5. सारांश (Summary)

जब आप लेख को पूरी तरह से लिख लेते हो, तब आपको निष्कर्ष देना अति-आवश्यक होता है। निष्कर्ष में आप जिस विषय पर आपने लेख लिखा है। उस सारे तथ्य को छोटा कर के पाठक को समझाया जाता है। यानि आप अपना लिखा हुआ लेख को एक सारांश (Summary) के रूप में निष्कर्ष लिखते है। यानी की आप अपने कहानी का सारांश देते है।

लेख लिखने की विधि (Article Writing Method in Hindi)

1. विचार या योजना बनाओ (Make Ideas)

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  1. उस लेख के विषय से परिचित हों (Get Acquainted With The Subject of That Article)- जब आप अपने विषय तय कर लिए हों, तभी यह विचार करें कि आप किस प्रकार के लेख लिखने वाले हो। कुछ विषयों के लिए लेख अधिक उचित होते हैं। कुछ सामान्य प्रकार के लेख हैं। जैसे: समाचार लेख (News Article), फ़ीचर लेख (Feature article), संपादकीय लेख (Editorial article) आदि।
  2. अपने विषय पर मंथन करें (Brainstorm Your Topic)- आप मंथन करे की किस विषय पर लेख लिखना चाहते हो। विषय पर मंथन करना जरुरी है। अगर आप विषय को निर्धारित कर लिए हो। तब आपको उस विषय का लेख आसान भाषा में लिखे। ताकि पाठक को समझ में आये। लेकिन लेख का विषय को सीमित करना होगा। अपना लेख को संक्षिप्त में लिखना होगा।
  3. ऐसा विषय चुनें जो संवेदनशील हो (Choose a Topic That is Sensitive)- यह सुनिश्चित कर लें कि जिस विषय पर आप लिखने जा रहे हो। उस विषय पर आप बहुत कुछ लिख सकते हो। लेख लिखने से पहले उस विषय को भावुक हो कर मंथन करे। आपका उत्साह आपके लेखन में झलकेगा और आपके पाठकों को और भी अधिक मोहित करेगा।
  4. पहले रिसर्च करें (Do Research First)- यदि आप अपने विषय के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। तो आपको इस विषय पर तैयारी करने वाला प्रारंभिक शोध शुरू करना होगा। सर्च इंजन पर सर्च करना शुरू करे। सर्च इंजन में विषय से सम्बन्धित एक सवाल को सर्च करे। उस विषय से सम्बन्धित ढेर सारे तथ्य मिलेंगे। जो की लेख लिखने में आपकी मदद करेगी।
  5. एक नया दृष्टिकोण खोजें (Find a New Perspective)- अब आपने अपने विषय को चुन लिया है। अब उस विषय को सीमित तक लिख लिये हो। तो अब सोचें कि आप इस लेख को कैसे विशेष बना सकते हैं। अगर अपने एक ऐसा विषय चुना है। जिस पर बहुत लोगो ने लिखा है। तब आपको इस विषय पर एक गहरी अध्ययन करना होगा। उस विषय को देखने का आपका दृष्टिकोण कुछ खास होना चाहिए।
  6. अपने तर्क को शार्प करें (Sharpen Your Argument)- ज्यादातर लेखों में, लेखक एक तर्क देता है। यह लेख का मुख्य बिंदु है। तब लेखक इस तर्क की सहायता के लिए सबूत खोजता है। एक अच्छा लेख लिखने के लिए, आपको एक अच्छा तर्क भी चाहिए। जब आपने विशिष्ट दृष्टिकोण तय कर लिया हो, तो आप उस तर्क तक पहुंच सकते हैं। जिसे आप अपने लेख में प्रस्तुत या पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

2. अपने विचारों पर शोध करना (Researching Your Thoughts)

