Entrepreneur क्या है? (What is Entrepreneur in Hindi)

Entrepreneur क्या है? (Entrepreneur in Hindi)

विषय-सूची

आज हम इस पोस्ट में “Entrepreneur क्या है? (What is Entrepreneur in Hindi)”, “Entrepreneur Kya Hai in Hindi” या “उधमी क्या है? (Udhmi Kya Hai)” जानेंगे।

उद्यमी उस व्यक्ति अथवा विभिन्न व्यक्तियों के समूह को कहा जाता है, जो किसी व्यवसाय की कल्पना करते हैं।

‘Entrepreneur क्या है?’ उसकी स्थापना के लिये आवश्यक संसाधनों को जुटाते हैं। उस व्यवसाय के संचालन की जोखिमों को उठाते हुए उसका प्रबन्ध, समन्वय एवं नियन्त्रण करते हैं।

आधुनिक युग औद्योगिक युग है। ‘Entrepreneur क्या है?’ व्यापक व सम्पूर्ण औद्योगीकरण के बिना कोई भी देश उन्नति नहीं कर सकता है।

Entrepreneur क्या है? (What is Entrepreneur in Hindi)
Entrepreneur (उद्यमी) वह व्यक्ति होता है जो अपना खुद का उद्योग स्थापित करता है, जोखिम उठाता है। अपने छोटे से Idea को एक बड़े व्यवसाय में बदल देना ही Entrepreneur कहलाता है।

‘एंटरप्रेन्योर क्या होता है? (Entrepreneur in Hindi)’, ‘Entrepreneurship क्या है?

सम्पूर्ण विश्व में जनसंख्या आबाध गति से निरन्तर बढ़ रही है और भारत में तो स्थिति और भी खराब है।

यहाँ नित्य बढ़ती आबादी से उत्पन्न बेरोजगारी की समस्या विकट रूप धारण कर रही है।

इस समस्या का केवल एक ही हल है। ‘देश का सम्पूर्ण औद्योगीकरण।’

Entrepreneur क्या है? इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये सारे देश में, छोटे और बड़े दोनों प्रकार के उद्योगों का एक जाल-सा बिछाने की नीति अपनाई जा रही है।

जिससे कि देश के सभी भागों में समान रूप से औद्योगिक प्रगति हो, उद्योगों का नवीनीकरण तथा विकास हो, आम जनता को इससे लाभ मिले।

Entrepreneur क्या है? औद्योगिक प्रगति देश के अर्थ-तन्त्र के लिये एक सुदृढ़ आलम्बन बन सके। इस तरह निम्नलिखित चीजों को ध्यान में रखते है।

सभी ग्रामीण क्षेत्रों में, पिछड़े इलाकों में तथा दूर-दराज के ऐसें मैदानों व पहाड़ी भागों में जहाँ अभी तक औद्योगिक विकास नहीं हो सका है।

वहाँ छोटे-बड़े उद्योगों, लघु उद्योग-धन्धों की स्थापना पर विशेष बल दिया जा रहा है।


“उद्यमी में अपार प्रेरक शक्ति होती है। वह व्यवसाय व उद्योग को त्व प्रदान करता है। वह संगठनकर्ता होता है, उसका प्रतिफल लाभ होता है, उसके निर्णयों में लोच होती है, उसका दृष्टिकोण सदैव सकारात्मक होता है। वह नवीन उपक्रमों की स्थापना में विशेष रुचि लेता है, वह लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सदैव समर्पित रहता है, उसमें स्वतन्त्र रूप से निर्णय लेने तथा उत्तरदायित्व ग्रहण करने की क्षमता होती है, वह समन्वयकर्ता होता है एवं भविष्यदृष्टा होता है।”


उधमी शब्द का विकास का इतिहास (Evolution of Entrepreneur History in Hindi)

उधमी शब्द का विकास का इतिहास (Evolution of Entrepreneur History in Hindi)
उधमी शब्द का विकास का इतिहास (Evolution of Entrepreneur History in Hindi)

“Entrepreneur क्या है?” उद्यमी शब्द का उद्गम फ्रेंच भाषा के शब्द ‘एण्ट्रीपेण्ड्री’ (Entrependre) से हुआ है।

जिसका अर्थ है ‘नए व्यवसाय के जोखिम को वहन करना (Undertook the Risk of Enterprise)’।

‘Entrepreneur क्या है?’ इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 16वीं शताब्दी में फ्रांस में प्रमुख अभियानों के लिए ‘श्री रिचार्ड केण्टीलोन’ ने अपने लेखन कार्य में किया था।

उन्होंने उद्यमी का वर्णन एक ऐसे व्यक्ति के रूप में किया था जो किसी उत्पाद को बेचने के लिये उसके मूल्य का भुगतान करता है।

इसलिए ऐसा व्यक्ति ऐसी वस्तु को प्राप्त करने के लिये संसाधनों का जोखिम उठाता है।

उसके अनुसार चतुर उद्यमी वाणिज्यिक लाभ के लिये सदैव संसाधनों के उपयोग के लिए श्रेष्ठ अवसरों की खोज में रहता है।

कुछ विद्वानों के अनुसार (Entrepreneur क्या है?) उद्यमी शब्द का प्रयोग सबसे पहले फ्रांस में 16वीं शताब्दी में फौजी अभियानों (Military Expeditions) में किया गया था।

17वीं शताब्दी में इस शब्द का प्रयोग अन्य साहसिक कार्यों में मुख्य रूप से नागरिक अभियान्त्रिकी के क्षेत्र में, सड़कों, पुलों, बन्दरगाहों के क्षेत्र में किया गया था।

यही 18वीं शताब्दी में आर्थिक क्रियाओं के सम्बन्ध में किया जाने लगा।

परन्तु 200 वर्ष पूर्व जे.बी. से (J.B.Say) द्वारा विकसित किए गए शब्द उद्यमी (Entrepreneur) के बारे में पूर्ण भ्रान्ति बनी हुई है।

‘Entrepreneur क्या है?’ अमेरिका में प्राय: उद्यमी उस व्यक्ति को माना जाता है जो अपना स्वयं का नया व्यवसाय प्रारम्भ करता है।

जबकि जर्मनी में उद्यमी उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसके पास सत्ता एवं सम्पत्ति अधिक मात्रा में होती है।

वर्तमान में आर्थर कोल का यह कथन बिल्कुल सत्य प्रतीत होता है कि उद्यमी का अध्ययन करना आर्थिक क्रियाओं में मुख्य पात्र का अध्ययन करना है।

‘Entrepreneur क्या है?’ एक उद्यमी वास्तव में समाज का सच्चा नायक एवं आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तनों का अग्रदूत (Harbinger) माना जाने लगा है।

किसी देश की व्यावसायिक सफलता का निर्धारण उद्यमियों द्वारा नवप्रवर्तन (Innovation) से लेकर रचनात्मक कार्यों के आधार पर ही होती है।

Entrepreneur क्या है? उद्यमी को भावी समाज का आधार या स्वप्न द्रष्टा कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

वर्तमान में विश्वस्तर पर (Entrepreneur क्या है?) सबसे बड़ा Entrepreneur टाटा, बिड़ला, जिन्दल डालमिया, धीरू भाई अंबानी आदि उद्यमियों के कारण ही इनकी संस्थाओं के नाम प्रचलित हुए हैं।

