Entrepreneurship क्या है? (Entrepreneurship in Hindi) – पूरी जानकारी हिंदी में।

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Entrepreneurship क्या है? (What is Entrepreneurship in Hindi)

हम इस पोस्ट में “Entrepreneurship क्या है? (What is Entrepreneurship in Hindi)” या “उधमिता क्या है? (Udyamita Kya Hai Hindi Mai)” पर चर्चा करेंगे।

आज के समय में ज्यादातर लोग चाहते है की उनका अपना बिज़नेस हो। अधिकतर लोग चाहते है की वह व्यापार (Business) करे।

“Entrepreneurship क्या है?” हर रोज कई नये व्यक्ति व्यवसायी (Entrepreneur) बनने का सपना संजोता है। उसमें से सिर्फ कुछ लोग ही एक सफल उद्यमी (Successful Entrepreneur) बन पाते है।

बाकी के लोग असफल हो जाते है। एक कामयाब Entrepreneur बनने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी पडती है। ये तो बात Entrepreneur बनने के लिए है।

लेकिन “Entrepreneurship क्या है? (Entrepreneurship Kya Hai in Hindi)”, ” उधमिता क्या होता है? (Udyamita Kya Hai in Hindi)” जानना बेहद जरुरी है।

Entrepreneurship क्या है? (Entrepreneurship in Hindi)
“Entrepreneurship या उद्यमिता क्या है? (Entrepreneurship in Hindi)”। किसी वर्तमान या भावी अवसर का पूर्व दर्शन करके मुख्यतः कोई व्यावसायिक संगठन प्रारम्भ करना उद्यमिता का मुख्य पहलू है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे की “Entrepreneurship क्या है? (Entrepreneurship in Hindi)”, “उधमिता क्या है? (What is Entrepreneurship in Hindi)”, “उधमिता की परिभाषा (Definition of Entrepreneurship in Hindi)” आदि।

Entrepreneurship क्या है?” उधमिता (Entrepreneurship) साधारण तौर पर अनेक जोखिम और अनिश्चिताओ के साथ नए उद्योग को आरंभ करने और उसका संचालन कर उसे नई-नई उपलब्धियों तक पहुंचाना उधमिता कहलाती है।

“Entrepreneurship क्या है?” (Entrepreneurship in Hindi) उधमिता (Entrepreneurship) सदैव नवीन आइडिया (Idea) के साथ उत्पन्न होती है।

उधमिता एक अनुभव मात्र है जो विज्ञान (Science) और व्यवहार (Behavior) दोनों के सहयोग से बनती है। ‘Entrepreneurship क्या है?’ उद्यमिता (Entrepreneurship) व्यापार का ही एक रूप है।

“Entrepreneurship क्या है?” जिसमें अनेक जोखिम होते हैं और उन्हीं जोखिम को लेने वालों को उधमी (Entrepreneur) कहा जाता है।

“Entrepreneurship क्या है?” (Entrepreneurship in Hindi) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था (Economy) उस देश में रहने वाले उद्यमी (Entrepreneur) व्यक्तियों पर ही निर्भर करती है।

“Entrepreneurship क्या है?” उधमिता ही वह साधन है। जिसके द्वारा भारत दोबारा से सोने की चिड़िया बन सकता है। अमेरिका (America), जापान, (Japan) और चाइना (China) जैसे देशों की प्रगति का कारण उधमिता (Entrepreneurship) ही है।

उधमिता का अर्थ क्या है? (Entrepreneurship Meaning in Hindi)

“उधमिता का अर्थ क्या है? (Entrepreneurship Meaning in Hindi)” एक नए व्यवसाय को शुरू करने और संचालित करने में पर्याप्त जोखिम और कड़े प्रयास शामिल हैं। यह जडता के विरुद्ध कुछ नया करने का प्रयत्न होता है।

“Entrepreneurship क्या है?” यह जोखिम हटाने की क्षमता, संसाधनों को उत्पादक कार्यों में लगाने के प्रयास, नए विचारों का कार्य रूप देने की ललक एवं भावी चुनौतियों को लाभ उठाने के अवसर प्राप्त करना उद्यमशीलता के गुणों पर निर्भर करता है।

Entrepreneurship के कारण ही हर रोज एक नया रोजगार अवसरों का सृजन होता है। उधमिता (Entrepreneurship) शब्द अन्य आर्थिक शब्दों की ही तरह काफी बहस व विचारों का केन्द्र बना हुआ है।

उधमिता की परिभाषा (Definition of Entrepreneurship in Hindi)

  • फ्रेंकलिन लिंडसे के अनुसार – उधमिता समाज की भावी आवश्यकताओं का पूर्वानुमान करने एवं संसाधनों के नवीन, सृजनात्मक तथा कल्पनाशील (Imaginative) संयोजनों के द्वारा इन आवश्यकताओं को सफलता पूर्वक पूरा करने का कार्य है।
  • जोसेफ शुम्पीटर के अनुसार – उधमिता एक नव-परिवर्तनकारी कार्य है। यह स्वामित्व की अपेक्षा एक नेतृत्व कार्य है।
  • एच.डब्ल्यू. जॉनसन के अनुसार -उधमिता तीन आधार भूत तत्वों का जोड़ है। अन्वेषण, नव-परिवर्तनकारी तथा अनुकूलन।
  • जे. इ. स्टेपनेक के अनुसार – उधमिता किसी उपक्रम में जोखिम उठाने की क्षमता, संगठन की योग्यता एवं विविधीकरण करने तथा नव-प्रवर्तनों को जन्म देने की इच्छा है।

उधमिता के प्रकार (Types of Entrepreneurship in Hindi)

उधमिता के प्रकार (Types of Entrepreneurship in Hindi)
उधमिता के प्रकार (Types of Entrepreneurship in Hindi)

उद्यमिता के चार प्रकार हैं। इसे निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है।

लघु व्यवसाय उद्यमिता (Small Business Entrepreneurship in Hindi)

यह व्यापार या व्यवसाय छोटा होता है लेकिन अपने क्षेत्र में एक व्यापक रूप में फैला रहता है।