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  1. अपने विषय और तर्क के बारे में जानें (Know Your Topic and Logic)- अपने विषय और तर्क के बारे में रिसर्च या शोध करना शुरू करें। आपके द्वारा किए गए प्रारंभिक शोध के द्वारा आगे बढ़ते जाए। मूल मुद्दों को जानें, पक्ष और विपक्ष को जानें। साथ ही विशेषज्ञों (Experts) की राय भी जानें। इनकी राय आपके लेख को और भी अधिक रोमांच (Thriller) और मनोरंजक (Entertainment) बना देगी।
  2. सहायक सबूत इकट्ठा करे (Gather Supporting Evidence)- वो तरीके ढूँढना शुरू करो, जो आपको लेख के तर्क का समर्थन को जुटा सके। आपको अपने लेख के तर्क में पांच ठोस उदाहरण देने चाहिए। जो अपने पूर्ण तर्क का समर्थन कर सकते हैं।
  3. विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करें (Use Trusted Sources)- ऑनलाइन रिसर्च करते समय सावधान रहें। प्रतिष्ठित स्रोतों जैसे दैनिक जागरण (Dainik Jagran), हिंदुस्तान (Hindustan), द हिन्दू टाइम्स (The Hindu Times), टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से तथ्यों को लेना चाहिए। उस विषय के विशेषज्ञों (Experts), सरकारी वेबसाइटों (Government Websites) से ही सामग्री लेनी चाहिए। उन जानकारियों की तलाश करिए। जो आपके लेख स्त्रोतों को सिद्ध करने में मदद करेगी।
  4. अपने रिसर्च या शोध स्रोतों पर नजर रखें (Keep an Eye on Your Research or Research Sources)- अपने “लेख” में लिखे कि आपको जानकारी कहाँ से मिली है। ताकि आप स्त्रोत को सेट कर सकें। विशिष्ट तौर पर, किसी स्त्रोत की ग्रन्थसूची (Bibliography) की जानकारी में लेखक का नाम (Author Name), लेख का शीर्षक (Article Title), प्रकाशन का शीर्षक (Publication Title), वर्ष (Year), पृष्ठ संख्या (Page Number) और प्रकाशक का नाम (Publisher Name) होता है।
  5. तथ्य चोरी से बचें (Avoid Fact Theft)- जब आप दुसरे स्रोतों से जानकारी ले रहे हो। आप किस तरह से सारी जानकारियां और सूचनाएँ कैसे एकत्र करते हैं। इस बारे में सावधान रहिए। यहां दुसरे का तथ्य (fact) या सामग्री (Content) चोरी करने से बचे। किसी भी पाठ को किसी अन्य स्रोत से सीधे कॉपी न करें। इसके बजाय, पाठ को संक्षिप्त व्याख्या (Paraphrase करें, और उद्धरण शामिल करें।

3. विचारों की रूपरेखा तय करे (Outline Ideas)

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  1. लेख की लंबाई निर्धारित करें (Set Article Length)- लेख लिखने से पहले, यह तय करना बहुत जरुरी है की लेख की कितनी लम्बाई होनी चाहिए। यह विचार करना जरुरी है की आप अपने लेख के लिए कंटेंट यानि सामग्री को पर्याप्त रूप से कवर करने के लिए कितना लिखना चाहिए।
  2. अपने पाठकों को ध्यान में रखें (Keep Your Readers in Mind)- अपने पाठको को ध्यान में रख कर ही लेख लिखना शुरू करे। क्योंकि यह आप ध्यान में रखे की आपका लेख कौन पढने वाला है। आपको इस बात का ध्यान बखूबी रखना होगा की आपके पाठक के स्तर, रुचियों और उनकी आपेक्षएं क्या है।
  3. अपने लेख की रूपरेखा बनाये (Outline Your Article)- लेख को लिखने से पहले अपने लेख को एक रूपरेखा में ढाल दे। इससे आपको लिखने में कभी मदद मिलेगी। ऐसा करने से लेख लिखना आसन हो जाता है। इस रूप रेखा से यह तय हो जाता है की कौन सी जानकारी कहाँ जाएगी।

4. अपना लेख लिखना (Write Your Article)

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  1. परिचय लिखे (Write Introduction)- पाठक की रुचि बढ़ाने के लिए एक मोहक परिचय लिखना आवश्यक है। पहले कुछ वाक्यों में ही पाठक पढ़ कर यह मूल्यांकन कर लेता है की आपका लेख पूरा पढ़ने लायक है या नहीं।
  2. अपनी प्रोफ़ाइल का अनुपालन करें (Follow Your Profile)- आपने अपने लेख को एक रूपरेखा के रूप में तैयार किया है, और यह आपको ठोस और प्रासंगिक लेख लिखने में मदद करेगा। रूपरेखा की वजह से आपको यह याद रखने में भी मदद होगी कि चीजों को एक-दूसरे से कैसे जोड़ा जाए।
  3. उचित संदर्भ दें (Give Appropriate Reference)- यह न समझें कि आपके पाठक को आपके विषय में आपसे अधिक जानकारी होगी। जरा सोचो की आपके पाठक को विषय को समझने के लिए कितनी जमीनी स्तर पर उसको जानकारी की आवश्यकता होगी।
  4. विवरण सहित बताएं (Show With Details)- आप जो भी लिख रहे हैं पाठक के सामने उसका स्पष्ट चित्रण करने के लिए अर्थपूर्ण (Expressive) और विवरणात्मक (Descriptive) भाषा का इस्तेमाल करिए। विवरणात्मक क्रिया पद और सटीक विशेषणों का चुनाव ध्यान से करिए।

5. अपने काम को अंतिम रूप दें (Finalize Your Work)