यद्यपि विभिन्न विद्वानों ने उद्यमी को विभिन्न नामों से पुकारा है। Entrepreneur क्या है? भले ही उद्यमी का अर्थ जोखिम उठाने वाला, प्रवर्तक या प्रबन्धक, संगठनकर्ता या समन्वयकर्ता से लगाया जाता रहा है।

Entrepreneur क्या है? परन्तु वर्तमान में उद्यमी को नवप्रवर्तक (Innovator) तथा उद्योग एवं व्यावसायिक जगतु का आर्थिक अगुआ (Economic Leader) कहा है।

उधमी का अर्थ (Meaning of Entrepreneur in Hindi)

‘Entrepreneur क्या है?’ उद्यमी शब्द का उद्गम फ्रेंच भाषा के शब्द ‘एण्ट्रीपेण्ड्री’ (Entrependre) से हुआ है। जिसका अर्थ है ‘नए व्यवसाय के जोखिम को वहन करना।

उद्यमी एक जड़ एवं मृतक अर्थ व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार करता है। वर्षों से निरन्तर घाटे पर चल रहे उद्योगों की पुन: स्थापना करता है।

उसमें नवाचार (Innovation), नियोजन (Planning) तथा कुशल प्रबन्ध (Efficient Management) का संचार करता है।

आखिरकार उसे लाभप्रद (Profitable) इकाई के रूप में परिवर्तित करता है।

विद्वान् अर्थशास्त्री मार्शल (Marshall) के अनुसार, “उद्यमी उद्योग का कप्तान होता है क्योंकि वह जोखिम एवं निश्चितता का केवल वाहक ही नहीं होता है।

वरन् एक प्रबन्धक, भविष्यद्रष्टा, नई उत्पादक विधियों का आविष्कारक (Innovator) एवं किसी देश के आर्थिक ढाँचे का निर्माता/आविष्कारक भी होता है।”

“Entrepreneur क्या है?” सरल भाषा में उद्यमी से आशय ऐसे व्यक्ति से है जो किसी नवीन उपक्रम की स्थापना करने का जोखिम उठाता है। आवश्यक संसाधन एकत्रित करता है।

जैसे-मानव शक्ति, सामग्री एवं पूँजी आदि तथा उसका प्रबन्ध एवं नियन्त्रण करता है। “Entrepreneur क्या है?” हालांकि जोखिम उठाना उद्यमी का प्राथमिक कार्य है।

किन्तु आधुनिक युग में उसे और भी कार्य सम्पन्न करने पड़ते हैं। जैसे-नेतृत्व, सृजनात्मक तथा नवाचार सम्बन्धी कार्य।


“सामान्य अर्थ में उद्यमी से आशय ऐसे व्यक्ति से है जो जोखिम उठाता है, अनिश्चितताओं का सामना करता हैऔर अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। यद्यपि जोखिम उठाना उद्यमी का प्राथमिक कार्य है किन्तु वर्तमान में उसे और भी कार्य, जैसे-नेतृत्व, सृजनात्मक एवं नवाचार सम्बन्धी कार्य भी करने होते हैं।”


उधमी का परिभाषा (Definition of Entrepreneur in Hindi)

विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के अनुसार उधमी की परिभाषा को निम्न रूप में बाटा गया है।

  • परम्परागत अर्थव्यवस्था में (In Traditional Economy)
  • विकासशील अर्थव्यवस्था में (In Developing Economy)
  • विकसित अर्थव्यवस्था में (In Developed Economy)

1. परम्परागत अर्थव्यवस्था में (In Traditional Economy)

परम्परागत अर्थव्यवस्था में उद्यमी को जोखिम वहनकर्ता के रूप में परिभाषित किया गया है।

कोई भी व्यक्ति जो व्यावसायिक जोखिम वहन करता है, उद्यमी की श्रेणी में आता है। इस दृष्टिकोण से कुछ प्रमुख विद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं।

  • परम्परागत अर्थशास्त्री श्री जे. बी. से (J. B.Say) के अनुसार – उद्यमी वह व्यक्ति है जो आर्थिक संसाधनों को उत्पादकता एवं लाभ के क्षेत्रों से उच्च क्षेत्रों की ओर हस्तान्तरित करता है।
  • रिचर्ड केण्टीलोन (Richard Cantillon) के अनुसार – उद्यमी वह व्यक्ति है जो किसी उत्पाद को अनिश्चित मूल्य पर बेचने के लिए निश्चित धनराशि देता है और तद्नुसार उसे प्राप्त करने एवं साधनों का उपयोग करने का निर्णय लेता है।
  • एफ. एच. नाइट (F. H. Knight) के अनुसार – उद्यमी विशिष्ट व्यक्तियों का वह समूह है जो जोखिम उठाते हैं और अनिश्चितता का सामना करते हैं।
  • एफ. वी. हेने (F.V. Hane) के अनसार – उत्पत्ति में निहित जोखिम उठाने वाला साधन ही उद्यमी है।
  • ब्रिटेनियाँ शब्दकोश के अनसार – उद्यमी एक व्यक्ति है जो भावी अनिश्चितताओं के मध्य किसी व्यवसाय के संचालन का जोखिम उठाता है।

2. विकासशील अर्थव्यवस्था में (In Developing Economy)

भारत जैसे विकासशील अर्थव्यवस्था वाले देशों में उद्यमी को एक प्रवर्तक (Promoter), संगठनकर्ता (Organiser) एवं समन्वयकर्ता (Coordinator) के रूप में परिभाषित किया गया है।

  • जैम्स बर्नर (James Burner) के अनुसार – उद्यमी वह व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह है जो किसी नये उपक्रम की स्थापना के लिए उत्तरदायी होता है।
  • ऑक्सफोर्ड आंग्ल शब्दकोश (Oxford English Dictionary) के अनुसार – उद्यमी वह व्यक्ति अथवा विशेषतय अनुबन्धकर्ता है जो किसी उपक्रम की स्थापना करता है। जो पूँजी व श्रम के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है।
  • अलफ्रेड मार्शल (Alfred Marshall) के शब्दों में – उद्यमी वह व्यक्ति है जो जोखिम उठाने का साहस करता है। जो किसी कार्य के लिये आवश्यक पूँजी एवं श्रम की व्यवस्था करता है। जो इसकी सामान्य योजना बनाता है तथा जो उसकी सूक्ष्म बातों का निरीक्षण करता है।
  • गेराल्ड ए. सिल्वर (Gerald A. Silver) के शब्दों में – उद्यमी वह व्यक्ति है जो किसी नई वस्तु या सेवा के विचार की कल्पना करता है। फिर उस वस्तु या सेवा का उत्पादन करने के लिए एक व्यवसाय की स्थापना हेतु पूँजी प्राप्ति के स्रोत की खोज करता है।
  • वालरस (Walras) के अनुसार – उद्यमी वह अभिकर्ता है जो दूसरे व्यवसायियों से कच्चा माल, भूमिपतियों से भूमि, श्रमिकों से अभिरुचियाँ, पूँजीपति से पूँजीगत माल खरीदता है। उत्पादकों को बेचता है जो कि इनके सहयोग अथवा संयोजन अथवा सेवाओं का परिणाम है।

3. विकसित अर्थव्यवस्था में (In Developed Economy)

