NRC क्या है? (NRC Kya Hai in Hindi) – पूरी जानकारी हिंदी में।

NRC क्या है? (NRC Kya Hai in Hindi)

आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे की “NRC क्या है? (NRC Kya Hai in Hindi)” NRC एक प्रक्रिया है। जिसमें देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी लोगों (Foreign People) को खोजने का प्रयास किया जाता है। असम में आजादी के बाद 1951 में पहली बार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (National Register of Citizens) यानि एनआरसी (NRC) बना था।

संसद के गृह मंत्री, अमित शाह (Amit Shah) ने राज्यसभा में कहा कि अवैध लोगों की पहचान के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens) लागू होगा। अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि यह “राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर क्या है?” (National Register of Citizens in Hindi)।

तो चलिए “राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी)” के बारे में विस्तार से बात करते हैं।

एनआरसी क्या है? (What is NRC in Hindi)” गृह मंत्री ने कहा कि NRC में सभी धर्मों और संप्रदाय के लोगों को शामिल किया जाएगा। अभी तक देशवासियों के दिलो दिमाग में NRC का नाम सुनते ही असम (Assam) आता था। लेकिन अगर असम की तरह देश के अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) में ‘NRC‘ लागू हो जाय तो क्या होगा?

NRC क्या है?” असम में रह रहे घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने के लिए 1951 में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन (NRC) बनाया गया था। इसमें संशोधन किए जा रहे हैं। NRC का अंतिम बिल 11 दिसंबर, 2019 को पारित किया गया है। इस लिस्ट में सिर्फ उन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जो 25 मार्च 1971 के पहले से असम में रह रहे हैं। ऐसे में यहां के लोगों में तनाव जैसा माहौल, उन्हें लिस्ट में नाम नहीं होने की आशंका में अपना भविष्य की चिंता सता रही है।

NRC क्या है? (NRC Kya Hai in Hindi)
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) क्या है? – यह भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है जो असम राज्य के नागरिकों की पहचान करने के लिए नाम और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करता है। रजिस्टर शुरू में असम राज्य के लिए विशेष रूप से बनाया गया था।

एनआरसी का फुल फॉर्म क्या है? (NRC Full Form in Hindi)

NRC का फुल फॉर्म “राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens)” होता है। 1971 से 1991 के बीच असम में बड़ी संख्या में मतदाता बढ़े। जिसने असम में अवैध तरीके से लोगों के प्रवेश की तरफ इशारा किया। NRC में करीब 2.89 करोड़ लोगों को भारत का नागरिक माना गया है। वहीं 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिकता NRC नहीं दी गई है। ऐसे में इन लोगों का अस्तित्व खतरे में आ गया है।

असम समझौता (1985) बांग्लादेश की स्वतंत्रता से एक दिन पहले 24 मार्च 1971 की आधी रात को राज्य में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी शरणार्थियों के नाम मतदाता सूची से हटाने और वापस बांग्लादेश भेजने के लिए बनाया गया था। असम की आबादी लगभग 33 मिलियन है। यह एकमात्र राज्य है। जिसने NRC को अपडेट किया है। एनआरसी (NRC) की प्रक्रिया 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई थी।

NRC का इतिहास (History of NRC in Hindi)

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर सबसे पहले वर्ष 1951 में तैयार किया गया था।
  • 1979 में अखिल आसाम छात्र संघ (AASU) द्वारा अवैध आप्रवासियों की पहचान और निर्वासन की मांग करते हुए एक 6 वर्षीय आन्दोलन चलाया गया था।
  • 15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अखिल असम छात्रसंघ का आन्दोलन शान्त हुआ था।
  • असम में बांग्लादेशियों की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए, नागरिक सत्यापन की प्रक्रिया दिसंबर, 2013 में शुरू हुई थी।
  • मई, 2015 में असम राज्य के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
  • 31 दिसंबर, 2017 को असम सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC) मसौदे का पहला संस्करण जारी किया गया।
  • भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने हेतु 3.29 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे।
  • इनमें से 1.9 करोड़ लोगों को वैध भारतीय नागरिक माना गया है।
  • शेष 1.39 करोड़ आवेदनों की विभिन्न स्तरों पर जांच जारी थी।

सबसे पहले असम में ही “NRC” क्यों लागू किया गया है?