आप उदाहरण के साथ समझे – जैसे किराने की दुकान (Grocery Store), ट्रैवल एजेंट (Travel Agent), सलाहकार (Advisor), बढ़ई (Carpenter), प्लंबर (Plumber), इलेक्ट्रीशियन (Electrician) आदि हैं।

ये सब अपना खुद का व्यवसाय चलते है। ये लोग अपने ही परिवार के सदस्यों को या अपने दोस्तों को ही या स्थानीय लोगो को कर्मचारी के लिए नियुक्त करते है।

अगर इन लोगो को ऋण (Loan) की जरूरत होती है तो वह अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से कर्ज ले लेते है।

साथ ही अपने व्यवसाय को उस क्षेत्र में व्यापक रूप में फैला लेते है।

स्केलेबल स्टार्टअप उद्यमिता (Scalable Startup Entrepreneurship in Hindi)

यह स्टार्ट-अप उद्यमी यह जानकर एक व्यवसाय शुरू करता है कि उनकी दृष्टि दुनिया को बदल सकती है।

वे उन निवेशकों को आकर्षित करते हैं जो बाहर सोचने वाले लोगों को सोचते हैं और प्रोत्साहित करते हैं।

अनुसंधान एक मापनीय व्यवसाय और प्रयोगात्मक मॉडल पर केंद्रित है। इसलिए सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को काम पर रखें।

उन्हें अपने प्रोजेक्ट या व्यवसाय को ईंधन देने और वापस करने के लिए अधिक उद्यम पूंजी की आवश्यकता होती है।

बड़ी कंपनी उद्यमिता (Large Company Entrepreneurship in Hindi)

इन विशाल कंपनियों ने जीवनचक्र को परिभाषित किया है। इनमें से अधिकांश कंपनियां अपने मुख्य उत्पादों के इर्द-गिर्द घूमने वाले नए और नए उत्पादों की पेशकश कर विकसित होती हैं।

प्रौद्योगिकी में बदलाव, ग्राहक प्राथमिकताएं, नई प्रतियोगिता आदि, बड़ी कंपनियों के लिए एक अभिनव उत्पाद बनाने और नए बाजार में ग्राहकों के नए सेट को बेचने के लिए दबाव बनाते हैं।

तेजी से तकनीकी परिवर्तनों का सामना करने के लिए, मौजूदा संगठन या तो नवाचार उद्यम खरीदते हैं या आंतरिक रूप से उत्पाद के निर्माण का प्रयास करते हैं।

सामाजिक उद्यमिता (Social Entrepreneurship in Hindi)

इस प्रकार की उद्यमिता ऐसे उत्पाद और सेवाओं का निर्माण करने पर केंद्रित है जो सामाजिक आवश्यकताओं और समस्याओं का समाधान करती हैं।

उनका एकमात्र मकसद और लक्ष्य समाज के लिए काम करना है न कि कोई मुनाफा कमाना।

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उधमिता की विशेषताएं (Characteristics of Entrepreneurship in Hindi)

उधमिता की विशेषताएं (Characteristics of Entrepreneurship in Hindi)
उधमिता की विशेषताएं (Characteristics of Entrepreneurship in Hindi)

उधमिता की विशेषताएँ निम्नानुसार हैं।

  • जोखिम उठाने की क्षमता
  • निरंतर प्रक्रिया करते रहना
  • उधमिता एक आचरण
  • उधमिता में कुछ नया करना
  • सभी कायों में निपुण
  • उधमिता अर्जित कार्य
  • संसाधनों का संयोजन तथा उपयोग
  • पेशेवर प्रक्रिया
  • रचनात्मक प्रक्रिया
  • परिणाम जनित व्यवहार
  • प्रबंध उधमिता का माध्यम

जोखिम उठाने की क्षमता (Risk Appetite)

हर व्यवसाय में जोखिम उठाने की क्षमता होनी चाहिए। व्यवसाय में आर्थिक संसाधनों का संयोजन कर उत्पादन कार्य किया जाता है।

पर इसमें अनिश्चितताएँ होती हैं एवं वही अनिश्चितताएँ जोखिम को जन्म देती हैं। जोखिम से प्रभावी ढंग से नहीं निपटने पर व्यवसाय समाप्त भी हो सकता है।

उधमिता में जोखिम वहन करने की क्षमता होनी चाहिए।

निरंतर प्रक्रिया करते रहना (Process Continuously)

उधमिता अपने आप में एक निरंतर प्रक्रिया है। निरंतर प्रक्रिया उधमिता को व्यवसाय को विकास की तरफ अग्रसर करने जैसे लंबी अवधि के लक्ष्य पाना एवं दिन-प्रतिदिन के निर्णय लेने की शक्ति देती है।

उधमिता एक आचरण है (Entrepreneurship Behavior)

उधमिता एक व्यक्तिगत गुण नहीं है। वह आचरण का परिणाम होती है। व्यवसाय के हर क्षेत्रो में अपनी निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।

पर निर्णय लेने में जोखिम निहित होती है। जिसके अनुभव से ही व्यवसाय को चलाया जाता है।

एक निरंतर प्रक्रिया होने के कारण उधमिता आचरण का हिस्सा बन जाती है।

नव-प्रवर्तन की योग्यता (Innovation Ability)

नव-प्रवर्तन अर्थात कुछ नया करना। नव-प्रवर्तन को वास्तविक स्वरूप उधमिता के जरिये ही दिया जा सकता है।

सभी कायों में आवश्यक (Essential in all Tasks)

जीवन के सभी क्षेत्रों में उधमिता की जरूरत होती है। प्रत्येक क्षेत्र में जोखिम उठाने, नव-प्रवर्तन करने, प्रबंध करने की आवश्यकता होती है।

न सिर्फ व्यवसाय बल्कि राजनीति, प्रशासन, खेलकूद, चिकित्सा, सेना, शिक्षा आदि सभी क्षेत्रों में साहसी निर्णय लिये जाते हैं।