विकसित अर्थव्यवस्था में उद्यमी का कार्य अत्यन्त विशिष्ट, व्यापक एवं जटिल है और वह एक पेशेवर व्यक्ति का रूप धारण कर लेता है।

  • पीटर एफ. ड्रकर (Peter F.Drucker) के अनुसार – उद्यमी सदैव परिवर्तन की खोज करता है। उस पर अनुक्रिया करता है और एक अवसर के रूप में उसका विदोहन करता है।
  • हर्बटन ईवान्स (Herbton Evans) के अनुसार – उद्यमी वह व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह है जो संचालित किये जाने वाले व्यवसाय के निर्धारण का कार्य करता है।
  • एच. डब्ल्यू. जॉनसन (H. W. Johnson) के अनुसार – उद्यमी तीन आधारभूत तत्त्वों का योग है- (i) अन्वेषण, (ii) नवाचार एवं (iii) अनुकूलन।
  • राव एवं मेहता (Rao and Mehta) के अनुसार – उद्यमी पर्यावरण का सृजनात्मक एवं नवाचार का प्रत्युत्तर है।
  • रॉबर्ट रोन्सटेण्ड (Robert Ronstand) के अनुसार – उद्यमिता अनगिनत धन निर्मित करने की गत्यात्मक प्रक्रिया है।

उधमी का प्रकार (Types of Entrepreneur in Hindi)

  • अभिनव उद्यमी (Innovative Entrepreneur)
  • गुणात्मक उद्यमी (Imitative Entrepreneur)
  • आदर्श उद्यमी (Ideal Entrepreneur)
  • फेबियन उद्यमी (Fabian Entrepreneur)
  • निर्माता (Creator)
  • कामचोर उद्यमी (Drone Entrepreneur)

अभिनव उद्यमी (Innovative Entrepreneur)

वह उद्यमी जो नए उत्पाद (Product) को लाता है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए नयी विधियों को खोजता है। नये बाजार (Market) को खोजता है।

उसे अभिनव उद्यमी (Innovative Entrepreneur) कहते है। वे उद्यमी जो नए आईडिया (Ideas) के साथ कार्य करते है उन्हें अभिनव उद्यमी (Innovative Entrepreneur) कहते है।

गुणात्मक उद्यमी (Imitative Entrepreneur)

गुणात्मक उद्यमी (Imitative Entrepreneur) एक ऐसे प्रकार का उद्यमी होता है जो किसी बिजनेस की कॉपी करता है और उसको सुधार करता है।

ये उद्यमी किसी नयी चीज को खोजते नहीं है। बल्कि दुसरे के खोजे गये तकनीक और टेक्नोलॉजी को फॉलो करते है।

आदर्श उद्यमी (Ideal Entrepreneur)

इस प्रकार के उद्यमी स्वयं के हित के साथ-साथ सामाजिक हित पर भी ध्यान देते हैं।

इनका उद्देश्य केवल अधिकतम लाभ कमाना ही नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व को पूरा करना भी है।

फैबियन उद्यमी (Fabian Entrepreneur)

फैबियन उद्यमी (Fabian Entrepreneur) का अर्थ होता है “अवसर की प्रतीक्षा करने वाला”। इस प्रकार के उद्यमी संगठन (Organization) में किए जाने वाले परिवर्तनों के बारे में उलझन में रहते हैं।

ये किसी नयी चीज को खोजते नहीं है, बल्कि ये पहले से ही खोजी गयी चीज को विश्लेषण (Analyze) करते है और जब वो इसके सफलता दर (Success Rate) से संतुष्ट हो जाते है। तब उसको शुरू करते है।

कामचोर उद्यमी (Drone Entrepreneur)

इस प्रकार के उद्यमी बहुत ही रुढ़िवादी (Conservative) सोच के होते है और ये अपने संगठन (Organization) में बदलाव लाना नही चाहते है।

वे अपने वर्तमान व्यवसाय के तरीके से खुश रहते हैं और अगर वे नुकसान झेल रहे हैं तो भी बदलना नहीं चाहते है।

उधमी की विशेषताएं (Characteristics of Entrepreneur in Hindi)

प्रत्येक उद्योगपति को उद्यमी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। अत: यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि उद्यमियों में क्या विशेषताएँ होनी आवश्यक हैं?

किस प्रकार अन्य उद्योगपतियों से उद्यमियों को पृथक् किया जा सकता है? किन विशिष्टताओं के आधार पर किसी को औद्योगिक उद्यमी माना जा सकता है?

उद्योग विभाग उद्यमी की मान्यता किन्हें प्रदान कर सकता है? उद्यमियों के लिये जिन विशेष सुविधाओं, रियायतों, छूट, अनुदानों इत्यादि का प्रावधान है।

वह किन व्यक्तियों को प्राप्त हो सकती हैं? एक उद्यमी के अनुसार वे लक्षण जो किसी व्यक्ति को उद्यमी की श्रेणी में लाते हैं।

इसके निम्नलिखित विशेषताएँ हैं।

  1. जोखिम वहनकर्ता (Risk Bearer)
  2. भव्यक्ति या व्यक्तियों का समूह (An Individual or Group of Individuals)
  3. मैवीन उपक्रम की स्थापना (Establishes New Undertakings)
  4. साधन प्रदान करने वाला (Provider of Resources)
  5. कार्य ही लक्ष्य एवं संतुष्टि (Work is Object and Satisfaction)
  6. अवसरों का विदोहन (Exploitation of Opportunities)
  7. नव-प्रवर्तनकर्ता (Innovator)
  8. आशावादी दृष्टिकोण (Optimistic Outlook)
  9. गतिशील प्रतिनिधि (Dynamic Agent)
  10. स्वतन्त्रता प्रेमी (Freedom Lovers)
  11. उच्च उपलब्धियाँ (High Achievers)
  12. पेशेवर प्रकृति (Professional Nature)
  13. विश्वासाश्रित सम्बन्ध (Fiduciary Relationship)
  14. पुँजीपति एवं विनियोजक से भिन्न (Different from Capitalist & Investors)
  15. नेतृत्वकर्ता (Leader)
  16. अनुसन्धान पर बल (Emphasis on Research)
  17. कार्य में पूर्ण समर्पित (Dedicated to their Job)
  18. प्रतिफल लाभ है (Profit is Reward)
  19. एक संस्था (An Institution)

जोखिम वहनकर्ता (Risk Bearer)

उद्यमी व्यक्ति सदैव जोखिमों में ही जीना पसन्द करते हैं। परन्तु इनके द्वारा लिए नए जोखिम सदैव सुविचारित होते हैं।

इस सम्बन्ध में लारेन्स लेमण्ट ने लिखा है कि, “जोखिम वहन के प्रति झुकाव ही उद्यमीय व्यक्तित्व का वास्तविक लक्षण है।”

व्यवसाय में निहित विभिन्न जोखिमों का उपयुक्त पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है।

इसलिए उद्यमी सदैव अपनी विवेकपूर्ण योजनाओं एवं ठोस निर्णयों से जोखिम का सामना करते हैं। परन्तु उद्यमी सदैव सामान्य जोखिम को ही प्राथमिकता देते हैं।

भव्यक्ति या व्यक्तियों का समूह (An Individual or Group of Individuals)

