जनसंचार का परिभाषा, प्रकार और अर्थ क्या हैं? (जानिए हिंदी में)

आज हम जानेगे की जनसंचार का परिभाषा और अर्थ क्या हैं? (What is the Definition of Mass Communication and Meaning) जनसंचार के कितने प्रकार हैं? (How Many Types of Mass Communication) जनसंचार की अवधारणा क्या है? (What is the Concept of Mass Communication) जनसंचार माध्यम कितने हैं? (How Many are Mass Media) जनसंचार का स्वरूप कितने हैं?(How Many are the Types of Mass Communication) जनसंचार का परिभाषा, प्रकार और अर्थ क्या हैं (जानिए हिंदी में)

जनसंचार के कार्य क्या हैं? (What are the Functions of Mass Communication) जनसंचार के उद्देश्य क्या हैं? (What are the Aims of Mass Communication) जनसंचार के तत्व क्या-क्या हैं? (What are the Elements of Mass Communication) पारम्परिक जनसंचार (Traditional Mass Communication)

जनसंचार का अर्थ – (Meaning of Mass Communication in Hindi)

जनसंचार शब्द से ‘संस्कृति, बुद्धि तथा विवेक के भाव बोध होते हैं जिसका अभिप्रायः समुदाय से हैं इसकी प्रकृति विषम होती हैं इसका क्षेत्र, समूह, भीड़, तथा समुदाय से बडा होता हैं जन का अर्थ हैं ”जनता” यानि ”मास” (Mass) तथा संचार शब्द संस्कृत भाषा के ‘चर’ धातु से बना हैं।जिसका अर्थ हैं ‘चलना’। संचार का शाब्दिक अर्थ हैं ”साझेदारी में चलना”। ‘संचार तथा माध्यम’ ‘जन’ से जुड़कर ”जनसंचार” (Mass Communication) और ‘जन-माध्यम’ (Mass-Media) शब्द बने हैं। ‘मास कम्युनिकेशन’ और ‘मास मीडिया’ दोनों के रूप में प्रचलित ”जनसंचार” और ”जनमाध्यम” हैं।

जनसंचार का परिभाषा – (Definition of Mass Communication in Hindi)

  1. दि कम्युनिकेशन नामक पुस्तक के अनुसारवह असंख्य ढ़ंग जिससे मानवता से जुड़े रह सके। नृत्य या गायन द्वारा, मुद्रण या प्रेस द्वारा, नाटक या लोकनृत द्वारा, इशारो या अंग प्रदर्शन द्वारा, आँखों और कानो तक पहुचाना ही जनसंचार कहलाता हैं।
  2. जार्ज ए. मिलर के अनुसारजनसंचार वृकृति, विशाल, तथा विषम होता हैं लोगों तक एक साथ संदेश पहुचना हैं
  3. चार्लस एस. स्ट्रिबर के अनुसार जनसंचार का अर्थ है ”सुचना”। यानि एक स्थान से दुसरे स्थान तक सुचना पहुचना ही जनसंचार हैं।
  4. चार्लस आर. राइट के अनुसारजनसंचार एक ऐसा माध्यम हैं जो लोगों तक सुचना प्रक्रिया पहुचती हैं
  5. डॉक्टर अर्जुन तिवारी के अनुसारजन-जन तक व्यापक रूप में भावों के आदान-प्रदान करने की प्रक्रिया जनसंचार कहलाती हैं

कुछ उदाहरण द्वारा समझते हैं – जनसंचार

क. > स्वतंत्रता संघर्ष के समय महात्मा गाँधी एक बहुत अच्छे संचारक थे। जिनके भाषण से देश भर में एक अजीब सी ऊर्जा देखने को मिलती थी। जो जनता और नेताओं को स्वतंत्रता लड़ाई को लेकर प्रोत्शाहित करती थी। लोग इनके बातों से सहमत होते थे।

ख. > आज के समय में नरेंद्र मोदी बहुत अच्छे संचारक के रूप में उभर कर सामने आये हैं। जब ये अपने बातों को जनता के समकक्ष रखते हैं। तब पूरी जनता इनकी बातों का समर्थन करती हैं। पूरा देश इनके भाषण को सुनने के लिए टेलीविजन, रेडियो से चिपके रहते हैं। इनके रैलियों में हजारों लोग शामिल होते हैं। इनके भाषण को सुन कर पुरे देश में तालियों की गूंज सुनाई देती हैं।

जनसंचार का माध्यम – (Medium of Mass Communication in Hindi)

  • रेडियो , ऑडियो कैसेट,
  • टेलीविजन, विडियो कैसेट,
  • समाचारपत्र, पत्रिकाए व पुस्तक,
  • इंटरनेट,
  • सिनेमा