उद्यमशील व्यवहार के व्यक्ति इन क्षेत्रों में भी सफलता प्राप्त करते हैं।

उधमिता अर्जित कार्य है (Enterprise is Earned Work)

उधमिता स्वाभाविक रूप से संगठन में मौजूद नहीं है। लेकिन प्रयास से अर्जित किया जाता है। हर एक व्यावसायिक संगठन में उधमिता नहीं होती है।

लेकिन उधमिता को साहसिक फैसलों के लिए अभ्यास करना पड़ता है। इसके लिए उद्यमी को निरंतर प्रयास करने होंगे।

संसाधनों का संयोजन तथा उपयोग (Composition and Utilization of Resources)

उधमिता का उपयोग कुशलता से यहां-वहां बिखरे संसाधनों को मिलाकर किया जाता है।

वर्तमान के समय में, उत्पादन के विभिन्न साधन जैसे भूमि, श्रम, पूंजी, संगठन आदि विभिन्न व्यक्तियों द्वारा आयोजित किए जाते हैं।

उद्यमी इन संसाधनों को इकट्ठा करता है और उन्हें उत्पादन प्रक्रिया शुरू करने के लिए जोड़ता है।

पेशेवर प्रक्रिया (Professional Process)

वर्तमान के समय में, उधमिता एक पेशे के रूप में विकसित हो रही है।

चिकित्सा, कानून, इंजीनियरिंग, प्रबंधन आदि के क्षेत्रों की तरह, शिक्षण, प्रशिक्षण द्वारा उद्यमिता की क्षमता विकसित की जा रही है।

सरकार और कई अन्य संस्थाएं व्यक्तियों को व्यवसाय शुरू करने और विकास की योजनाओं के माध्यम से अपना व्यवसाय सुचारू रूप से चलाने में मदद कर रही हैं।

रचनात्मक प्रक्रिया (Creative Process)

उधमिता नवाचार का परिणाम है और नवाचार की प्रेरणा रचनात्मक विचारों और कार्यों से आती है।

परिणाम जनित व्यवहार (Resultant Behavior)

किसी भी उद्यमी को अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पडती है।

इसलिए उधमिता हमेशा परिणामों को महत्व देती है न कि भाग्य को।

उद्यमी अपने प्रयासों और कड़ी मेहनत के माध्यम से परिणाम प्राप्त करने में विश्वास करते हैं।

वे अपने मजबूत फैसलों, ठोस योजनाओं और लक्ष्य-संचालित व्यवहार के माध्यम से उपलब्धियों को प्राप्त करने में विश्वास करते हैं।

प्रबंध उधमिता का माध्यम है (Management is the Medium of Enterprise)

किसी भी व्यावसायिक इकाई में, प्रबंधन सभी साहसिक फैसलों और योजनाओं के पूर्ति करने का माध्यम है।

प्रबंध के द्वारा ही साहसी अथवा उद्यमी अपने मूल लक्ष्यों की प्राप्ति की योजना को अमल में लाने का प्रयास करता है।

उधमिता के गुण (Qualities of Entrepreneurship in Hindi)

उधमिता के गुण (Qualities of Entrepreneurship in Hindi)
उधमिता के गुण (Qualities of Entrepreneurship in Hindi)
  1. बौद्धिक ईमानदारी (Intellectual Honesty)
  2. आत्मविश्वास (Self-Confidence)
  3. गुणवत्ता को लेकर सजग (Quality Conscious)
  4. लीक से हटकर सोचना (Think Out of the Box)
  5. मूर्ख मत बनो (Don’t be Foolish)
  6. जोखिम लेना (Taking Risk)
  7. दृढनिश्चयी उद्यमी (Firm Entrepreneur)
  8. जानकारी से भरपूर उद्यमी (Knowledge Rich Entrepreneur)
  9. न्यायोचित उद्यमी (Justified Entrepreneur)
  10. प्रतिस्पर्धी उद्यमी (Competitive Entrepreneur)
  11. आत्ममंथन (Introspection)
  12. बागी उद्यमी (Rebel Entrepreneur)

बौद्धिक ईमानदारी (Intellectual Honesty)

बौद्धिक रूप से प्रत्येक उद्यमी ईमानदार होता है। यह हर उद्यमी की एक विशेष निशानी होती है।

वे हमेशा अपने आकलन की जांच करते हैं और ऐसी बातों को खारिज करते हैं।

जिनमें उन्होंने अपना विश्वास खो दिया है। उन्हें अपने अंदर की कमजोरी और ताकत का अंदाजा होता है।

इसलिए वह खुद के सबसे बड़े आलोचक होते है।

आत्मविश्वास (Self-Confidence)

आत्मविश्वास से भरपूर उद्यमी अति आत्मविश्वास (OverConfident) नहीं रखता है और आत्मविश्वास से भरपूर होकर भी जिद्दी नहीं होते हैं।

वे अपने संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति के भीतर जीत का जज्बा भर देते हैं।

गुणवत्ता को लेकर सजग (Quality Conscious)

उनकी निगाहे हमेसा परिणामों पर होती है। इसलिए उद्यमियों को अपना परिणाम हासिल करने का जुनून सवार रहता है।

अगर उनको अपने कोई भी कदम को उठाने में संसय हो रहा होता है जो उनको सही परिणाम न दे सके। वह कभी भी वैसा फैसला नहीं लेते है।

लीक से हटकर सोचना (Think Out of the Box)

यह व्यक्ति अपने लिक यानि जो रास्ता एक उधमी को बढ़ा देता हो यह उस रास्ते या लिक से हट कर उद्यमी ‘आउट ऑफ बॉक्स’ सोच वाले होते हैं।

वे लोग पारंपरिक सोच को चुनौती देकर नई और आक्रामक बातें करने में विश्वास करते हैं। उद्यमी तभी तरक्की करते हैं जब वे मूल प्रकृति के अनुरूप काम करते हैं।

मूर्ख मत बनो (Don’t be Foolish)

