संचार क्या है तथा संचार का प्रकार और महत्त्व – जाने हिंदी में।

संचार क्या है? (What is Communication in Hindi)

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क्या आप जानते हैं की संचार क्या है और मनुष्य, पशुओं और पक्षियों के बीच संचार कैसे होता है? अगर आपको Communication के बारे में नहीं पता हैं। तो इस पोस्ट में मै आपको संचार क्या हैं? पूरी जानकारी दे रही हूँ।

तो चलिए जानते हैं  की “संचार क्या है? (What is Communication in Hindi“, “संचार का अर्थ (Meaning of Communication in Hindi)“, “संचार का परिभाषाएं (Definition of Communication in Hindi)“, “संचार के तत्व (Elements of Communication in Hind)“, “संचार के प्रकार (Types of Communication in Hindi)”। मैं आज संचार से जुड़े हर सवाल का जवाब देने जा रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि आपको अपने सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।संचार क्या है? (What is Communication in Hindi)

मानव समाज में ‘संचार‘ की उपयोगिता और उसके महत्त्व का अध्ययन करने के लिए हमें मानव के अतिरिक्त अन्य प्राणियों को भी देखना होगा। क्योकि मानव भी एक प्राणी हैं। हमारा विज्ञान कहता हैंकी मानव और पृथ्वी के अन्य प्राणियों में सिर्फ सोच-विचार की शक्ति या बोलने और अपनी बात को समझाने  की क्षमता में अंतर हैं। पशु-पक्षियों में भी ‘संचार‘ होता हैं। अक्सर देखा जाता हैं की जब भी कभी कोई खतरा दिखाई देता हैं तो कई पक्षी शोर मचाना शुरू कर देते हैं।

कई पक्षी शोर मचाना शुरू कर देते हैं। उदाहरण –

(क) जब सुनामी आती है तब कौए, समुंदरी जानवर, पालतू जानवर ये सब भागने लगते हैं और पक्षियाँ चहकने लगती हैं। ये सब एक-दुसरे को संचार के माध्यम से बताते हैं की घटना तेजी से आ रही है। उन्हें भागना चाहिए।

(ख) अन्य प्राणियों को देखे तो हिरनों, हाथियों, भेडियों और जिराफो में भी परस्पर संचार के अपने-अपने तरीके हैं। ये जानवर हमेशा झुंड बना कर ही चलते है और जब किसी शिकारी या हिंसक पशु का खतरा महसूस करते हैं तो अपने परिवार या झुंड के सभी सदस्यों को सचेत कर देते है।

संचार” मनुष्य और प्राणियों के जीवन का अभिन्न अंग है। सृष्टी के सभी प्राणियों में संचार होता हैं। जिव-जंतु और मानव में संचार करने का अलग तरीका है।

उदाहरण

क.>  एक मधुमाखी नाचने की विभिन ढंगों से अन्य मधुमखियों को भोजन के बारे में या कितनी दूरी पर भोजन है ये जानकारी या सूचित करती है

ख.> चीटियाँ भी समान रूप से अपना काम मधुमखियों जैसा ही करती है

ग.> नेत्रहीन लोग स्पर्श (छू कर) द्वारा ब्रेललिपी को पढ़ लेते है

संचार का अर्थ (Meaning of Communication in Hindi)

संचार शब्द ‘संस्कृत’ के ‘चर्’ धातु से बना हैं। जिसका अर्थ है “चलाना”। “यानि साझेदारी में चलाना”।

इसका व्यापक अर्थ में इसका प्रयोग चलने, दौड़ने जैसी क्रियाओ के लिए होता है। लेकिन आज ‘संचार’ शब्द एक तकनीकी शब्द बन चुका है। यह अंग्रेज़ी के कम्युनिकेशन (Communication) का हिंदी रूपांतर है। यह शब्द वास्तव में लैटिन भाषा की Communication क्रिया  से निकलकर आया हैं।

जिसका आशय है “To take together, confer, discourse and consult on with another ” यह लैटिन भाषा के ‘कम्युनिकेस’ शब्द  भी जुड़ता है। जिसका अर्थ हैं – ‘To take common, to share, to import, to transit’ अर्थात सामान्यीकरण, सामान्य भागीदारीयुक्त्त, सुचना, सम्प्रेषण या साँझा आधार भी कह सकते  है।

संचार का परिभाषाएं (Definition of Communication in Hindi)