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  1. कार्य संपादित करें (Edit Work)- आप अपना लेख लिख कर दो दिन के लिए छोड दे। जब आपका माइंड फ्रेश हो जाये। तब आप आपने लेख को एक बार एडिट करने के लिए समय जरुर निकले। इससे खुद का लिखा हुआ लेख में बहुत सारी गलतियाँ मिलेगी जिसे आप सुधर सकते है। साथ ही कुछ नए पॉइंट्स जोड़ सकते है।
  2. व्याकरण की गलतियों को ध्यान से खोजें (Find the Grammar Mistakes Carefully)- यदि लेख बहुत अच्छी ही क्यों न लिखा हो, तो भी इसे गंभीरता से लिया जाएगा। यदि इसमें व्याकरण और वर्तनी की गलतियाँ हैं, तो आप इसका सुधार करे। अपने लेख में गलत हुए व्याकरण को सही करके अपने लेखन को मजबूत करें।
  3. अपने लेख को ज़ोर से पढ़ें (Read Your Article Out Loud For Yourself)- जोर-जोर से पढने से व्याकरण या लेखन में अपनी ग़लतियाँ निकाल लेना आम बात है। यह उस प्रतिक्रिया को कम कर देगा। जो अक्सर दूसरों से मिलता है।

व्यावसायिक लेखन क्या है? (What is Business Writing in Hindi)

व्यापार लेखन (Business Writing) में सम्बन्धित व्यावसायिक जीवन (Professional Life) में स्पष्ट और संप्रेषित करने की जरूरत है। सहयोगों (Collaborations), वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) और अन्य संगठनों के प्रतिनिधित्वों के साथ काम करते हुए। व्यापर लेखन (Business Writing) बड़े संगठनों (Organizations) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। व्यापर लेखन का उद्देश्य संक्षिप्त संचार रीडर (Communication Reader) रखना, आपकी कम्पनी की छवि को प्रदान करना हैं। इस पर समाचार लिखने (Write News) के लिए पत्रकार को व्यवसाय की भाषा का प्रयोग करना चाहिए।

लेखन को लिखने के लिए शब्दों का ध्यान रखना चाहिए। व्यवसाय लेखन में हर प्रकार का व्यवसाय की जानकारी होनी आवश्यक है। जहां तक हो सके लेखन को लिखते समय उससे संबंधित वस्तुओं के फोटो या उससे जुडी चित्रों को लगये। इससे आपका लेखन और भी अधिक आकर्षक लगेगा।

प्रोफाइल क्या है? (Profile Kya Hota Hai)

प्रोफाइल एक ऐसी विधा है। जिसमें किसी व्यक्ति की पूरी बायोडेटा होती है। आप किसी भी व्यक्ति के ऊपर प्रोफाइल लिख सकते है। जिसमें सेलेब्रिटी, महान व्यक्ति (महात्मना गाँधी, चंद्रशेखर आजाद) जैसे व्यक्ति पर प्रोफाइल (Profile) लिख सकते है। उस व्यक्ति का नाम, पता और शिक्षा उससे सम्बन्धित तमाम जानकारियों को भी इस प्रोफाइल में लीखते है। उस व्यक्ति की सफलता कि कहानी और उसकी कथानियों को लखते है। यह व्यक्ति विशेष क्यों है? उनकी सफलता में किन-किन लोगो का हाथ है। यह व्यक्ति कैसे अपने मंजिल तक पंहुचा। उस व्यक्ति को अपने मंजिल तक पहुचने में कितना समय लग गया।

उदाहरण के लिए- अगर आप महात्मा गाँधी पर प्रोफाइल लिखते है। तो उनकी शिक्षा का संघर्ष बताएँगे। उन्होंने कहा से स्कूलिंग की है। वो कैसे स्वतंत्रता के लिए प्रेरित हुए। साथ ही पुरे देश को कैसे प्रेरित किये।

  • प्रोफाइल लिखते समय कद-काठी मायने नहीं रखता है।
  • वो व्यक्ति कहाँ जन्म लिया ये भी मायने नहीं रखता है।
  • अपने मंजिल तक पहुचने में वह व्यक्ति कितना संघर्ष किया। यह मायने रखता है।
  • ध्यान देने वाली बात यह है की प्रोफाइल 800 शब्द से जयादा का नहीं होना चाहिए।

इन्हें भी देखे –



निष्कर्ष (Conclusion)

मैं आशा करती हूं की “लेख क्या है? (What is Article in Hindi)“, “लेख लिखने की विधि (Article Writing Method in Hindi)” तथा लेख से सम्बन्धित सारे सवालों का जवाब आवश्य मिल गये होंगे। लेख में सभी आवश्यक चीजों का विवरण होना चाहिए। लेख इतना बड़ा न हो कि छपे रूप में उसे पढ़ना और संभालना ही कठिन काम हो जाये। अगर आपको “लेख क्या है? (What is Article in Hindi)” पर पोस्ट पसंद आया तो आप इसे अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर शेयर आवश्य करे। इस पोस्ट यानि “What is Article in Hindi” में कोई भी उलझन हो तो आप मुझे कमेंट करे। हमारी टीम आपकी पूरी मदद करेगी।

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