सतही ज्ञान (Superficial Knowledge) की तुलना में थोड़ा बेहतर ज्ञान रखने वाले सामान्य उद्यमी, विशेषज्ञ नहीं होते हैं।

लेकिन उनके पास आमतौर पर अपने क्षेत्र से संबंधित सामान्य ज्ञान होता है।

उद्यमी को केवल अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहते हुए कारोबार के हर पहलू को समझना और संभालने आना ही चाहिए।

जोखिम लेना (Taking Risk)

उद्यमी बैठने में विश्वास नहीं करते और जोखिम लेना जानते हैं।

लेकिन इतने समझदार होते हैं कि वे अपने हर कदम को नापतौल कर ही उठाते हैं और बेवकूफी भरा जोखिम मोल नहीं लेते है।

दृढनिश्चयी उद्यमी (Firm Entrepreneur)

वे बहुत दृढ़ निश्चयी होते हैं और आसानी से हार नहीं मानते हैं। वे जानते हैं कि हर प्रतिद्वंद्वी (Competitor) को कैसे हराया जाता है।

कुशल संसाधनों का कुशलतापूर्वक इस्तेमाल ही उद्यमिता का मूल है।

जानकारी से भरपूर उद्यमी (Knowledge Rich Entrepreneur)

ऐसे उद्यमी अपने आस-पास की स्थितियों और काम के माहौल के बारे में बहुत जानकार होते हैं।

वे बाजारों, प्रतियोगिता और प्रौद्योगिकी का ज्ञान प्राप्त करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं।

न्यायोचित उद्यमी (Justified Entrepreneur)

निष्पक्ष और स्वच्छ तरीके से काम करने वाले उद्यमी प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ अपने साथी कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के साथ उचित व्यवहार में विश्वास करते हैं।

वे अपने काम में दूसरों के योगदान को कभी नहीं भूलते है। उसके पास मूल रूप से प्रकृति में जीतने की प्रवृत्ति है।

प्रतिस्पर्धी उद्यमी (Competitive Entrepreneur)

वे हमेशा इस तरह की प्रतियोगिता के लिए तैयार रहते हैं और समय-समय पर उद्योग के प्रतियोगियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए खुद को फिट बनाने के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करते हैं।

आत्ममंथन (Introspection)

उद्यमी अपने काम की कमजोरियों का पता लगाने के लिए कहीं और देखने के बजाय आत्ममंथन में विश्वास करते हैं। अपनी नाकामयाबी के लिए वे दूसरों को दोष नहीं देते है।

बागी उद्यमी (Rebel Entrepreneur)

जो लोग हवा के विपरीत तैरने की क्षमता रखते हैं, वे लीक पर चलने में विश्वास नहीं करते हैं और इस मामले में बागी प्रवृात्ति के होते हैं। दरअसल उनको लीक से हटकर चलने में फायदा होता है।

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उधमिता की अवधारणा (Concept of Entrepreneurship in Hindi)

उधमिता की अवधारणा (Concept of Entrepreneurship in Hindi)
उधमिता की अवधारणा (Concept of Entrepreneurship in Hindi)

“उधमिता की अवधारणा (Udyamita ki Avdharna Samjhaiye)” ग्रामीण इलाकों, पिछड़े तथा अविकसित क्षेत्रों में जहाँ अनुकूल औद्योगिक वातावरण न हो।

ऐसे स्थानों पर किसी नये एवं अनुभवहीन व्यक्ति द्वारा उद्योग-धन्धे स्थापित करने या किसी अन्य नवीन उद्योग व्यवसाय को प्रारम्भ करने का साहस व उपक्रम करने को उद्यमीयता अथवा उद्यमशीलता कहते हैं।

इस कार्य में स्वत: प्रेरणा (Initiative), नेतृत्व या अग्रणीत्व (Lendership), अदम्य साहस, धैर्य एवं जोखिम उठाने (Risk taking) की क्षमता की आवश्यकता होती है।

यह वास्तव में किसी भी औद्योगिक क्षेत्र अथवा उद्योगशाला के लिये एक अति आवश्यक क्रिया-कलाप है।

उद्यमशीलता केवल वस्तु का उत्पादन करने या उत्पाद तैयार करने तक ही सीमित नहीं होती है।

इसके अन्तर्गत वस्तु का विक्रय व्यापार एवं बाजार का रुख और सेवा (Service) इत्यादि भी शामिल होती है।

उद्यमिता की अवधारणा निश्चित एवं स्थिर नहीं रही है।

अपितु समय एवं परिस्थितियों के अनुसार इसमें परिवर्तन होते रहे हैं।

यही कारण है कि अब तक उद्यमिता के सम्बन्ध में विभिन्न अवधारणाएँ विकसित हो चुकी हैं।

परिणामस्वरूप विभिन्न विद्वानों ने समय-समय पर उद्यमिता की विभिन्न अवधारणाओं का उल्लेख किया है। उद्यमिता की प्रमुख अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं।

  1. प्रबन्धकीय एवं नेतृत्व कौशल सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Managerial and Leadership Skill)
  2. जोखिम उठाने की क्षमता सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Risk Bearing Capacity)
  3. संगठन निर्माण योग्यता सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Organisation Building Ability)
  4. नवाचार सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Innovation)
  5. अवसरों को खोजने की प्रक्रिया सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Process for Searching Opportunities)
  6. उच्च उपलब्धि की क्षमता सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Capacity of High Achievement)
  7. पेशेवर अवधारणा (Professional Concept)
  8. परिणाम-अभिमुखी अवधारणा (Result-Oriented Concept)

प्रबन्धकीय एवं नेतृल कीशल सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Managerial and Leadership Skill)

कुछ विद्वानों के अनुसार उमिता प्रबन्धकीय कौशल है। उद्यमिता की इस अवधारणा के प्रबल समर्थक है – बी. एफ. हासलिज (B. F. Hoselitz), जे. एस. मिल (J.S. Mill) एवं प्रोफेसर मार्शल आदि।