लघु अथवा छोटे व्यवसायों में एक व्यक्ति ही उद्यमी कहलाता है। जबकि बड़े-बड़े निगमों एवं कम्पनियों में केवल एक व्यक्ति इस भूमिका का निर्वहन नहीं कर सकता है।

इसलिए ऐसे व्यवसायों में कुछ समान विचारों वाले व्यक्तियों का समूह उद्यमी की भूमिका निभाता है।

मैवीन उपक्रम की स्थापना (Establishes New Undertakings)

उत्पादन एवं वितरण का कार्य विकासशील राष्ट्रों में अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है।

क्योंकि वहाँ उत्पादन सीमित होता है। ऐसी परिस्थितियों में उद्यमी केवल साधनों का एकीकरण ही नहीं करता है।

बल्कि नए उपक्रमों की स्थापना भी करता है तथा औद्योगिक क्रियाओं को विस्तृत रूप प्रदान करता है।

साधन प्रदान करने वाला (Provider of Resources)

अविकसित राष्ट्रों में उत्पत्ति के साधनों का एकीकरण करना एक कठिन कार्य होता है।

परन्तु उद्यमी उपक्रम की स्थापना के लिए सभी आवश्यक साधनों की व्यवस्था करता है तथा आवश्यक सूचनाएँ एवं तकनीक भी उपलब्ध कराता है।

कुछ परिस्थितियों में उद्यमी स्वयं साधनयुक्त होता है।

किन्तु बड़े व्यवसायों की स्थापना के लिए उद्यमी सरकार व विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से साधनों की व्यवस्था करता है।

कार्य ही लक्ष्य एवं संतुष्टि (Work is Object and Satisfaction)

उद्यमियों के लिए उनका कार्य ही अपने आप में लक्ष्य एवं सन्तुष्टि का बड़ा स्रोत होता है। उद्यमी आत्म-सन्तुष्टि को अधिक प्राथमिक उद्देश्य मानते हैं।

जबकि मौद्रिक लाभों को गौण मानते हैं। इसलिए कहा जाता है कि “उद्यमियों के लिये कार्य ही उनकी प्रेरणा एवं पूँजी होती है।”

अवसरों का विदोहन (Exploitation of Opportunities)

उद्यमी के अन्दर सदैव एक सृजनात्मक असन्तोष’ (Creative dissatisfaction) छिपा रहता है।

जिसके द्वारा वह नए-नए व्यावसायिक अवसरों की खोज करता है तथा उनका विदोहन करके लाभ अर्जित करता है।

उद्यमी चुनौतियों को अवसरों की भाँति स्वीकार करता है।

नव-प्रवर्तनकर्ता (Innovator)

उद्यमी अपने उपक्रमों में सदैव नवीन परिवर्तनों एवं सुधारों को जन्म देते हैं।

उद्यमी नई वस्तु, नई उत्पादन विधि, नए यन्त्र, नए कच्चे माल तथा नए बाजारों की खोज करते हैं।

नव-प्रवर्तन से सम्बन्धित शुम्पीटर द्वारा प्रतिपादित दृष्टिकोण को निम्न ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।

आशावादी दृष्टिकोण (Optimistic Outlook)

उद्यमी व्यक्तियों का दृष्टिकोण सदैव आशावादी होता है।

यह अपने कार्य को भाग्य पर छोड़ने के बजाय अपने श्रम व नीति से सफलता प्राप्त करने में विश्वास करता है।

यह अपने मार्ग में आने वाली बाधाओं से विचलित नहीं होता है और सब कुछ गँवाने के बाद भी आशा नहीं छोड़ता है।

यही आशावादी दृष्टिकोण उसके व्यावसायिक उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होता है।

गतिशील प्रतिनिधि (Dynamic Agent)

किसी भी राष्ट्र के विकास का मापन वहाँ के उद्यमियों की सफलता पर निर्भर करता है।

क्योंकि उद्यमी ही वह व्यक्ति होता है जो अपने ज्ञान एवं नीतियों के द्वारा व्यवसाय में सफल परिवर्तन करके सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को गतिशील बना देता है।

क्योंकि उद्यमियों के अभाव में उत्पादन के साधन केवल साधन ही बने रहते हैं। उनसे उपयोग की वस्तुओं का सृजन नहीं हो पाता है।

शुम्पीटर ने कहा है कि, “उद्यमी का कार्य सृजनात्मक विनाश करना है।” क्योंकि वह पुरानी वस्तुओं (उत्पादक वस्तुओं) का विनाश करके नई वस्तुओं की रचना करता है।

स्वतन्त्रता प्रेमी (Freedom Lovers)

उद्यमी व्यक्तियों का स्वभाव स्वतन्त्र प्रकृति का होता है। वे प्रत्येक कार्य को अपने ढंग से करने में ज्यादा विश्वास रखते हैं।

साहसिक कार्यों को करने में ज्यादा तत्परता दिखाते हैं। उनमें पहल करने का गुण सदैव विद्यमान रहता है। इसलिए उनको स्वतन्त्रता प्रेमी कहा जाता है।

उच्च उपलब्धियाँ (High Achievers)

उद्यमी सदैव कुछ असम्भव प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं तथा समाज में अलग पहचान बनाना चाहते हैं।

इसलिए उद्यमी सदैव कठोर परिश्रम एवं दृढ़ संकल्प के द्वारा उच्च प्राप्तियों में विश्वास रखते हैं।

प्रबन्धक साहसी (Managerial Entrepreneur)

बड़े उपक्रमों में उद्यमी एवं प्रबन्धक अलग-अलग होते हैं।

कभी-कभी प्रवर्तक उद्यमी संचालक मण्डल के सदस्य बनकर उच्च प्रबन्धक के रूप में भी कार्य करते हैं।

आधनिक व्यवसाय में ‘बहु उद्यमी’, ‘संयुक्त उद्यमी’ व समूह उद्यमी’ की धारणा महत्वपूर्ण होती जा रही है।

पेशेवर प्रकृति (Professional Nature)

प्राचीन समय की यह मान्यता कि ‘उद्यमी बनाए नहीं जाते हैं। बल्कि जन्म लेते हैं। वर्तमान में गलत सिद्ध हो चुकी है।

क्योंकि अब यह सिद्ध हो चुका है कि उद्यमी पैदा नहीं होते हैं।

बल्कि व्यावसायिक ज्ञान, प्रशिक्षण सुविधाओं एवं अन्य प्रेरणाओं के द्वारा उन्हें पेशेवर बनाया जाता है।

वर्तमान में कई संस्थाएँ इस कार्य को कर रही हैं।

‘पशेवर बनाए जाते हैं’ के सम्बन्ध में अमेरिकन सोसायटी ऑफ मैनेजमेंट के चेयरमैन ने कहा है की “हम कोई वास्तु नहीं बनाते है।

हम पेशेवर तैयार करते है और पेशेवर वास्तु बनाते है।

विश्वासाश्रित सम्बन्ध (Fiduciary Relationship)

वर्तमान युग में उद्यमी समाज के संसाधनों के प्रन्यासी (Trustees) होते हैं।

आधुनिक युग निगम संस्कृति (Corporate Culture) का युग है।

जिसके तहत उद्यमी बड़ी-बड़ी कम्पनियों व निगमों की स्थापना करते हैं।

ट्रस्टीशिप के सिद्धान्त के आधार पर इनका संचालन करते हैं।

अत: उद्यमी के न केवल उपक्रम बल्कि सम्पूर्ण समाज के साथ विश्वासाश्रित सम्बन्ध स्थापित हो जाते हैं।

