हनुमान चालीसा हिंदी में (Hanuman Chalisa in Hindi) – जानिए हिंदी में।

हनुमान चालीसा हिंदी में (Hanuman Chalisa in Hindi)

हनुमान चालीसा हिंदी में (Hanuman Chalisa in Hindi)” भक्त द्वारा अपने भगवान को प्रसन्न करने और अपनी समस्याओं के हल के लिए सरल भाषा में की गई प्रार्थना को चालीसा कहा जाता है। क्योंकि इसमें चालीस रेखाएँ होती हैं। सरल भाषा में लिखे जाने के कारण, इसे आसानी से पढ़ा जा सकता है। इसलिए यह जनता में बहुत लोकप्रिय हो गया। इसके पाठ के लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कुछ छोटी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। चालीसा में अलग-अलग पंक्तियों का अलग-अलग महत्व है। पूजा पाठ में हनुमान चालीसा हिंदी में का बहुत महत्व है।

हनुमान चालीसा हिंदी में (Hanuman Chalisa in Hindi)

“हनुमान चालीसा हिंदी में” हनुमान चालीसा के द्वारा कठिन कार्य को आसान बनाया जा सकता है। हनुमान चालीसा की 40 पंक्तियां हमारे किसी भी कार्य को सिद्ध कर सकती हैं।

हनुमान चालीसा हिंदी में के सरल शब्दों से, राम भक्त हनुमान जी को बहुत जल्दी प्रसन्न कर सकते हैं। “हनुमान चालीसा हिंदी में” हनुमान चालीसा के द्वारा कठिन कार्य को आसान बनाया जा सकता है। हनुमान चालीसा की 40 पंक्तियां हमारे किसी भी कार्य को सिद्ध कर सकती हैं। हनुमान जी को कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा है। इसलिए हनुमान चालीसा का पालन करने से व्यक्ति हनुमान जी का आशीर्वाद आसानी से प्राप्त कर सकता है। इसलिए पूजा पाठ में हनुमान चालीसा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। माता सीता ने “हनुमान चालीसा” (Hanuman Chalisa) को सिद्ध किया था।

दोस्तों, आज हम जानेंगे की “हनुमान चालीसा हिंदी में (Hanuman Chalisa in Hindi)“, “हनुमान जी कौन है? (Hanuman Ji Kaun Hai)“, “हनुमान जी का जन्म कब हुआ था? (Hanuman Ji ka Janam Kab Hua)“, “हनुमान चालीसा क्या होता है? (Hanuman Chalisa Kya Hota Hai)“, “हनुमान चालीसा का क्या अर्थ है? (Hanuman Chalisa ka Arth Hindi Me)“, “हनुमान चालीसा के रचयिता कौन है? (Hanuman Chalisa ke Rachayita Kaun Hai)“, “हनुमान चालीसा कब लिखा गया? (Hanuman Chalisa Kab Likha Gaya)“, “हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)“, “हनुमान चालीसा का पाठ करते समय ध्यान रखें ये बातें“आदि के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे।

हनुमान जी कौन है? (Hanuman Ji Kaun Hai)

हनुमान जी को कलयुग में अजर-अमर बताया गया है। भारतीय “महाकाव्य रामायण” में भगवान राम भक्त हनुमान को सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक है। राम भक्त हनुमान भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते है। भगवान शिव के 11 रुद्रावतार मेंहनुमान जी” के अवतार को सबसे शक्तिशाली और बुद्धिमान माना जाता है। महाकाव्य रामायण के अनुसार, राम भक्त हनुमान, माता ‘जानकी या सीता‘ के अत्यधिक प्रिय हैं।

इस धरती पर, सात मनुष्यों को अमरता का वरदान प्राप्त है। जिनमें हनुमान जी भी शामिल है। बजरंगबली का अवतार भगवान राम की सहायता के लिये हुआ। हनुमान जी की वीरता के अनगिनत किस्से हैं। जिस तरह उन्होंने भगवन राम के साथ सुग्रीव की दोस्ती कराई और फिर वानर सेना की मदद से राक्षसों को मार डाला। वह बहुत प्रसिद्ध है।

हनुमान जी का जन्म कब हुआ था? (Hanuman Ji ka Janam Kab Hua)

ज्योतिषियों की सटीक गणना के अनुसार, हनुमान जी का जन्म 58 हजार 112 साल पहले हुआ था। लोकमान्यता (Popularity) के अनुसार, त्रेतायुग के अंतिम चरण में, चैत्र पूर्णिमा के दिन, मंगलवार को चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न, 6.03 बजे सुबह में हुआ था। भारत के वर्तमान राज्य झारखंड के गुमला जिले के आंजन नाम के छोटे से पहाड़ी गाँव के एक गुफा में हुआ था। इन्हें बजरंगबली के रूप में जाना जाता है।