हासलिज के अनुसार, “प्रबन्धकीय कौशल उद्यमिता का महत्वपूर्ण पहलू है।” इसी प्रकार जे. एस. मिल ने उद्यमिता को निरीक्षण, निर्देशन एवं नियन्त्रण की योग्यता माना है। प्रो. मार्शल ने उद्यमिता को प्रबन्ध करने की योग्यता माना है।

जोखिम उठाने की क्षमता सम्बन्धी अवधारणा (Concept.as to Risk Bearing Capacity)

मूल रूप में उद्यमिता की अवधारणा जोखिम उठाने सम्बन्धी क्षमता है।

इस अवधारणा के प्रबल समर्थक रिचार्ड केन्टीलान, फेक एच. नाइट, मुसलमान तथा जेक्सन, गायकवाड एवं स्पेनेक आदि है।

किसी भी व्यवसाय की स्थापना करने एवं उसे सफल बनाने के लिए कदम-कदम पर विभिन्न प्रकार की जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

उद्यमिता जो योग्यता, इच्छा तथा अनिश्चितताओं के विरुद्ध गारण्टी प्रदान करने की शक्ति है।

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संगठन निर्माण योग्यता सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Organisation Building Ability)

इस अवधारणा के समर्थक विख्यात अर्थशास्त्री जे.बी. से (J. B.Say), प्रो. अल्फ्रेड मार्शल, मेडरिक हॉरविसन, रिचमेन, गार्टनर, हिगिन्स, फ्रेज तथा कोपमैन आदि हैं।

जे. बी. से के अनुसार, “उद्यमिता वह आर्थिक घटक है जो उत्पादन के समस्त साधनों को संगठित करता है।”

उद्यमिता उत्पादन के विभिन्न साधनों, जैसे श्रम, पूँजी, भूमि आदि को संगठित करके उनका सदुपयोग करने की प्रक्रिया है।

गार्टनर के अनुसार, “उमिता नवीन संगठनों का सृजन करने की प्रक्रिया है।”

नवाचार सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Innovation)

पीटर एफ. ड्रकर (Peter F. Drucker) तथा शुम्पीटर के अनुसार उद्यमिता एक नवाचार सम्बन्धी कार्य है। जिसके अन्तर्गत विभिन्न विचारों का सृजन एवं उनका क्रियान्वयन किया जाता है।

जैसे-नवीन अवसर, नवीन तकनीक, नवीन उत्पादन, नवीन कच्चा माल, नवीन यन्त्र, नवीन वितरण प्रणाली, नवीम प्रबन्ध व्यवस्था आदि।

पीटर एफ. ड्रकर (Peter F. Drucker) के अनुसार, “नवाचार उद्यमिता का विशिष्ट उपकरण है।’ शुम्पीटर (Schumpter) के अनुसार, “उद्यमिता पर्यावरण का सृजनात्मक एवं नवाचार प्रत्युत्तर है।”

अवसरों को खोजने की प्रक्रिया सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Process for Searching Opportunities)

इस अवधारणा के अनुसार उद्यमिता एक ऐसी प्रक्रिया है। जिसके अन्तर्गत अवसरों की खोज की जाती है। ताकि यथा समय उनका लाभ उठाया जा सके।

इस अवधारणा के प्रबल समर्थक हैं – पीटर एफ. ड्रकर (Peter F.Drucker), स्टीवेन्सन तथा जारिल्लो (Stevenson and Jarillo)।

पीटर एफ. ड्रकर के अनुसार, “अवसरों की अधिकाधिक खोज करना ही उद्यमिता की सही परिभाषा है।”

स्टीवेन्सन एवं जारिल्लो के अनुसार, “उद्यमिता एक प्रक्रिया है। जिसके अन्तर्गत लोग अपने नियन्त्रण वाले संसाधनों की परवाह किये बिना अवसरों की खोज करते हैं।”

उच्च उपलब्धि की क्षमता सम्बन्धी अवधारणा (Concept as to Capacity of High Achievement)

इस अवधारणा के अनुसार उद्यमिता व्यक्ति की उपलब्धि की उच्च क्षमता का परिणाम है। इस अवधारणा के प्रबल समर्थक हैं मैकक्लीलैण्ड (McClelland)।

उनके अनुसार, “जो व्यक्ति उपलब्धि की उच्च क्षमता रखते हैं, उनकी उद्यमिता उच्च स्तर की होती है।”

मैकक्लीलैण्ड (McClelland) (1961) ने उद्यमिता के निम्न दो कारण बतलाये हैं – (i) कार्य को नये एवं कुशल ढंग से करने की योग्यता तथा (ii) अनिश्चितता में निर्णय लेने की क्षमता।

इस प्रकार मैकक्लीलैण्ड की विचारधारा में शुम्पीटर एवं केन्टीलॉन दोनों ही के विचार सम्मिलित हैं।

उनके अनुसार उच्च उपलब्धि प्राप्त करना ही ‘उद्यमिता’ है। जिसके लिए नवाचार करने तथा जोखिमों में निर्णय लेने की क्षमता का होना आवश्यक होता है।

पेशेवर अवधारणा (Professional Concept)

आधुनिक प्रबन्धक उद्यमिता को पेशेवर अवधारणा के रूप में स्वीकार करते हैं।

अन्य पेशों की तरह उद्यमिता भी एक पेशा है। जिसे शिक्षण-प्रशिक्षण द्वारा विकसित किया जा सकता है।

यही कारण है कि आजकल सरकारी तथा निजी संस्थानों द्वारा उद्यमिता के अनेक शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।

परिणाम-अभिमुखी अवधारणा (Result-oriented Concept)

यह उद्यमिता की आधुनिकतम अवधारणा है। इस अवधारणा के अनुसार आधुनिक युग में उद्यमिता को परिणाम-अभिमुखी अवधारणा के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप क्या-क्या प्रयास कर रहे हैं। कितना परिश्रम कर रहे हैं तथा कितना धन व्यय कर रहे हैं-यह महत्वपूर्ण नहीं है।