पुँजीपति एवं विनियोजक से भिन्न (Different from Capitalist & Investors)

उद्यमी पूंजीपति एवं विनियोजक से भिन्न होता है। यद्यपि पूँजीपति एवं विनियोजक उस व्यक्ति को माना जाता है।

जो व्यवसाय के लिए पूँजी की व्यवस्था करता है व उसमें निवेश करता है।

पूँजीपति व विनियोजकों का एक मुख्य उद्देश्य लाभ के साथ-साथ सामाजिक एवं अन्य उद्देश्यों को पूरा करना है।

अत: पूँजीपति व विनियोजकों को उद्यमी से अलग माना गया है।

इस सम्बन्ध में पीटर एफ. ड्रकर (Peter F. Drucker) ने कहा है कि “उद्यमी विनियोजक नहीं होता है।

यद्यपि हो सकता है किन्तु यह अक्सर कर्मचारी होता है अथवा वह अकेला तथा पूर्णत: स्वयं ही कार्य करता है।”

नेतृत्वकर्ता (Leader)

उद्यमी व्यावसायिक जगत् का अग्रगामी होता है। यह केवल व्यवसाय एवं उद्योग को नेतृत्व प्रदान करने के साथ-साथ समाज को भी एक गतिशील दिशा प्रदान करता है।

यह समाज में व्यक्तियों की आवश्यकताओं का पता लगाकर एवं उसके अनुरूप उत्पादन करके उद्योग, व्यवसाय व अर्थव्यवस्था को विकास के पथ पर गति प्रदान करता है।

अनुसन्धान पर बल (Emphasis on Research)

आधुनिक उद्यमियों की कार्यशैली परम्परागत विधियों को छोड़कर तथ्यों व सूचनाओं पर आधारित होती है।

आधुनिक उद्यमी वैज्ञानिक शोध एवं अनुसन्धान पर बल देते हैं एवं सदैव प्रयोग व परिवर्तन में विश्वास करते हैं।

वर्तमान में उद्यमियों की कार्य प्रणाली वैज्ञानिक एवं तर्कसंगत है।

कार्य में पूर्ण समर्पित (Dedicated to their Job)

उद्यमी अपने कार्य के प्रति सदैव पूर्ण समर्पित रहते हैं। उद्यमी में अपने लक्ष्य के प्रति तन्मयता, एकाग्रता एवं वचन बद्धता होती है।

उद्यमी चुपचाप बिना विचलित हुए सदैव अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते हैं।

प्रतिफल लाभ है (Profit is Reward)

सामान्यत: उद्यमी लाभ की आशा में ही कार्य करता है। परन्तु आधुनिक युग में अमौद्रिक प्रेरणाओं की दृष्टि से भी कार्य करते हैं।

उद्यमी को अपनी विभिन्न प्रकार की सेवाओं के फलस्वरूप लाभ के रूप में प्रतिफल प्राप्त होता है, जो सदैव अनिश्चित एवं जोखिम से परिपूर्ण होता है।

एक संस्था (An Institution)

उद्यमी स्वयं में एक संस्था है, क्योंकि यह विभिन्न संस्थाओं को जन्म देता है। आज विकासशील देशों में अनेक संस्थाएँ उद्यमी के रूप में कार्य कर रही हैं।

यहाँ तक कि सरकार स्वयं एक उद्यमी बनकर राष्ट्र के औद्योगिक विकास में योगदान करती है।

उधमी के गुण (Qualities of Entrepreneur in Hindi)

  1. सुविचार जोखिम उठाता है।
  2. आत्मविश्वास
  3. संवाद कौशल
  4. नवाचारी
  5. लक्ष्य प्राप्ति की प्रतिबद्धता
  6. कुछ नया सीखने और करने के इच्छुक
  7. ईमानदारी और समर्पण की भावना
  8. सदैव लाभ का इच्छुक
  9. सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना
  10. अपनी सफलता का श्रेय पूरी टीम को देना
  11. दूरदर्शिता एवं अनुकूलनशीलता
  12. सकारात्मक दृष्टिकोण
  13. अपनी सफलता का श्रेय पूरी टीम को देना
  14. संवाद कौशल एवं विचारों में स्पष्टता

सुविचार जोखिम उठाता है। (Consideration Takes Risks)

कभी-कभी व्यवसाय को बढ़ने के लिए कुछ जोखिम भरे निर्णय लेने पड़ते हैं। जो भविष्य में सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

ऐसे में उद्यमी को पूरी तरह सोच विचार कर ही कोई भी जोखिम उठाना चाहिए।

आत्मविश्वास (Self-Confidence)

किसी भी नए उद्यमी के लिए आत्मविश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। पहले इनको अपनी क्षमताओं का भी ज्ञान होना चाहिए।

इसके बाद, प्रयास और सफलता पाना मायने रखती है।

याद रखना चाहिए कि अति आत्मविश्वास और जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अपनी क्षमता से बढ़ कर प्रतिबद्धता दिखाने के भी विपरीत परिणाम सामने आते हैं।

इसलिए एक सोच के साथ भविष्य के लिए योजना बनाना, किसी भी किस्म की आकस्मिकता को ध्यान में रखना, अलग-अलग माध्यमों से फीडबैक लेना।

सफलता प्राप्ति के लिए अंधी दौड़ से बचना जरूरी होता है।

संवाद कौशल (Communication Skills)

किसी भी बिज़नेस का सफ़लतापूर्वक संचालन करने के लिए अच्छा संवाद कौशल (Communication Skill) का होना जरूरी है।

साथ ही एक उद्यमी के विचारों में स्पष्टता होनी चाहिये। ताकि वह अपनी बात को ठीक तरह दूसरों के समक्ष प्रस्तुत कर सके।

इससे अच्छे व्यापारिक संबंध बनाने में मदद मिलती है। साथ ही अपने साथी सदस्यों और सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने में आसानी भी होती है।

दूरदर्शिता एवं अनुकूलनशीलता (Vision & Adaptability)

एक सफल उद्यमी वर्तमान समय के साथ ही भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है।

वह बदलते वक़्त के साथ उपभोक्ताओं की जरूरतों और उनकी रुचि में होने वाले परिवर्तनों पर ग़ौर करता है।

उसके अनुसार योजना बनाकर काम करता है। भारत के मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी इसका जीता जागता उदाहरण हैं।

उनके द्वारा स्थापित ‘रिलायंस जियो’ (Reliance Jio) की अपार सफलता से हर कोई परिचित है।

यह उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम है। जियो ने आज करोड़ों ग्राहकों का दिल जीतकर टेलीकॉम सेक्टर में अपनी एक अलग पहचान कायम की है।

सकारात्मक दृष्टिकोण (Positive Mindset)

सफल उद्यमी हमेशा आशावादी सोच के साथ काम करते हैं। ऐसे उद्यमी किसी भी स्थिति का सामना करने को तैयार रहते हैं।

इतना ही नहीं अपने सकारात्मक दृष्टिकोण के बलबूते वे हर असंभव दिखने वाले काम को संभव करने का कोई न कोई रास्ता खोजने का दम भी रखते हैं।