  1. विल्बरश्रम के अनुसार– संचार में एक व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह एक साथ अपनी बातो को कहने या समझना।
  2. पीटर लीटर के अनुसार– संचार एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सुचना व्यक्तियों या संगठनो के बीच सम्प्रेषित की जाती हैं।
  3. जे. पाल. लिगंस के अनुसार– संचार एक ऐसी प्रक्रिया है दो या दो से अधिक व्यक्ति विचार तथ्य भावनाओं दोनों की समझ बढे।
  4. सी. एल. लॉयड के अनुसार– संचार ही मानव समाज की संचालन प्रक्रिया को सम्भव करता है।
  5. राबर्ट एंडरसन के अनुसार– बोलना या इशारो के द्वारा अपने विचारों को प्रगट करना संचार कहलाता है।
  6. सी. एल. लॉयड के अनुसार– संचार ही मानव समाज की संचालन प्रक्रिया को सम्भव करता है।
  7. बैरलो के अनुसार– विचारों और संदेशों के आदान-प्रदान को ‘संचार’ कहते है।
  8. ए.बी. शनमुगन के अनुसार– ज्ञान, अनुभव, संवेदना, विचार और यहां तक की अस्तित्व परिवर्तनों की सांझेदारी ही संचार है।
  9. डॉ अर्जुन तिवारी के अनुसार– संचार मनुष्य के स्वभाव का अभिन्न अंग है। वह अपने भावो को शब्द, संगीत, भाव, मुद्रा आदि से ही सम्प्रेषित करता हैं। यह प्रक्रिया संचार कहलाता है।

definition of communication in hindi

संचार का मॉडल (Model of Communication in Hindi)

Model of Communication in Hindi

संचार के प्रकार (Types of Communication in Hindi)

आंतरव्यक्ती या स्वागत संचार (Interactive Communication in Hindi)

इस संचार की स्थिति तब उत्पन्न होती है। जब एक व्यक्ति अकेला अपने अन्दर ही अन्दर सोच रहा होता है। इसे अन्य सभी संचार-स्तरों का आधार कहा जाता है। क्योकिं कुछ भी बात कहने से पहले आप उसे अपने मन में सोचते हैं। इस सोचने को आंतरव्यक्ती  कहा जाता हैं।

अंतरव्यक्ति संचार (Interpersonal Communication in Hindi)

यह संचार आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की स्थिति में होता हैं। इसमें एक संदेश-प्रेषक होता हैं तथा कोई एक व्यक्ति अथवा कुछ लोग सम्मिलित होते हैं।जो संदेश प्राप्त करता होते है। इसके लिए यह आवश्यक है कि आप एक-दुसरे को जानते हो। आपसी बातचीत, गपशप, प्रेमालाप, संक्षिप्त समूह-चर्चा, किसी समिति की बैठक आदि।

मध्य संचार (Media Communication in Hindi)

यह संचार तब होता हैं। जब दो या दो से अधिक लोग अपने संदेश भेजने के लिए कुछ माध्यमों का उपयोग करते हैं। जैसे टेलीफोन, सेल्युलर, मोबाइल फोन, पेजर, क्लोज सर्किट टेलीविजन, मोबाइल, रेडियो, रदर, टेलीटाइप, होम मूवी कैमरा, प्रोजेक्टर तथा संचार सेटेलाइट आदि।

व्यक्ति-से-समूह-संचार (Person-to-group Communication in Hindi)

इस संचार में एक वक्ता होता है और सामने बैठे हुए कुछ श्रोता होते है। जैसे भाषण, टेपरिकोर्डर आदि।

जनसंचार (Mass Communication in Hindi)

जनसंचार में संदेश को प्रेषक व्यापक जन-समुदाय के बीच में होता हैं। यह व्यापक जन-समुदाय ‘पंचमेल खिचड़ी’ होता हैं।

संचार के निम्नलिखित साधन है

  1. स्रोत (Source)–  किसी भी खबर को या किसी भी व्यक्ति के बातों को दुसरे व्यक्ति के पास पहुंचाने की क्रिया होती है। वह स्रोत है। इसे संचार कहते है।
  2. सन्दर्भ (Context) आपकी बातों का क्या सन्दर्भ ( मतलब) होता है। लोग आपकी बातों को समझ पा रहे है या नहीं।
  3. विषय-वस्तु (Content) विषय-वस्तु के आधार पर श्रोताओ का निर्धारण होता है। क्योकिं स्रोतों को जो संदेश देना चाहते है वो उनको समझ में आना चाहिए।
  4. स्पष्टता (Clarity)– संदेश स्पस्ट होनी चाहिए। उसकी सरल भाषा हो। ताकि सुनने वाला को समझ आये।
  5. माध्यम (Channel)– संदेश को प्राप्तकर्ता तक जल्दी पहुंचाने के लिए नयी-नयी माध्यमों का उपयोग करना चाहिए।
  6. स्रोताओं की क्षमता (Capability of Audience) सम्प्रेषण में श्रोताओ की क्षमताओं, जैसे की  भाषा, संस्कृति इत्यादि को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। ये सब ध्यान में नहीं रखा जाये तो संदेश ही गलत हो जायेगा।