1905 ई० में अंग्रेजों ने बांग्लादेश (Bangladesh) का विभाजन किया। तब पूर्वी बंगाल और असम के रूप में एक नया प्रांत बनाया गया था। तब असम को पूर्वी बंगाल से जोड़ा गया था। गोपीनाथ बोर्डोली (Gopinath Bardoloi) की अगुवाई में असम में विद्रोह शुरू हुआ। असम अपनी रक्षा करने में सफल रहा। लेकिन सिलहट पूर्वी पाकिस्तान में चला गया। 1950 ई० में असम भारत देश का राज्य बन गया।

NRC 1951 की जनगणना के बाद तैयार हुआ था और इसमें तब के असम के रहने वाले लोगों को शामिल किया गया था। वास्तव में, अंग्रेजों के समय में बिहार और बंगाल के लोग चाय बागानों में काम करने और खाली पड़ी जमीन पर खेती करने के लिए असम जाते रहते थे। ऐसे में, वहां के स्थानीय लोगों का एक विरोध बाहरी लोगों से रहता था।

50 वें दशक से ही असम में बाहरी लोगो का आना राजनीतिक मुद्दा बनने लगा था। लेकिन आजादी के बाद भी तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और बाद के बांग्लादेश से असम में लोगों के अवैध तरीके से आने का सिलसिला जारी रहा। 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने दमनकारी कार्रवाई शुरू हुई थी।

तब करीब 10 लाख लोगों ने बांग्लादेश सीमा पारकर असम में शरण लिया। हालांकि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि शरणार्थी चाहे किसी भी धर्म के हों उन्हें वापस जाना होगा।

नवंबर 1971 में ही अमेरिकी दौरे के दौरान कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्रों को सम्बोधित करते हुए इंदिरा गांधी ने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान से आए रिफ्यूजियों (Refugees) ने भारत पर गंभीर बोझ डाला दिया है। इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने कहा कि ये रिफ्यूजी भारत की राजनीतिक स्थिरता और आजादी के लिए खतरा बन गए हैं।

1978 में असम के मसले को लेकर एक शक्तिशाली आंदोलन का जन्म हुआ। जिसकी नेतृत्व वहां के युवाओं और छात्रों ने की थी। इसी बीच दो संगठन आंदोलन के नायक के तौर पर उभरे थे। ये “ऑल असम स्टूडेंट यूनियन और ऑल असम गण संग्राम परिषद थे।” अभी ये आंदोलन अपने उफान पर ही था। तब ही अचानक 1978 में ही असम के मांगलोडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद हीरा लाल पटवारी का निधन हो गया। इसके बाद वहां उपचुनाव की घोषणा हो गई।

उस दौरान चुनाव अधिकारी ने देखा की अचानक ही मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। इससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा हो गया। यह माना गया कि बाहरी लोगों, यानि विशेष रूप से बांग्लादेशियों के आने के कारण ही इस क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने इन सारे लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया।

केंद्र सरकार ने 1983 में असम में विधानसभा चुनाव करवाने का फैसला लिया। तब आंदोलन से जुड़े संगठनों ने इसका बहिष्कार किया। हालांकि वहा पर चुनाव हुए, लेकिन जिन क्षेत्रों में असमिया भाषी लोगों का बहुमत था। वहां तीन फीसदी से भी कम वोट पड़े। राज्य में आदिवासी, भाषाई और सांप्रदायिक पहचानों के नाम पर जबरदस्त हिंसा हुई। जिसमें तीन हजार से भी ज्यादा लोग मारे गये।

इस हिंसा में असम के मोरी गांव कस्बे के नेल्ली का जिक्र जरूरी है। आंदोलन के दौरान फरवरी 1983 में हजारों आदिवासियों ने नेल्ली क्षेत्र के बांग्लाभाषी मुसलमानों के दर्जनों गांव को घेर लिया और सात घंटे के अंदर दो हजार से अधिक बंगाली मुसलमानों को मार दिया गया। यह संख्या तीन हजार से अधिक बताई जाती है। हमलावर आदिवासी बंगाली मुसलमानों से नाराज थे। क्योंकि उन्होंने चुनाव के बहिष्कार का नारा दिया था और बंगालियों ने चुनाव में वोट डाला था। यह स्वतंत्र भारत का उस समय का सबसे बड़ा नरसंहार था।