अपितु महत्वपूर्ण यह है कि उसका परिणाम क्या रहा तथा लक्ष्य की पूर्ति हुई या नहीं। यदि लक्ष्य की पूर्ति हुई हो तो यह उद्यमिता है अन्यथा सब कुछ व्यर्थ एवं अपव्यय है।

उधमिता के कार्य (Function of Entrepreneurship in Hindi)

उधमिता के कार्य (Function of Entrepreneurship in Hindi)
उधमिता के कार्य (Function of Entrepreneurship in Hindi)
  1. संसाधन का आयोजन (Resource Planning)
  2. अवसरों और संभावनाओं की पहचान करना (Identifying Opportunities and Possibilities)
  3. जोखिम लेना (Taking Risk)
  4. निर्णय लेना (Decision)
  5. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अनुकूलन (Technology Transfer and Optimization)
  6. नवपरिवर्तन (Innovation)
  7. सामाजिक उत्तरदायित्व (Social Responsibility)
  8. जनसंपर्क (Public Relation)
  9. अनुभव साझा करना (Experience Sharing)
  10. प्रबंधकीय भूमिकाएँ (Managerial Roles)
  11. संतुलित आर्थिक विकास (Balanced Economic Growth)

उधमिता के महत्व (Importance of Entrepreneurship in Hindi)

उद्यमशीलता वास्तव में क्या है? और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? एक उद्यमी वह व्यक्ति है जो दुनिया में एक समस्या देखता है और तुरंत समाधान बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है।

वे ऐसे नेता हैं जो समाज को बेहतर बनाने के लिए हड़ताल करते हैं।

चाहे वे नौकरियां पैदा कर रहे हों या एक नया उत्पाद, वे लगातार दुनिया की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करते हैं।

Entrepreneurship क्या है? यह समझने के लिए आइए देखें कि “उधमिता के महत्व (Importance of Entrepreneurship in Hindi)” उद्यमी समाज में महत्वपूर्ण क्यों हैं?

  1. स्वरोजगार प्रदायक (Self-Employed Supplier)
  2. आर्थिक शक्ति के केन्द्रीयकरण का विकेंद्रीकरण (Decentralization of Centralization of Economic Power)
  3. नये उत्पाद एवं आविष्कारों को बढ़ावा (Promotion of New Products and Inventions)
  4. मानवीय संसाधन का उपयोग (Use of Human Resources)
  5. स्वदेशी उद्यम को बढ़ावा (Promote Indigenous Enterprise)
  6. तीव्र आर्थिक विकास (Rapid economic growth)

स्वरोजगार प्रदायक (Self-Employed Supplier)

उद्यमियों के बिना, नौकरियों का अस्तित्व नहीं होता है। उद्यमी खुद को रोजगार देने के लिए जोखिम उठाते हैं।

अपने व्यवसाय के विकास को जारी रखने की उनकी महत्वाकांक्षा अंततः नई नौकरियों के निर्माण की ओर ले जाती है। जैसे-जैसे उनका कारोबार बढ़ता जाता है।

वैसे-वैसे और भी नौकरियां पैदा होती जाती हैं। इस प्रकार, लोगों को इस बेरोजगारी में वह रोजगार देता है।

आर्थिक शक्ति के केन्द्रीयकरण का विकेंद्रीकरण (Decentralization of Centralization of Economic Power)

आज के समाज में कुछ सबसे बड़ी प्रौद्योगिकियां (Technologies) व्यवसायों से आई हैं। तकनीकी प्रगति एक समस्या को हल करने, दक्षता बनाने या दुनिया को बेहतर बनाने की आवश्यकता से निकलती है।

इस प्रकार, ऐसी अवधि में जहां प्रौद्योगिकी में अधिक उन्नति होती है। यह आमतौर पर एक उद्यमी के काम के कारण होता है।

नये उत्पाद एवं आविष्कारों को बढ़ावा (Promotion of New Products and Inventions)

उद्यमी बड़े सपने देखते हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से उनके कुछ विचार दुनिया भर में बदलाव करेंगे।

वे एक नया उत्पाद बना सकते हैं जो हर एक समस्या को हल करता है या किसी ऐसी चीज का पता लगाने के लिए चुनौती लेता है जो पहले कभी नहीं देखी गई।

कई उद्यमी अपने उत्पादों, विचारों या व्यवसायों के साथ दुनिया को बेहतर बनाने में विश्वास करते हैं।

मानवीय संसाधन का उपयोग (Use of Human Resources)

हमेशा से ही उद्यमी समाज को देते हैं। लेकिन समाज में अच्छे लोगो के साथ बुरे लोग भी रहते है। वही कुछ लोगों की धारणा है कि उद्यमी अमीर बुरे और लालची होते हैं।

जबकि उद्यमी अक्सर औसत व्यक्ति की तुलना में अधिक अच्छे के लिए अधिक करते हैं।

वे अधिक पैसा बनाते हैं और इस प्रकार करों में अधिक भुगतान करते हैं जो सामाजिक सेवाओं को निधि देने में मदद करता है।

उद्यमी दान और गैर-लाभ के लिए सबसे बड़े दानदाताओं में से हैं।

कुछ लोग गरीब समुदायों को स्वच्छ पेयजल और अच्छी स्वास्थ्य देखभाल जैसी चीजों के लिए उपयोग करने के लिए समाधान बनाने में अपने पैसे का निवेश करना चाहते हैं।

स्वदेशी उद्यम को बढ़ावा (Promote Indigenous Enterprise)

उद्यमशीलता एक अर्थव्यवस्था में नई संपत्ति उत्पन्न करती है।

उद्यमियों से नए विचार और बेहतर उत्पाद या सेवाएं नए बाजारों की वृद्धि और एक अर्थव्यवस्था में नए धन का सृजन करने की अनुमति देती हैं।

इसके अलावा, रोजगार और आय के बढ़े हुए स्तर को राष्ट्रीय आय में जोड़ा जाता है।

तीव्र आर्थिक विकास (Rapid Economic Growth)

खुशखबरी साझा करने की भावना से, पहले से कहीं अधिक लोग आज गरीबी से बाहर निकाले जा रहे हैं। वैश्वीकरण के कारण यह संभावना है।