संचार का तत्व (Element of Communication in Hindi)

1. सर्पिल प्रक्रिया (Spiraling Process)– यह प्रक्रिया सर्पिल यानि उतार-चढ़ाव वाली है इसकी प्रकृति गत्यात्मक हैं। इसमें केवल संदेश भेजना और प्राप्त करना ही सम्मिलित नहीं हैं। बल्कि संदेश प्राप्त करने वाले की प्रक्रिया भी शामिल रहती हैं। जिसे प्रतिपुष्टि कहा जाता हैं।

2. कार्यव्यापार (Transaction)– संचार का दूसरा महत्वपूर्ण तत्व है। संचार की कार्यवाही में “फीडबैक” अनिवार्य तत्व है।

3. अर्थ (Meaning)– यह संचार का तीसरा महत्त्वपूर्ण तत्व है। लोगो को हर संदेश का अर्थ पता होना चाहिए।

4. प्रतीकात्मक क्रिया (Symbolic Action)– यह संचार का चौथा मत्वपूर्ण तत्व है। जिसे हम एक तरह से संचार-प्रक्रिया का पर्याय कह सकते है।

5. प्रेषण और ग्रहण (Sending & Receiving)– संचार के ये दो मुख्य कार्य है। ये दोनों कार्य मानसिक प्रक्रिया से जुड़े है।

6. संदेश (Message)– यह संदेश का छठा महत्वपूर्ण कार्य है। इसके अंतर्गत  लिखित, मौखिक एवं शब्द आता है।

संचार की अवधारणा (Concept of Communication in Hindi)

  • इशारे– लोग इशारे में भी बात कर के संचार करते हैं।
  • विषयवास्तु– इसी के आधार पर श्रोताओं का निर्धारण होता हैं।
  • स्पष्टता– संदेश सुस्पष्ट होना चाहिए। संदेश की भाषा सरल व योग्य होनी चाहिए।
  • सन्दर्भ– सन्दर्भ संदेश को सुनिशिचित करे, उसमें परस्पर विरोधाभास नहीं दिखाई देना चाहिए। इसमें भागीदारी और दुहराने की समुचित व्यवस्था होती हैं।
  • निरंतरता– सम्प्रेषण समाप्त होने वाली प्रक्रिया है। संदेश को श्रोता तक पहुँचने के लिए उसे लगातार दोहराने पड़ते हैं।
  • माध्यम– केवल उन्ही स्थापित न का ही उपयोंग करना चाहिए। जिन्हें संदेश प्राप्तकर्ता उपयोगी और सार्थक समझता हो।
  • श्रोताओं की क्षमता– सम्प्रेषण में श्रोताओं की क्षमताओं, जैसे की उनकी भाषा, संस्कृति इत्यादि का ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

संचार के कार्य (Functions of Communication in Hindi)

  1. सुचना का प्रसार– ‘सुचना’ और ‘संचार’ परस्पर जुड़े हुए शब्द हैं। बिना ‘सूचना’ के ‘संचार’ की कल्पना नहीं की जा सकती, और बिना ‘संचार’ के सूचना भी अधूरी हैं।
  2. निर्देश– संचार का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य है- निर्देश देना। जिस तरह संचार के द्वारा दूर तक जनसमुदाय के बीच संदेश या सूचना पहुंचाने का कम किया है। उसी तरह निर्देश पहुंचाने  कम भी किया जाता है। उदाहरण के लिए – हम मैखिक  से या पत्र से ये निर्देश दिए जा सकते है और लिखित मुद्रित के माध्यम से भी।
  3. मनोरंजन– संचार माध्यम हमारे मनोरंजन का बहुत बड़ा साधन है। हम घर बैठे फ़िल्में देखने, गीत-संगीत का आनन्द लेने, टेलीविजन सीरियल देखने जैसे बहुत से काम संचार के माध्यम से ही करते है।
  4. विश्वाश-अर्जन– संचार के द्वारा हम अपने मतों, विचारों, अवधारणाओं, भावनाओं को एक-दुसरे से बांटते है। एअक-दुसरे से सुख-दुःख में साझेदारी करते हैं, सहायता करते है। इससे हमारा आपस में सहज बनता हैं।
  5. विचार-विमर्श– विचार-विमर्श संचार का आधारभूत कार्य है। विचार-विमर्श से ही हम एक-दुसरे के निकट आते है। एक-दुसरे के विचारों को समझ पाते है। इसके जरीये ही हम एक-दुसरे को नई सूचनाएं भी दे रहे है।
  6. सांस्कृतिक प्रसार– संस्कृतियों में आदान-प्रदान की प्रक्रिया संचार के माध्यमो से चलती रहती है।
  7. भावनात्मक एकता– संचार के माध्यमों द्वारा समाज में भावनात्मक एकीकरण का महत्त् कार्य भी होता है।