असम का नागरिक कौन है? (Assam ka Nagrik Kaun Hai)

25 मार्च, 1971 से पहले असम में रहने वाले लोग असम के नागरिक माने जाते हैं। इस प्रदेश में रहने वाले लोगों को ‘लिस्ट A’ में दिए गए दस्तावेजों में से एक को जमा करना था। इसके अलावा दूसरी ‘लिस्ट B’ में दिए गए दस्तावेजों को अपने असम के पूर्वजों से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए एक दस्तावेज पेश करना होगा। जिससे यह माना जा सके कि आपके पूर्वज असम के ही थे।

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NRC को कैसे अपडेट किया गया है?

असम के नागरिक अपना नाम चयनित सूची में नाम देखना चाहता है। तो उसे 25 मार्च, 1971 से पहले राज्य में अपना निवास साबित करने के लिए ‘लिस्ट A’ में दिए गए किसी एक दस्ताबेज को NRC फॉर्म के साथ जमा करना होगा।

यदि कोई दावा करता है कि उसके पूर्वज असम के मूल निवासी हैं। इसलिए वह भी असम का निवासी है तो उसे ‘लिस्ट B’ में उल्लिखित किसी भी एक दस्तावेज के साथ एक NRC फॉर्म के साथ जमा करना होगा।

‘लिस्ट A’ में मांगे गए मुख्य दस्तावेज इस प्रकार हैं।

  • 25 मार्च 1971 तक इलेक्टोरल रोल
  • 1951 का NRC
  • किराया और किरायेदारी के रिकॉर्ड
  • नागरिकता प्रमाणपत्र
  • स्थायी निवासी प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट
  • बैंक या एलआईसी दस्तावेज
  • स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र
  • शैक्षिक प्रमाण पत्र और अदालत के आदेश रिकॉर्ड
  • शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र

‘लिस्ट B’ में शामिल मुख्य दस्तावेजों में शामिल हैं।

  • भूमि दस्तावेज
  • बोर्ड या विश्वविद्यालय प्रमाण पत्र
  • बर्थ सर्टिफिकेट
  • बैंक/एलआईसी/पोस्ट ऑफिस रिकॉर्ड
  • राशन कार्ड
  • मतदाता सूची में नाम
  • कानूनी रूप से स्वीकार्य अन्य दस्तावेज
  • विवाहित महिलाओं के लिए एक सर्कल अधिकारी या ग्राम पंचायत सचिव द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र

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फाइनल एनआरसी (NRC) सूची जारी (Final NRC List Released in Hindi)

असम में अंतिम NRC लिस्ट या सूची 31 अगस्त 2019 को जारी की गई थी। 19,06,657 लोगों को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। जबकि 3.11 करोड़ को इस नागरिकता सूची में शामिल किया गया है। इस सूची में कुल 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था। क्या सूची से बहिष्करण (Exclusion) का मतलब विदेशी घोषित किया जाना चाहिए? नहीं, जिन लोगों को लिस्ट से बाहर रखा गया है। वे उन विदेशी न्यायाधिकरणों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

जो 1964 के कानून के तहत अर्ध-न्यायिक संस्था हैं। ये लोग लिस्ट जारी होने के 120 दिनों के भीतर इन न्यायाधिकरणों में अपील कर सकते हैं। यदि किसी को विदेशी न्यायाधिकरण में विदेशी घोषित किया जाता है। तो वह उच्च न्यायालयों का रुख कर सकता है। अगर किसी को अदालतों द्वारा विदेशी घोषित कर दिया जाता है। तो उसे गिरफ्तार कर नजरबंदी किया जा सकता है। जुलाई 2019 तक 1,17,164 व्यक्ति विदेशी घोषित किए जा चुके हैं। जिनमें से 1,145 लोग हिरासत में हैं।

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NRC के बारे में क्या-क्या हल्ला किया जा रहा है और इसका सच्च क्या है। एक नजर देखते है।

आप इसे ध्यानपूर्वक पढिये गा। बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर है। जानकारी के आभाव में बहुत से लोग कुछ का कुछ हल्ला या अफवाह फैलाते रहते है। पहले आप NRC से जुडी अफवाह और सच को अच्छे तरीके से जान ले।