क्योंकि इनका शरीर एक वज्र की तरह है। इनके माता का नाम “अंजना” और पिता का नाम “पवन” है। वायु अथवा पवन हवा के देवता है। इसलिए हनुमान जी को “पवन पुत्र हनुमान” कहा जाता है। हनुमान जी को अनेको नामो से बुलाया जाता है। जैसे “मारुती नंदन“, “पवन पुत्र हनुमान“, “राम भक्त हनुमान“, “अंजनी पुत्र हनुमान“, “बजरंग बली“, “केसरीनन्दन“, “मारुति“, “संकटमोचन“, “महावीर“, “कपीश“, “शंकर सुवन” आदि।

हनुमान चालीसा का क्या अर्थ है? (Hanuman Chalisa ka Arth Hindi Me)

हनुमान चालीसा का अर्थ इस प्रकार है।-

श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है। हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नहीं है। हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालों के साथी, सहायक है। आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं। आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर जनेऊ की शोभा है। शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।

आप प्रकाण्ड (Rebound) विद्वान्, गुणवान है। आप अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम के कार्य करने के लिए आतुर रहते है। आप श्री राम चरित मानस सुनने में आनन्द लेते है। श्री राम, सीता और लक्ष्मण आपके हृदय में बसे रहते है। आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया। आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्देश्यों को सफल कराया। आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया। जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो। श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है। श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि, ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी , शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है। यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।

आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने। आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है। जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजार युग लगे। हजार युग योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया। आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुंह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।

Shri Hanuman Chalisa in Hindi

 

संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है। श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले है। जिसमें आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता अर्थात् आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है। जो भी आपकी शरण में आते है। उस सभी को आनन्द प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता। आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता। आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते है।

जहां महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है। वहां भूत, पिशाच पास भी नहीं फटक सकते। वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है। हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है। उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है। तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है। उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया। जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है। जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती। चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है। जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।

आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है। जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते। आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है। जिससे आपके पास असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम का औषधि है। आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते है और जन्म जन्मांतर के दुख दूर होते है। अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे। हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।

हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है। उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है। हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए। जो कोई इस हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानन्द मिलेगा। भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी। हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।

हनुमान चालीसा के रचयिता कौन है? (Hanuman Chalisa ke Rachayita Kaun Hai)

गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के महान कवि थे। इनका जन्म वर्तमान के कासगंज उत्तर प्रदेश के सोरों शूकर क्षेत्र में हुआ था। इन्हें आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। राम चरित मानस लोक ग्रन्थ है और इसे उत्तर भारत में बड़े भक्ति-भाव से पढ़ा जाता है। इसके बाद विनय पत्रिका उनका एक अन्य महत्त्वपूर्ण काव्य है।

महाकाव्य श्री रामचरित मानस को विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में 46वाँ स्थान दिया गया। हनुमान चालीसा तुलसीदास की अवधी में लिखी एक काव्यात्मक कृति है। जिसमें प्रभु राम के महान भक्त हनुमान के गुणों एवं कार्यों का चालीस चौपाइयों में वर्णन है। यह अत्यन्त लघु रचना है। जिसमें पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति की गई है।

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)

दोहा

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुण-सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनिपुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै।
शंकर-सुवन केसरी-नंदन। तेज प्रताप महा जग-बंदन॥

विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥

यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेस्वर भये सब जग जाना।
जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्ब सुख करई।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरु देव की नाईं।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥

॥दोहा॥

पवन-तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।

हनुमान जी की आरती हिंदी में (Hanuman Ji ki Aarti in Hindi)

मंगल मूरती मारुत नंदन
सकल अमंगल मूल निकंदन
पवनतनय संतन हितकारी
हृदय बिराजत अवध बिहारी

मातु पिता गुरू गणपति सारद
शिव समेट शंभू शुक नारद
चरन कमल बिन्धौ सब काहु
देहु रामपद नेहु निबाहु

जै जै जै हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरु देव की नाईं
बंधन राम लखन वैदेही
यह तुलसी के परम सनेही

॥सियावर रामचंद्र जी की जय, पवन पुत्र हनुमान जी की जय॥


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निष्कर्ष (Conclusion)

हनुमान चालीसा हिंदी में (Hanuman Chalisa in Hindi)” महाबली हनुमान जी कलयुग में एकमात्र ऐसे देवता हैं। जो अपने सभी भक्तों की इच्छाओं को पूरा करते हैं। जो महाबली हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा करते हैं। उनके ऊपर महाबली हनुमान जी की कृपा हमेशा बनी रहती है और उसके जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर होती हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर महाबली हनुमान जी किसी व्यक्ति के ऊपर प्रसन्न हो जाए तो उसके जीवन से सभी बुरी शक्तियों का नाश होता है

और वह अपना जीवन हंसी खुशी व्यतीत करता है। इसीलिए महाबली हनुमान जी की कृपा पाने के लिए सभी लोग इनकी पूजा-अर्चना करते हैं। हिंदू धर्म के लोग हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करते हैं। ऐसा माना जाता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से इंसान की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसके जीवन में कभी भी धन की समस्या नहीं रहती है। ये रोग का नाश करते है।

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