इंटरनेट पर लाखों और अरबों लोगों से जुड़ने में सक्षम होने के कारण नए उद्यमियों को दुनिया भर के ग्राहकों को खोजने में सहूलियत मिलती है।

तो, जो लोग ऑनलाइन पैसा कमाना चाहते हैं। वे गरीबी से बाहर निकलने में सक्षम हैं।

उद्यमिता के महत्वपूर्ण उद्देश्य (Purpose of Entrepreneurship in Hindi)

  • उद्यमिता की गुणवत्ता को विकसित एवं सुदृढ करना।
  • उपयुक्त उत्पादों का चयन एवं सुसाध्य परियोजनाओं को तैयार करना।
  • व्यक्तियों को छोटे व्यवसायों की स्थापना एवं परिचालन में निहित प्रक्रिया एवं कार्यवाही से परिचित कराना।
  • रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना।
  • व्यावसायिक जोखिम की चुनौतियों का सामना करने के लिए उद्यमियों को प्रशिक्षित करना एवं तैयार करना।
  • व्यवसाय के बारे में उद्यमी के दृष्टिकोण को व्यापक बनाना एवं कानून की सीमाओं के भीतर उसके विकास में सहायता करना।
  • देश के प्रत्येक राज्य एवं क्षेत्र का विकास करने हेतु।

उधमिता के विस्तार की आवश्यकता और अवसर क्यों जरुरी है?

किसी भी प्रगतिशील देश की आर्थिक उन्नति के लिए जो भी रणनीति अपनाई गयी हो। उसमें औद्योगिक प्रगति का होना अनिवार्य है। औद्योगिक प्रगति स्वयं अपने आप नहीं हो सकती है।

इसके परिणामस्वरूप, यह केवल मानव संसाधनों द्वारा निरंतर प्रयासों के माध्यम से किया जाएगा।

औद्योगिक प्रगति में ऐसे मानव संसाधनों को ही उद्यमी का नाम दिया गया।

इस प्रकार उद्यमिता का हमारे जैसे प्रगतिशील देश में एक महत्वपूर्ण योगदान है। वास्तव में उद्यमी आवश्यक नहीं कि पैदायशी ही हों।

लेकिन उन्हें विकसित भी किया जा सकता है।

हालांकि अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों तथा मनोवैज्ञानिकों का उद्यमी की प्रगति के बारे में भिन्न-भिन्न मत है। फिर भी, हर किसी की एक बात पर राय है कि प्रगति प्रयासों से ही हो सकती है।

न केवल भारत बल्कि अन्य देशों ने भी इस तरह के परिणामों के माध्यम से कोशिश की है।

उद्यमशीलता प्रत्येक राष्ट्र के नियोजित, संतुलित और तीव्र आर्थिक विकास की नींव है।

केवल उद्यमशीलता विकसित करने से ही देश की विभिन्न आर्थिक-सामाजिक समस्याओं जैसे गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, धन की असमानता, पिछड़ापन, कम उत्पादकता, निम्न जीवन स्तर आदि जैसी गंभीर समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

साथ ही एक आदर्श औद्योगिक समाज की रचना की जा सकती है।

विकासशील देशों में उद्यमिता समृद्धि का एक महत्त्वपूर्ण आधार है तो विकसित देशों में यह सृजनात्मक चिन्तन, सामाजिक नवप्रवर्तन एवं ‘साहसिक समाज के विकास की एक महत्वपूर्ण पद्धति है।

अविकसित, विकासशील तथा विकसित सभी प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं में उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस सम्बन्ध में बेल ब्रोजल ने ठीक ही कहा है, “उद्यमिता आर्थिक विकास का अनिवार्य अंग है।” उद्यमिता की आवश्यकता के प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैं।

सफल इकाइयों की स्थापना (Establishment of Viable Units)

उद्यमिता के विकास से व्यावसायिक इकाइयों को लाभप्रद एवं कुशल बनाया जा सकता है।

आधुनिक उद्यमी प्रशिक्षित, कुशल एवं आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होने के कारण व्यावसायिक सफलता की सम्भावना को बढ़ा देते हैं।

रुग्ण इकाइयों (Sick Units) को पुनर्जीवित कर सरकारी भार को कम करने के साथ-साथ राष्ट्रीय साधनों के सदपयोग को सम्भव बनाते हैं। उद्यमिता ही व्यावसायिक संस्थानों को शाश्वत जीवन (Perpectual Life) प्रदान करने वाला तत्व है।

तीव्र आर्थिक विकास (Rapid Economic Growth)

उद्यमिता से व्यक्तियों में साहसी भावना (Entrepreneurial Spirit), रचनात्मक मनोवृत्तियों (Creative attitudes) एवं उपलब्धि-दृष्टिकोण (Achie-vement Vision) का विकास होता है।

इससे व्यक्ति व्यावसायिक अवसरों की खोज करते हैं तथा उनका विदोहन करने के लिए नये-नये उद्योग स्थापित करते हैं। इस प्रकार देश में औद्योगिक क्रियाओं को प्रोत्साहन मिलता है तथा आर्थिक विकास सम्भव होता है।

प्रो. डुप्रीज (Prof. Dupriez) का कथन है कि “उद्यमियों की कमी आर्थिक विकास की एक प्रमुख बाधा है।” व्यावसायिक साहसवादिता के विकास के द्वारा एक आदर्श औद्योगिक समाज की रचना की जा सकती है।

नवाचारों को प्रोत्साहन (Promote Innovations)

उद्यमिता व्यवसाय में नवाचार, चिन्तन में सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करती है। फलस्वरूप, व्यवसाय में नवीन उत्पादन विधियों, नये कच्चे माल, नये यन्त्र (Machine), नयी प्रौद्योगिकी तथा नयी-नयी वस्तुओं के उत्पादन को प्रोत्साहन मिलता है।