अफवाह- NRC यह मुसलमानों के विरुद्ध है?
सच- यह भारत के मुस्लमानों और हिंदुओं में कोई फर्क नहीं करता।
अफवाह- मुसलमानों को नागरिकता सिद्ध करनी पड़ेगी?
सच- इससे किसी भारतीय मुसलमान या हिंदू से कोई भी दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे।
अफवाह- मुसलमान छोड़कर कोई भी व्यक्ति भारत में बस सकता है?
सच- ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। क्योंकि यह सिर्फ ऐसे 3 देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानस्तान) पर आधारित है। जहां के संविधान में “स्टेट रिलिजियन इस्लाम” है। जब वहां का ‘स्टेट रिलिजियन इस्लाम’ है तो वहा के मुसलमानों को भी छूट देने का मतलब है की उन 3 देशो को भारत में बसा लेना है।
अफवाह- मुस्लमानों को सहूलियत क्यों नहीं है?
सच – क्योंकि, इन तीन देशों का ‘स्टेट रिलिजियन इस्लाम’ है। ऐसा करने से वह पूरा देश भारत देश के नागरिक बन सकते हैं। यह समझने वाली बात है। यह कैसे संभव हो सकता है?
अफवाह- तो हिंदूओं को भी क्यों आने दिए जा रहा हैं?
सच- भारत एक हिन्दू मेजोरिटी (Majority) स्टेट है। जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान विधिवत हिंदू-मुसलमान की बुनियाद पर बने हैं। जबकि, अफगान एक ऐसा देश है जो ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम बुनियाद पर ही बसा है। ऐसे में यह प्राकृतिक और विधिक न्याय की दृष्टि से सही है कि वहां के सिर्फ गैर-हिन्दू भारत में आसानी से रह सकें। क्योंकि मुसलमान वहां आसानी से रह ही रहे हैं।
अफवाह- यूएससीआईआरएफ (USCIRF) ने आवाज उठाई, क्या यह गलत है?
सच- बिलकुल हाँ, यूएससीआईआरएफ (USCIRF) को बोलने का कोई हक नहीं है। क्योंकि अमेरिका में तो खान शब्द सुनते ही वहां का समाज “टेररिस्ट” की दृष्टि से देखने लगता है। इसका शिकार हमारे बॉलीवुड सितारे “सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान” कई बार हो चुके हैं। शाहरुख खान की फिल्म “माय नेम इज खान” तो इसी पर केंद्रित है। तो यह सिवाय आंतिरक मामले में चौधराहट दिखाने की हिम्मत से अधिक कुछ नहीं है। इसी (USCIRF) संस्था ने चीन में भी बोला था। चीन और भारत इस पर एक हो सकते हैं।
अफवाह- भारत का मुसलमान डर रहा है?
सच-  मुसलमान क्यों डर रहा है? क्या यहां (भारत) के मुसलमान पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगान का निवासी है? जो डर रहे है। जब वह भारत का निवासी है। तो उससे कौन पूछने जा रहा है की वह अपनी नागरिकता को प्रूफ करे। उसकी मजहबी हक पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वह अपनी समझदारी दिखाए। राजनीतिक बातों और हल्लाबाजों के बहकावे में आने की बजाए अपना दिमाग लगाए। वह 80 साल से भारत का हिस्सा है। जिसे खुद गांधीजी ने स्वतंत्रता पूर्वक रहने देने के लिए अनशन करके बसाया है। अगर वह अब भी भयभीत है। तो इसमें कुछ कहा नहीं जा सकता है।
अफवाह- पहले भारत ने रोहिंग्याओं के विरुद्ध कड़ाई बरती अब मुसलमानों के विरुद्ध है?
सच- रोहिंग्याओं के साथ भारत ने कड़ाई बरती है। इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन यह सरासर कहना गलत है की भारत मुसलमानों के विरुद्ध कड़ाई बरत रहा है। क्योंकि भारत के मुसलमानों पर कोई खतरा नहीं है। सरकार को उनसे कोई शिकायत नहीं है। न आगे ऐसा कुछ हो सकता है। क्योंकि आधारकार्ड सबके पास है।
रही बात रोहिंग्या मुसलमानों का तो वह भी भारत में बस सकते हैं। बशर्ते वे नागरिकता की तय शर्तें और समयावधि व आचरण का अनुपालन करें।
अफवाह- इससे हिंदू-मुसलमान के बीच दरार बढ़ेगी?
सच- मैं यहाँ पर बढ़ेगी के स्थान पर बढ़ाई जाएगी कह सकतती हूं। क्योंकि यह एक वोट बैंक के तहत मुसलमानों को बरगलाया जाएगा। लेकिन यह मुसलमानों के ऊपर  निर्भर करता है कि वह कितनी समझदारी दिखाते हैं।
अफवाह- भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की तैयारी हो रही है?
सच- भारत संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। इसे हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए ऐसे नागरिकता कानूनों की बजाए 2 तिहाई राज्यों की विधानसभा से पारित संविधान की मूल आत्मा “हम भारत के लोग” में बदलाव के साथ ही देश के दोनों सदनों से भारीमत के साथ पारित संशोधन विधेयक की जरूरत है। यह फिलहाल संभव नहीं है।
अफवाह- भारत देश मुसलमानों का भरोसा खो देगा?
सच- बिल्कुल नहीं खोएगा, क्यों खोएगा, क्या वे स्वयं भारत नहीं है? अगर वे स्वयं को भारत मानते है, तो फिर कौन किसका भरोसा खोएगा! यह समझना मुश्किल है।
वे मेहमान नहीं, मालिक हैं। फिर यहां पर भरोसे की बात क्यों की जाए।
अफवाह- हम तो मोदी के विरोधी हैं, भाजपा सांप्रदायिक दल है?
सच- भारत का संविधान संप्रदाय के आधार पर किसी को भी ना ही दल बनाने की इजाजत देता है ना ही इस आधार पर चुनाव लड़ने की इजाजत देता है। अगर हम संविधान को मानते हैं तो यह सच नहीं है। मोदी विरोधी हैं, इसीलिए बिल का विरोध है यह सच है। सिवाय इसके इस बिल को विरोधियों के पास कोई विधिक, तार्किक अथवा मानने योग्य साधन, संसाधन या बातें नहीं है।
अफवाह- यह तो संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है।
सच- संविधान का अनुच्छेद-14 भारत के नागिरकों में धर्म, जाति, रंग, क्षेत्र इत्यादि के आधार पर भेद नहीं करता है। यानी यह भारत के नागरिकों पर लागू होता है। जबकि सीएबी-2019 या नागरिकता कानून-1955 (पुराना) दोनों में ही नागरिक तो वे बाद में कहलाएंगे। तब भेद कहां हुआ? नागरिक बनने के बाद अगर धर्म के आधार पर भेद होता तो इस अनुच्छेद का उल्लंघन कहलाता। भारत का संविधान पाकिस्तान, अफगान या बांग्लादेश में लागू नहीं होता।