हर समय कुछ नया सीखने और करने के इच्छुक (Continuous Improvement)

एक व्यवसाय को सफल बनाने के लिए समय-समय पर कुछ नया सीखते रहना जरूरी है। इसलिए किसी भी उद्यमी को हर समय कुछ नया सीखते रहना चाहिए।

समय के साथ परिवर्तन को स्वीकार कर उसके अनुसार अपने उद्यम को आगे बढ़ाना चाहिए।

साथ ही अपने उद्यम के विकास को गतिशील बनाये रखने के लिये नए-नए व्यावसायिक अवसरों की खोज करते रहना भी जरूरी है।

ईमानदारी और समर्पण की भावना (Integrity & Commitment)

एक सफल उद्यमी अपने कार्य के प्रति पूरी तरह ईमानदार और समर्पित होता है।

उसका यह गुण उसे हर बाधा को पार करके अपने व्यवसाय को सफल बनाने के लिए प्रेरित करता है।

जैसे – ‘रिलायंस कम्पनी’ के संस्थापक “स्व. धीरूभाई अंबानी” उद्योग जगत का एक जाना-माना नाम हैं।

सालों पहले उन्होंने एक छोटे से व्यवसाय की शुरुआत की थी।

उसे अपने समर्पण भाव से इस तरह आगे बढ़ाया कि उसकी सफलता आज लाखों उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गया है।

लक्ष्य प्राप्ति की प्रतिबद्धता (Determined To Win)

उद्यमी को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दृढ़ निश्चयी होना चाहिए। उद्यमिता की राह में कई बार बहुत सी ऐसी बाधायें आ जाती हैं।

जो उद्यमी का मनोबल कम करके उसे पीछे हटने को मजबूर कर देती हैं।

ऐसी स्थिति में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति प्रतिबद्धता ही उद्यमी का मनोबल बनती है।

उसे हालात का डटकर सामना करने का साहस प्रदान करती है।

अपनी सफलता का श्रेय पूरी टीम को देना (Inclusive Leadership)

कोई भी उद्यम तभी सफल होता है। जब उससे जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति उसके विकास में अपना सौ प्रतिशत योगदान देता है।

इसलिए सफल उद्यमी अपनी सफलता का श्रेय अकेले नहीं लेते बल्कि उसका श्रेय वे अपनी पूरी टीम को देते हैं।

उधमी की अवधारणा (Concept of Entrepreneur in Hindi)

  • जोखिम उठाने वाला
  • उद्योग का कप्तान
  • संगठन एवं समन्वयकर्ता
  • नवप्रचारक
  • क्रियात्मक
  • पेशेवर
  • दूरदृष्टि

जोखिम उठाने वाला

उद्यमियों जोखिम लेने वाले अनिश्चितता के भविष्य में गहराई से आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन सभी जोखिम लेने वाले एक सफल उद्यमी नहीं होते हैं।

जोखिम का मूल्यांकन करते समय, एक सफल उद्यमी खुद से पूछेगा, यह जोखिम मेरे कैरियर, समय और धन की लागत के बराबर है?

अगर यह उद्यम बंद नहीं करेगा तो मैं क्या करूँगा?

उद्योग का कप्तान

एक उधमी अपने उद्योग का अपना कप्तान होता है। वह अपने अनुसार अपने उद्योग को चलता है।

वह ना ही किसी के अन्दर कम करता है और ना ही किसी का ऑडर मानता है।

वह अपने व्यवसाय में अपना सिर्फ अपना ऑडर मानता है। वह अपना आईडिया, समय और पैसा लगा देता है।

संगठन एवं समन्वयकर्ता

किसी संस्था या संगठन के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसकी विभिन्न क्रियाओं में सांमजस्य व तालमेल स्थापित करना ‘समन्वय’ कहलाता है।

पेशेवर

पेशेवर किसी व्यवसाय का एक ऐसा सदस्य होता है जिसे विशिष्ट शैक्षणिक प्रशिक्षण के आधार पर चुना जाता है।

जो कि अपनी बुद्धि का उपयोग कर आय कमाते है।

जैसे-डॉक्टर,इंजीनियर,चार्टर्ड एकाउण्टेण्ट, वकील आदि। ये व्यक्ति अपनी सेवा प्रदान कर आय कमाते है।

उद्यमी के कार्य (Functions of Entrepreneur in Hindi)

  1. उद्यमशील कार्य (Entrepreneurial Functions)
  2. प्रबंधकीय कार्य (Managerial Functions)
  3. प्रचार के कार्य (Promotional Functions)
  4. वाणिज्यिक कार्य (Commercial Functions)
  5. वित्तीय कार्य (Financial Functions)
  6. सामाजिक कार्य (social Functions)

उद्यमशील कार्य (Entrepreneurial Functions in Hindi)

उद्यमशील कार्य (Entrepreneurial Functions in Hindi)
उद्यमशील कार्य (Entrepreneurial Functions in Hindi)

एक व्यवसाय शुरू करने और सुचारू रूप से उसे विकसित करने के लिए एक उद्यमी के लिए निम्नलिखित कार्य है।

  1. जोखिम उठाना (Take Risks)
  2. आयोजन करना (To Organize)
  3. नवाचार (Innovation)
  4. निर्णय लेना (To Decide)
  5. संगठन निर्माण (Organization Building)

जोखिम उठाना (Take Risks)

एक व्यक्ति जो की छोटा सा व्यवसाय करने जाता है।

तो उस व्यक्ति ने अपने व्यवसाय से शीघ्र ही लाभ पाने के लिए अपने धन का निवेश करता है।

उस व्यक्ति के लिए वह धन निवेश करना एक जोखिम भरा होता है।

दुनिया में कोई भी व्यापारी हो चाहे वह बड़ा या छोटा व्यपारी हो उसे अपने व्यवसाय के लिए तो जोखिम उठाना ही पड़ता है।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि एक सफल उद्यमी जोखिम लेने में विश्वास नहीं करते है। क्योंकि उनके लिए यह कभी जोखिम नहीं रहा।

उनके लिए, यह केवल एक गणना और अच्छी तरह से नियोजित चुनौती है। जिससे वे दुगुना लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

नवाचार (Innovation)

मौजूदा बाजारों में नवाचार और पूरी तरह से नए उत्पादों, सेवाओं और यहां तक ​​कि नए बाजारों के आविष्कार के लिए उद्यमी अत्यधिक जिम्मेदार हैं।

नवाचार का उद्देश्य लगातार नए उत्पादों, अधिक उत्पादक तकनीकों, कुशल प्रक्रियाओं और लचीले व्यापार मॉडल के माध्यम से एक संगठन विकसित करना है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नवाचार प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करके बाजार में एकाधिकार बनाने में मदद करता है।

निर्णय लेना (To Decide)

एक उद्यमी का निर्णय लेने का कार्य सभी प्रबंधकीय कार्यों के बीच सबसे समझदार कार्य है।

एक सफल उद्यमी के सबसे महत्वपूर्ण लक्षणों में से एक निर्णय लेने में सक्षम होना है।

संगठन निर्माण (Organization Building)

एक सफल व्यवसाय के निर्माण में उद्यमी मुख्य भूमिका निभाते हैं। लेकिन एक संगठन का निर्माण एक मौका द्वारा नहीं बनाया जाता है।