1 . रेडियो , ऑडियो कैसेटरेडियो जनसंचार का एक सशक्त माध्यम हैं। इसके द्वारा लोगो तक तुरंत सुचना या संदेश पहुचाया जाता हैं। इससे लोगो का मनोरंजन जैसेः फ़िल्मी गीत , नाटक, लोक गीत, प्रादेशिक गीत, साक्षात्कार आदि प्रसारित किया जाता हैं। महिलाओं के लिए भी मुख्य कार्यक्रम प्रसारित किया जाता हैं जैसेः मेरी शहेली, खाना खजाना आदि। ऑडियो कैसेट एक ऐसा माध्यम हैं जिसमे अपनी पसंद का सुचना या संदेश रिकार्ड कर हमेसा के लिए रख सकते हैं।

2. टेलीविजन, विडियो कैसेटटेलीविजन जनसंचार का एक महत्वपूर्ण और सशक्त माध्यम हैं। लोगों को जल्दी ही सुचना और संदेश मिल जाती हैं। इसके द्वारा लोगों को पल-पल की खबर मिलती रहती हैं। विडियो कैसेट द्वारा हर महत्वपूर्ण संदेश या सुचना का विडियो बना कर रख सकते हैं

3. समाचारपत्र, पत्रिकाए व पुस्तकसमाचारपत्र , पत्रिकाए व पुस्तक भी जनसंचार का एक माध्यम है

4. इंटरनेटपूरी दुनिया इंटरनेट पर आश्रित हैं। यह कहना गलत नही होगा की इंटरनेट जनसंचार का सबसे महत्वपूर्ण और सशक्त माध्यम बन गया हैं। अब कुछ भी जानना होता हैं तो लोग तुरंत इंटरनेट के द्वारा जान लेते हैं।
5. सिनेमाआज से ही नहीं बल्कि जब से सिनेमा आया हैं यह जनसंचार का सबसे सशक्त माध्यम बना हैं। क्योंकि सिनेमा द्वारा लोगो को सुचना दिया जाता हैं। जैसेः इंदु सरकार , तारे जमीं पर, परमाणु , राज़ी आदि।

जनसंचार के तत्व – (Elements of Mass Communication in Hindi)
  1. मास मीडिया (Mass Media) तकनीकी उपकरण, चैनल या जन संचार के संदेश संचारित करने के लिए प्रयोग किया जाता है
  2. संचरण मॉडल (Transmission Model)संचरण मॉडल वह होता हैं जो संदेश भेजने और प्राप्त करने या एक भाग (प्रेषक) से दूसरे (रिसीवर) में जानकारी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया है।
  3. प्रेषक (Sender)वह व्यक्ति जो दूसरों को जानकारी और विचारों को पारित करने के इरादे से संदेश व्यक्त करना चाहता है उसे प्रेषक या संवाददाता के रूप में जाना जाता है।
  4. रिसीवर (Receiver)रिसीवर वह व्यक्ति है जो संदेश प्राप्त करता है।
  5. फीडबैक (Feedback) जब प्रेषक अपनी बातो को रिसीवर को देता हैं और रिसीवर जब उसी विषय पर अपनी प्रतिक्रिया यानि फीडबैक देता हैं।

जनसंचार का कार्य एवं उदेश्य (Functions and Objectives of Mass Communication in Hindi)

  • सूचना देना
  • शिक्षित करना
  • मनोरंजन करना
  • निगरानी करना
  • एजेंडा तय करना
  • विचार-विमर्श के लिये मंच उपलब्ध कराना

जनसंचार की विशेषताएँ-(Features of Mass Communication in Hindi)

  • संचारक और प्राप्तकर्त्ता के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता।
  • जनसंचार के लिये एक औपाचारिक संगठन की आवश्यकता होती है।
  • इसके संदेश सार्वजनिक होती है।
  • इसमें फ़ीडबैक तुरंत प्राप्त नहीं होता हैं।
पारम्परिक जनसंचार (Traditional Mass Communication in Hindi)

भारत में परंपरागत जनसंचार 

पारम्परिक माध्यम गाव की संस्कृति का देंन हैं। जिसकी मौलिकता तथा विश्वसनीयता अटूट है।

परम्परागत जनसंचार निम्नलिखित हैं।

1 . कठपुतली : –  कठपुतली का खेल, गाँव-नगर, आमिर-गरीब, राजदरबार या धर्मस्थलों पर समान रूप से प्रदशित होते आ रहे हैं। आज सुविकसित परिवारों में गुड्डे की शादी रचायी जाती हैं। इन्ही खिलोनो द्वारा बच्चे नाना प्रकार की नाटकीय रूप देकर अपना मन बहलाते हैं। इन सब आकृतियों में कठपुतली का स्थान महत्वपूर्ण हैं।

कठपुतलियो के प्रदर्शन से निम्नलिखित कार्य होते हैं –

  1. मनोरंजन
  2. शिक्षा
  3. आत्म-प्रदर्शन
  4. समाजिक कार्य।

कठपुतलियाँ चार तरह की बनायीं जाती हैं –

(i) धगेवाली कठपुतली (String Puppet):- इसकी भुजाओं, पैरों और घुटनों में धागे जोड़े जाते हैं जिससे कठपुतली लचकदार होटी हैं। लकड़ी, कागज, तार, धागा, आदि से निर्मित कठपुतली धागों से लटकती रहती हैं। धागे कठपुतली के विविध अवयवों से जुड़ें रहते हैं। जिनका नियन्त्रण कलाकार द्वारा होता हैं।