अपने व्यवसाय में प्रबन्ध की नवीन तकनीकों का भी विकास करते हैं। वे ‘बाजार अनुसन्धान’ के द्वारा नये बाजारों की खोज करते है तथा विक्रय एवं ग्राहक सन्तुष्टि के लिए नयी विधियों को अपनाते है।

नवाचार हेत साहसी शोध व अनुसंधान पर भी बल देते हैं। पीटर एफ ड्रकर के अनुसार, “नवाचार उद्यमी का एक विशिष्ट उपकरण है। यह वह। कार्य है जो संसाधनों में नवीन दौलत सृजन करने की क्षमता प्रदान करता है।”

आधुनिक आर्थिक विकास का चक्र (Pivot of Modern Economic Development)

उद्यमिता आधुनिक आर्थिक विकास का चक्र है। उद्यमिता नये-नये उद्योगों की स्थापना करके एवं विद्यमान उद्योगों का विकास करके रोजगार के नये-नये अवसरों का सृजन करती है। संसाधनों का सही ढंग से विदोहन करके राष्ट्रीय आय की वृद्धि में सक्रिय योगदान देती है तथा देश में पूँजी निर्माण को गति देती है।

संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग (Optimum Utilisation of Resources)

उद्यमिता जहाँ एक ओर देश में उपलब्ध सीमित संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग पर बल देती है, वह दूसरी ओर उनके अपव्यय एवं बर्बादी पर रोक लगाती है। उद्यमिता अप्रयुक्त संसाधनों का उपयोग करती है तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि करती है।

नवीन बाजारों की खोज एवं विकास (Search and Development of New Markets)

उद्यमिता नवीन बाजारों की खोज एवं उनका विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नये शिक्षित एवं प्रशिक्षित उद्यमी नये-नये बाजारों की खोज करने के लिए बाजार अनुसन्धान करते हैं।

नवीन बाजारों के सम्बन्ध में तथ्यों का संकलन एवं विश्लेषण करते हैं। तत्पश्चात उन बाजारों में माँग का अध्ययन करते हैं एवं उनकी मांग के अनुसार उत्पादों एवं सेवाओं को उपलब्ध कराते हैं।

सामाजिक परिवर्तनों का उपकरण (Tool of Social Changes)

उद्यमिता सामाजिक परिवर्तनों का एक महत्वपूर्ण उपकरण भी है। नवीन आविष्कारों तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के फलस्वरूप समाज में अन्धविश्वास कम होता हा साहस व्यक्ति के चिन्तन एवं दृष्टिकोण में परिवर्तन लाता है।

समाज कर्मठता एवं उद्यमशीलता के एक नये परिवेश में प्रवेश करता है। शिक्षा व ज्ञान का प्रसार होता है। फलस्वरूप समाज रूढ़ियों व घिसी-पिटी परम्पराओं से मुक्त होता है तथा समाज में एक नयी चेतनायुक्त संस्कृति की स्थापना होती है।

पूँजी निर्माण में योगदान (Promotes Capital Formation)

वित्त सभी आर्थिक क्रियाओं का जीवन रक्त कहलाता है। उद्यमिता देश की.बचतों को एकत्रित करके उसे पूँजी का रूप प्रदान करती है, उसमें वृद्धि करती है, उत्पादन कार्यों में विनियोजन करती है।

उस पर विनियोक्ताओं को समुचित प्रत्याय प्रदान करती है। पूँजी निर्माण विशेषत: अविकसित एवं भारत जैसे विकासशील देश की एक महत्वपूर्ण आर्थिक समस्या के निवारण में उद्यमिता महत्वपूर्ण योगदान देती है।

रेजर नस्कर्ट के अनुसार, “विकासशील देशों में केवल उद्यमी ही पूँजी के अभेद्य दुर्ग को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है तथा पूँजी निर्माण में आर्थिक शक्तियों को गति प्रदान कर सकता है।”

राजकीय नीतियों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन (Execution of Government Policies and Plans)

उद्यमिता राजकीय नीतियों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विद्यमान औद्योगिक नीति, आयात-निर्यात नीति, लाइसेन्सिंग नीति, प्रौद्योगिकी नीति आदि के अधीन उद्यमी अपने व्यावसायिक उपक्रम की स्थापना करता है विकास करता है तथा सफल उत्पादन करता है।

आत्मनिर्भर समाज की स्थापना (Establishing Self-sufficient Society)

आत्मनिर्भर समाज की रचना में उद्यमिता का महत्वपूर्ण योगदान है। साहस के द्वारा उत्पादकता में क्रान्ति लायी जा सकती है। उद्यमियों के द्वारा राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ निर्यातों में भी वृद्धि सम्भव है।

एलबर्ट केली (Albert Kelley) का कथन है कि “उद्यमिता आर्थिक विकास की श्रृंखला-प्रतिक्रिया’ (Chain-Reaction) के द्वारा किसी भी राष्ट्र को आत्मनिर्भरता की दहलीज तक पहुँचा देती है।”

विविध (Miscellaneous)

  1. भौगोलिक असमानताओं को दूर करने में सहायक।
  2. व्यावसायिक क्षेत्र में अन्वेषण एवं अनुसन्धान को प्रोत्साहन ।
  3. जीवन-स्तर को ऊँचा उठाने में सहायक।
  4. रोजगार के अवसरों के विस्तार में सहायक।
  5. आर्थिक सत्ता के विकेन्द्रीकरण में सहायक। जब उद्यमिता घर-घर में प्रवेश कर जाती है, तब देश एवं समाज में आर्थिक सत्ता का केन्द्रीकरण समाप्त होने लगता है तथा विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया शुरू होने लगती है।
  6. औद्योगिक पर्यावरण के निर्माण में सहायक आदि।

इन्हें भी देखे –


निष्कर्ष (Conclusion)

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Karuna Tiwari is an Indian journalist, author, and entrepreneur. She regularly writes useful content on this blog. If you like her articles then you can share this blog on social media with your friends. If you see something that doesn't look right, contact us!

2 thoughts on “Entrepreneurship क्या है? (Entrepreneurship in Hindi) – पूरी जानकारी हिंदी में।”

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