व्यापार में व्यापक उपलब्धि एक लंबी दौड़ को साकार करने के द्वारा पूरी की जाती है।

एक दृष्टिकोण सिखाया जाता है जो ग्राहक केंद्रितता, निरंतर विकास और प्रतिभा की प्रवृत्ति को आगे बढ़ाता है।

प्रबंधकीय कार्य (Managerial Functions in Hindi)

प्रबंधकीय कार्य (Managerial Functions in Hindi)
प्रबंधकीय कार्य (Managerial Functions in Hindi)

एक उद्यमी के प्रबंधकीय कार्य एक प्रबंधक की नौकरी के वर्गीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रबंधकीय कार्य 8 भागों में विभाजित हैं।

  1. योजना (Plan)
  2. आयोजन (Events)
  3. स्टाफिंग (Staffing)
  4. निर्देशन (Direction)
  5. नियंत्रण (Control)
  6. अग्रणी (Leading)
  7. पर्यवेक्षण (Supervision)
  8. समन्वय (Coordination)

योजना (Plan)

योजना एक उद्यमी के प्रबंधकीय कार्य का पहला चरण है। यह पूर्वनिर्धारित रणनीतिक सोच प्रक्रिया है।

जिसमें वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई के पाठ्यक्रम का चयन शामिल होता है।

योजना एक उद्यमी को यह पता लगाने में मदद करती है कि उद्देश्य की सिद्धि के लिए क्या किया जाना चाहिए।

आयोजन (Events)

आयोजन उद्यमी की गतिविधियों को वर्गीकृत करने और उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए उनके बीच प्राधिकरण (Authority) संबंधों को स्थापित करने की प्रक्रिया है।

यह कैसे एक उद्यमी के आयोजन समारोह कंपनी के लिए एक मजबूत नींव बनाता है।

स्टाफिंग (Staffing)

स्टाफिंग किसी भी संगठन की प्रस्तावक (Proponent) के रूप में जाना जाता है। स्टाफिंग का महत्व बहुत व्यापक है क्योंकि यह सही व्यक्ति को सही जगह पर रखने में मदद करता है।

निर्देशन (Direction)

निर्देशन वह प्रक्रिया है। जहां उद्यमी संगठनात्मक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए श्रमिकों या कर्मचारियों के प्रदर्शन का मार्गदर्शन, निर्देशन और देख रेख करते हैं।

यह एक ऐसा कार्य है जो अन्य प्रबंधकीय कार्यों को महत्व प्रदान करता है।

क्योंकि बिना किसी सुव्यवस्थित योजना के उचित निर्देशन के बिना और प्रभावी जनशक्ति अपने फ़्लैश खो जाएगी।

नियंत्रण (Control)

नियंत्रण पहचानने की प्रक्रिया है कि क्या संगठन सही दिशा में और योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है।

यह आश्वासन देता है कि पूर्व निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए संगठनात्मक संसाधनों का सफल और कुशल उपयोग हो रहा है की नहीं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नियंत्रित करना एक विधिगत गतिविधि है। जो नियोजित प्रदर्शन से वास्तविक प्रदर्शन के विचलन को मापता है।

प्रचार के कार्य (Promotional Functions in Hindi)

प्रचार के कार्य (Promotional Functions in Hindi)
प्रचार के कार्य (Promotional Functions in Hindi)

एक उधमी के व्यवसाय करने में प्रचार कार्य शामिल है। एक विचार की खोज, एक व्यवसाय योजना बनाना और उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यकता को इकट्ठा करना ही प्रचार है।

  1. एक आइडिया की खोज करना (Searching for an Idea)
  2. व्यवसाय योजना बनाना (Business Planning)
  3. आवश्यकताओं को इकट्ठा करना (Collect requirements)

एक आइडिया की खोज करना (Searching for an Idea)

एक उधमी को अपने व्यपार को व्यापक रूप में बड़ा करने और बाजार में अपना उत्पाद को बेचने के लिए नयी आईडिया के साथ बाजार में आना पड़ता है। जिससे लोग आपके उत्पाद को खरीदे।

व्यवसाय योजना बनाना (Business Planning)

व्यावसायिक योजना बनाना आपकी व्यावसायिक सफलता के लिए आवश्यक है। एक व्यवसाय योजना आपके व्यवसाय की भविष्य की गतिविधि का एक लिखित रूप है।

यह आपको बताएगा कि आपकी क्या योजना है और आप इसे कैसे करना चाहते हैं।

आवश्यकताओं को इकट्ठा करना (Collect requirements)

किसी भी परिणाम को देखने के लिए अपनी योजनाओं को निष्पादित करने के लिए आवश्यक संसाधन इकट्ठा करना आवश्यक है।

वाणिज्यिक कार्य (Commercial Functions in Hindi)

वाणिज्यिक कार्य (Commercial Functions in Hindi)
वाणिज्यिक कार्य (Commercial Functions in Hindi)

एक उद्यमी के वाणिज्यिक कार्यों में 4 खंड शामिल हैं।

  1. उत्पादन (Production)
  2. विपणन (Marketing)
  3. कार्मिक (Personnel)
  4. लेखा (Accounts)

उत्पादन (Production)

उत्पादन समारोह एक उद्यमी का प्राथमिक कार्य है। यह वस्तुओं या सेवाओं का विनिर्माण करता है। उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए निम्नलिखित रूप शामिल हैं।

  • विनिर्माण (Manufacturing)
  • गौण या समर्थन गतिविधि (Support Activity)
  • सलाहकार (Advisor)

विपणन (Marketing)

सरल शब्दों में कहे तो, विपणन एक उद्यम का पहिया है। विपणन अपने वास्तविक ग्राहक या उपभोक्ता को उत्पादों या सेवाओं को वितरित करने की गतिविधि है।

विपणन का मुख्य उद्देश्य ग्राहक को उनकी मांग की पहचान करके मूल्य प्रदान करना है।

एक कंपनी अपने उत्पादों और सेवाओं की खरीद और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए एक गतिविधि के रूप में विपणन का उपयोग करता है।

कार्मिक (Personnel)

किसी भी उद्यम की सफलता पूरी तरह से उसकी श्रमशक्ति पर निर्भर करती है। कार्मिक कार्य सभी लोगों के बारे में कार्य और संगठन के भीतर उनकी गतिविधि, संबंध और प्रतिबद्धता है।

लेखांकन (Accounts)

बिजनेस डिक्शनरी के अनुसार, लेखांकन वित्तीय जानकारी की पहचान, रिकॉर्डिंग (Recording), माप (Measurement), वर्गीकरण (Classification), सत्यापन (Verification), सारांश (Summary), व्याख्या (Explanation) और संचार (Communications) की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है।

लेखांकन प्रक्रिया में गतिविधियों की एक श्रृंखला शामिल है जो लेनदेन के साथ शुरू होती है और पुस्तकों के समापन के साथ समाप्त होती है। यह निम्नलिखित है।

  • लेन-देन की रिकॉर्डिंग।
  • लेन-देन का वर्गीकरण।
  • लेनदेन का सारांश।
  • फाइनल अकाउंट तैयार करें।
  • परिणामों का विश्लेषण और व्याख्या करना।

वित्तीय कार्य (Financial Functions in Hindi)

वित्तीय कार्य (Financial Functions in Hindi)
वित्तीय कार्य (Financial Functions in Hindi)