(ii) छड़ी वाली कठपुतली (Rod Puppet):- इस प्रकार की कठपुतलियाँ पश्चिम बंगाल में प्रचलित हैं। जापान और यूरोप में इसका प्रचालन हैं। आकर में बड़ी कठपुतली छड़ों की सहायता से संचालित होती हैं।

(iii) द्स्तानेवाली कठपुतली (Glove Puppet):- व्यक्तियों के हाथों से गतिशील कठपुतलियाँ जीवन्तता से परिपूर्ण होती हैं। कठपुतली के सिर और उसके दो हाथ कलाकार के हाथों से संचालित होते हैं। तथा उसके हाथ कदों से ढके हुए रहते हैं। एक ही व्यक्ति दो पुतलियों को एक बार में नचा सकता हैं। एक उसके दायें हाथ पर और दूसरा उसके बाएं हाथ पर। संचालक अपनी आवाज बदलकर दो कठपुतलियों में वार्तालाप क्र्वस्कता हैं।

(iv) छाया कठपुतली (Shade PUppet):- यह कठपुतली चमड़े, प्लास्टिक या टिन से निर्मित होती हैं और इसकी एक छाया पर्दे पर पड़ती हैं। इस कठपुतली के अभिनय का नियंत्रण छड़ों द्वारा होता हैं।

2. लोक नाटक या रंगमंच:- सदियों से लोक रंगमंच विभिन्न संस्कृतियों में अलग-अलग रूपों में मनोरंजन का साधन रहा है। भारत में लोकमंच के अनेक स्वरूप मिलते हैं। लोक नाटकों में कहानी ज्यादातर पुराने मिथकों एवं किंवदंतियों से ली जाती थी। कलाकार कहानी कहने के लिए संवाद, संगीत तथा नृत्य तीनों कलाओं का इस्तेमाल करते थे। भारतीय संदर्भ में शास्त्रीय कलाओं और लोक कलाओं के बीच लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। लोक रंगमंच में भी शास्त्रीय रंगमंच की तरह विदूषक या सूत्रधार का प्रयोग होता रहा है। सूत्रधार एक ऐसा पात्र है जो बीते हुए कल को आज के साथ जोड़ता है। सूत्रधार दर्शक और अभिनेता के बीच कड़ी का काम करता है। सूत्रधार विविध लोकमंच शैलियों में विविध नामों से जाना जाता है।

3.  लोक कला :- सभी प्रकार की लोक चित्रकला इस श्रेणी में आती हैं। ग्रामीण समाज में महिलाएं घरों को लीपपोत कर सजाती हैं। बिहार की मधुबनी पेंटिंग इस संदर्भ में उल्लेखनीय हैं।

4. लोक गीत :- भारतीय समाज में जीवन के हर मौके के लिए गीत मौजूद है। जन्म, विवाह से लेकर मृत्यु के भी गीत गाये जाते हैं।

5. लोक कथा और लोक गाथा-:- कथा कहने और प्रवचन देने की भारत में लंबी परंपरा है। जो आज भी बड़े-बड़े गुरूओं के रूप में जारी हैं।

6. कीर्तन:- मंदिरों और घरों में भज और कीर्तन की शुरू से ही परम्परा हैं।

7नुक्कड़ नाटक:- नुक्कड़ नाटकों का जन्म अधिक पुराना नहीं है। दरअसल, बीसवीं सदी में अनेक जनसंगठनों ने लोक कलाओं की मदद लेकर नुक्कड़ नाटकों को लोकप्रिय बनाया। इसके माध्यम से लोगों में जागृत फैलाई जाती हैं।

7. नौटंकी:- त्तर भारत की लोक नाटय कला नौटंकी को खुले स्टेज पर मंचित किया जाता है। पौराणिक कहानियों पर आधारित नौटंकी की कथाएं एक सूत्रधार प्रस्तुत करता है। ढोलक तेज लय में नौटंकी कलाकार गाते भी हैं और नाचते भी हैं।

8. तमाशा:- तमाशा पूरी तरह एक मनोरंजक शैली है। इसमें महिला पात्र अपने पति या प्रेमी के गुणगान मे गीत गाती है। कलाकार अपनी बात गीत, वार्तालाप और नृत्य के मिलेजुले रूप में करते हैं।

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11 Comments

  1. Akash Tiwary 19/07/2018
  2. Rahul Sinha 24/07/2018
  3. Ritesh kumar 05/08/2018
  4. Ranjit Raj 10/08/2018
  5. Rohan kumar 25/08/2018
  6. Susmita Yadav 08/10/2018
  7. Suraj Prtap 25/10/2018
  8. Sunita 23/11/2018
  9. Dharmendra kumar gupta 08/12/2018

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