मानव एक सामाजिक प्राणी है। उसके लिए अकेला रहना बहुत कठिन कार्य है।हम समूह या समाज में रहते हैं। हमारी आवश्यकताएं भी असिमित है तो स्वभाविक है की संचार के उद्देश्य भी असीमित है। अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हम संचार का सहारा लेते हैं।

संचार के अवरोधक (Barriers of Communication in Hindi)

मनोवैज्ञानिक

प्रेषक की ओर भेजे गये संदेश के अर्थ-ग्रहण में प्रापक का मनोविज्ञान बहुत काम करता है।

कई बार प्रेषक जो संदेश पहुंचाता है। वह उसी रूप में ग्रहण नहीं कर रहा।

जिससे संदेश का स्वरूप बदल जाता है। क्योंकि बोला कुछ जाता हैं और उस संदेश को अपनी भाषा में कहा कुछ और जाता हैं। जिससे अर्थ का अनर्थ हो जाता है।

यांत्रिक

हमारी वाक् (Speech) इन्द्रियों के अतिरिक्त ऐसे बहुत से यंत्र हैं।

जो प्रभाव पूर्ण ढंग से हमारी बात लोगों तक पहुँचा पाते,आवाज का साफ ना होना यांत्रिक अवरोधक का घटना है।

अर्थ

अर्थ की सामान्य स्वीकृति के बिना प्रेषक और प्रापक के बीच संचार नितान्त असम्भव है।

भौतिक

इसके अंतर्गत प्रेषक और प्रापक के बीच भौतिक दूरी से लेकर समय अन्तराल तक को ले सकते है। दूर खड़ा व्यक्ति पास खड़ा व्यक्ति अपेक्षा कम सुनेगा।

भाषा

हमारे देश में कई प्रकार के भाषा हैं। हर भाषा में अंतर होता हैं। क्षेत्रीय भाषा अलग-अलग है।

संस्कृति

संस्कृति समाज और भाषा का गहन एवं आंतरिक सम्बन्ध होता है। हर समाज की संस्कृति अलग होती है। तो स्वभाविक है आपस में संदेश सम्प्रेष्ण करते समय बढ़ा उत्पन्न होती है।

संचार के माध्यम (Medium of Communication in Hindi)

  1. मुद्रण माध्यम (Print Media)
  2. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (Electronic Medium)

इलेक्ट्रॉनिक माध्यम को दो भागों में बांटा गया।

(क) श्रव्य संचार माध्यम : रेडियो

(ख) दृश्य-श्रव्य संचार माध्यम : टेलीविजन

संचार के सिद्धांत (Principles of Communication in Hindi)

  1. सामाजिक विज्ञानं सिद्धांत
  2. सैद्धांतिक सिद्धांत
  3. व्यावहारिक सिद्धांत
  4. सामान्य सूझ-बूझ सिद्धांत

इन्हें भी देखें –

निष्कर्ष (Conclusion)

हर संचार में एक प्रेषक, एक संदेश और एक प्राप्तकर्ता शामिल होता है। यह सरल लग सकता है, लेकिन संचार वास्तव में एक बहुत ही जटिल विषय है। संदेश को प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक प्रेषित करने से चीजों की एक विशाल श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इनमें हमारी भावनाएं, सांस्कृतिक स्थिति, संचार के लिए उपयोग किए जाने वाले माध्यम और यहां तक कि हमारे स्थान शामिल हैं। संचार हमारे जीवन का आधार है। अगर संचार करने नहीं आयेगा, तो हम मनुष्यों का जरूरत ही पूरा नहीं हो पायेगा और दूसरो का बात ही नहीं समझ पाएंगे। आदिकाल से ही हमारे समाज में संचार होता रहा है। मनुष्य के साथ-साथ जानवरों और पक्षियों में भी संचार होता है।

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Meaning of Communication
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3 Comments

  1. Tanisha kumari सितम्बर 15, 2018
  2. Dhananjay Ray सितम्बर 15, 2018
  3. santosh kumar मार्च 1, 2019
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