वित्तीय संसाधनों के नियंत्रण और नियोजन से संबंधित उद्यमी के वित्तीय कार्य इसमें शामिल है। जो इस प्रकार निम्नलिखित है।

  • वित्तीय योजना (Financial Planning)
  • धन जुटाना (Fund Raising)
  • धन का प्रबंधनन (Money Management)

वित्तीय योजना (Financial Planning)

किसी भी कंपनी की सफलता के लिए उद्यमी का वित्तीय नियोजन कार्य महत्वपूर्ण होता है।

यह व्यवसाय योजना को दृढ़ता प्रदान करता है। यह पुष्टि करके कि निर्धारित लक्ष्य प्राप्य हैं।

एक वित्तीय योजना प्रत्येक गतिविधियों, संसाधनों, उपकरणों और सामग्रियों का वर्णन करती है जो उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं।

उचित वित्तीय नियोजन में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं।

  • कारोबारी माहौल का मूल्यांकन करें।
  • व्यापार उद्देश्य और दृष्टि सुनिश्चित करें।
  • लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधनों के प्रकारों को पहचानें।
  • संसाधनों की लागत आदि की गणना करें।

धन जुटाना (Fund Raising)

पूँजी को किसी भी व्यवसाय के जीवनकाल के रूप में जाना जाता है। इस प्रकार, संगठन के लिए धन जुटाना एक उद्यमी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।

यह आपके व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और सबसे चुनौतीपूर्ण है।

पूंजी जुटाने के लिए 5 प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं।

  • आपके व्यवसाय को बूटस्ट्रैपिंग।
  • क्राउड फंडिंग।
  • एंजेल निवेशक प्राप्त करें।
  • वेंचर कैपिटलिस्ट लाओ।
  • बैंक ऋण के माध्यम से धन जुटाना।

धन का प्रबंधनन (Money Management)

लॉन्च होने के पहले कुछ वर्षों के भीतर लगभग 94% व्यवसाय विफल हो जाता है। पर्याप्त पैसा न होना इसके लिए सबसे सामान्य कारण बन जाता है।

धन प्रबंधन उचित बजट, खर्च पर नजर रखने और वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करने के माध्यम से आपके व्यवसाय की पूंजी के प्रबंधन की प्रक्रिया है।

पैसे का प्रबंधन करने में विफल रहने से आप देर से भुगतान कर सकते हैं और नकदी की कमी हो सकती है।

अपने खर्चों पर नजर रखने और अपने व्यवसाय के शीर्ष पर रहने के लिए, इन 6 युक्तियों का पालन करें। जो निम्नलिखित है।

  1. डेडलाइन बनाए रखें।
  2. ट्रैक खर्च।
  3. एक बजट बनाएं।
  4. सूची बनाओ।
  5. लागत में कटौती और राजस्व में वृद्धि।
  6. रिजर्व कैश है।

सामाजिक कार्य (Social Functions in Hindi)

सामाजिक कार्य (Social Functions in Hindi)
सामाजिक कार्य (Social Functions in Hindi)

एक उद्यमी के सामाजिक कार्यों का कंपनियों के विकास के साथ सीधा संबंध नहीं हो सकता है।

लेकिन यह विश्वास, प्रतिष्ठा और मजबूत ब्रांड वैल्यू बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसलिए, सामाजिक गतिविधियों के महत्व को किसी भी सूरत में नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।

सामाजिक कार्य सभी संभावित समुदाय-आधारित समस्याओं को हल करने के बारे में हैं।

इसमें समस्याओं को ठीक करना और नौकरियों और सामुदायिक विकास को शामिल करना शामिल है।

इन दो तरीको पर ध्यान दे। जो निम्नलिखित है।

  • समस्याओं को ठीक करें और नौकरियां बनाएं (Fix Problems and Create Jobs)
  • सामुदायिक विकास (Community Development)

समस्याओं को ठीक करें और नौकरियां बनाएं (Fix Problems and Create Jobs)

विशेष रूप से सामाजिक उद्यमी, समाज में समस्याओं को हल करने के लिए उत्सुक होते हैं। उनके भीतर एक महान आग्रह है।

जो उन्हें समाज और उसकी संस्कृति के सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की ओर ले जाता है।

इन समस्याओं को संबोधित करने की प्रक्रिया में, उद्यमी समाज में परिवर्तन लाने और विकसित करने के लिए व्यवसायों का निर्माण करते हैं।

जैसा कि व्यवसाय बनाया गया है। यह लोगों को नौकरी करने और उनके जीवन स्तर में सुधार करने का अवसर प्रदान करता है।

यह उन्हें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवित रहने के लिए सिखाता है।

सामुदायिक विकास (Community Development)

चाहे आप स्थानीय संबंधों के बिना एक वेब-आधारित कंपनी हों या एक पड़ोस में एक छोटे व्यवसाय के मालिक हो।

आप कई तरीकों से स्थानीय समुदायों में योगदान करने का नेतृत्व कर सकते हैं।

अपने समुदाय के साथ जुड़े रहने और संबंध बनाने के लिए यहां कुछ प्रभावशाली तरीके दिए गए हैं।

  • स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देना।
  • स्थानीय समुदाय में योगदान दें।
  • एक बिजनेस मॉडल तैयार करें जो चैरिटी में वापस आए।
  • अन्य व्यवसायों के साथ सहयोग करें।

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप अपने उद्यमशीलता उद्यम के माध्यम से स्थानीय समुदाय से जुड़ सकते हैं।

गैर-लाभकारी और सामुदायिक संगठनों के लिए अपना समर्थन प्रदर्शित करना आपको अपना मूल्य बनाने में मदद कर सकता है।

उद्यमी का महत्वपूर्ण कौशल (Entrepreneur Important Skills in Hindi)

  • आपके पास लीडरशिप क्वालिटी होनी चाहिए।
  • आपके पास हर समस्या को हल करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • आत्मविश्वास (Self Confidence) होना चाहिए।
  • आपको असफल होने से डरना नहीं चाहिए।
  • आपको उस काम की पूरी जानकारी होनी चाहिए जो आप करने जा रहे हैं या करना चाहते हैं।
  • आपके पास लक्ष्य पाने की क्षमता होनी चाहिए।
  • आपका उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए कि आपको क्या करना है।
  • आपको सिर्फ और सिर्फ एक ही जगह पर फोकस करना चाहिए।
  • आपको समय-समय पर जोखिम (Risk) भी लेना चाहिए।
  • अपनी किस्मत (Luck) को ज्यादा महत्व न दें और अपनी मेहनत पर विश्वास करें।
  • आप जिस काम को करना चाहते हैं उस पर आपको पूरा विश्वास होना चाहिए।

इन्हें भी देखे –

निष्कर्ष (Conclusion)

मुझे उम्मीद है की “Entrepreneur क्या है? (What is Entrepreneur in Hindi)” पर यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा। अगर आपको “Entrepreneur क्या है?Udhmi Kya Hai” पर पोस्ट अच्छा लगा तो अपने दोस्तों और सोसल मीडिया पर शेयर जरुर करे।

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Karuna Tiwari is an Indian journalist, author, and entrepreneur. She regularly writes useful content on this blog. If you like her articles then you can share this blog on social media with your friends. If you see something that doesn't look right, contact us!

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