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निष्कर्ष (Conclusion)

इस पोस्ट में हमने NRC के उद्देश्यों, असम की नागरिकता को साबित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और दस्तावेजों का वर्णन किया है। असम भारत का पहला राज्य है। किस नागरिक का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) है? नागरिकता के लिए प्रस्तुत दो करोड़ से अधिक दावों की जांच पूरी होने के बाद, अदालत ने NRC का फैसला किया।

NRC का पहला मसौदा 31 दिसंबर 2014 तक प्रकाशित करने का आदेश दिया गया था। 31 दिसंबर 2017 को बहु-प्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का पहला ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया। कानूनी तौर पर भारत के नागरिक के रूप में पहचान प्राप्त करने हेतु असम में लगभग 3.29 करोड आवेदन प्रस्तुत किये गए थे। जिनमें से कुल 1.9 करोड़ लोगों के नाम को ही इसमें शामिल किया गया है।

मुझे उम्मीद है की “NRC क्या है? (NRC Kya Hai in Hindi)” पर यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा। अगर आपको “राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर” (NRC) पर पोस्ट अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करे। अगर आपको “NRC क्या है? (NRC Kya Hai in Hindi)” को समझने में कोई भी समस्या हो रही है तो आप अपने सवालों को कमेंट करें। हमारी टीम आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देगी।

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