वीर सावरकर का जीवन परिचय (Veer Savarkar ka Jivan Parichay)

विषय-सूची

वीर सावरकर का जीवन परिचय (Biography of Veer Savarkar in Hindi)

वीर सावरकर का जीवन परिचय” सावरकर जी भारतीय इतिहास के नायक हैं।

स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में वो हमेशा सभी रास्तों में आगे रहते थे।

उन्होंने हिंदुओं के ठंडे खून को गर्म करने के लिए हथियारों का सहारा लिया।

“वीर सावरकर का जीवन परिचय (Veer Savarkar ka Jivan Parichay)”। एक जर्जरित समाज का आधुनिकीकरण करने के लिए ये किया था।

उसे एक वैज्ञानिक दिशा दी, रूढ़ियों से मुक्त करने के लिए छुआ-छूत से मुक्त करने का अभियान चलाया।

साहित्य एवं पत्रकारिता को आधार बना कर जन जागरूकता की लहर पैदा की।

इन सब से बढ़ कर हिन्दूओं को हिन्दुत्व के दर्शन कराके उन्हें जीने की शिक्षा दी।

साहसपूर्वक यह कहना सिखलाया कि “गर्व से कहो हम हिंदू हैं“।

वीर सावरकर का जीवन परिचय (Biography of Veer Savarkar in Hindi)
“वीर सावरकर का जीवन परिचय” एक जर्जरित समाज का आधुनिकीकरण करने के लिए ये किया था। उसे एक वैज्ञानिक दिशा दी, रूढ़ियों से मुक्त करने के लिए छुआ-छूत से मुक्त करने का अभियान चलाया। साहित्य एवं पत्रकारिता को आधार बना कर जन जागरूकता की लहर पैदा की। साहसपूर्वक यह कहना सिखलाया कि “गर्व से कहो हम हिंदू हैं।”

वीर सावरकर की जीवनी Veer Savarkar ki Jivani Hindi

वीर सावरकर का जीवन परिचय” आज हम “वीर सावरकर का जीवन परिचय” से सम्बन्धित उन तमाम सवालों को जानेंगे जो हमारे पाठको को आधा अधुरा ज्ञान मिलता है।

मै अपने पाठको को “वीर सावरकर” (Veer Savarkar in Hindi) के जीवन का वह अछूता अंग के बारे में जानकारी दूंगी।

जो आज तक वह “वीर सावरकर” (Veer Savarkar in Hindi) के बारे में गलत-गलत जानकरियो पर उन्हें आंक लेते है।

हमारे मन में हमेशा हर तरह का सवाल पैदा होते रहता है।

जैसे की “वीर सावरकर” (Veer Savarkar in Hindi) से जुडी सवाल- “वीर सावरकर का जीवन परिचय (Veer Savarkar ka Jivan Parichay)”, “वीर सावरकर कौन थे? (Veer Savarkar Kaun The)”, “वीर सावरकर का जन्म कब हुआ (Veer Savarkar ka Janm Kab Hua Tha)”, “वीर सावरकर के माता पिता का नाम (Veer Savarkar Parents Name in Hindi)”, “सावरकर का इतिहास (Veer Savarkar ka Itihas Hindi Mein)” ऐसे कितने सारे सवाल है जो आपको जानना अति आवश्यक है।

“वीर सावरकर के राजनीतिक विचार (Veer Savarkar’s Political Views in Hindi)”, “सावरकर माफीनामा पत्र (Savarkar Letter of Apology Letter in Hindi)”, “वीर सावरकर की कविता (Savarkar Poem in Hindi)”, “वीर सावरकर की मृत्यु कैसे हुई (Veer Savarkar Ki Maut Kaise Hui)”, “वीर सावरकर जयंती (Veer Savarkar Jayanti in Hindi)” आदि।

वीर सावरकर कौन थे? (Who was Veer Savarkar in Hindi)

“वीर सावरकर कौन थे? (Veer Savarkar Kaun The)” यह भारत माता के वीर सपूत थे।

यह भारत के शान थे और आज भी है और हमेशा रहेंगे। जिन पर भारत गर्व करता है।

तो चलिए जानते है की “वीर सावरकर कौन थे?”

वह व्यक्ति जो एक सैनिक, समाज सुधारक, दार्शनिक, साहित्यकार, पत्रकार, राष्ट्रवादी है।

जो पूरी तरह से हिंदू है – इतने सारे गुणों से सम्पन्न व्यक्ति का मूल्यांकन कठिन ही नहीं असम्भव लगता है।

वे जीवन में जीते या हारे इसका आकलन कर पाना बड़ा कठिन है।

जिस इन्सान ने जीवन भर ‘दिया ही दिया हो‘ उसका नाप-तोल भौतिक आधार पर भला कैसे हो सकता है?

“Veer Savarkar Kaun The” ऐसे व्यक्ति को इतिहास विजयी ही नहीं “दिग्विजयो” की संज्ञा देता है।

यदि किसी व्यक्ति की सफलता और असफलताओं पर हार और जीत की कसौटी को आंका जाता है।

तो संभवत: फिर इतिहास की धारा को मोड़ना होगा, घड़ी की सुइयों को उल्टा घुमाना होगा

विन्सटन चर्चिल कौन था?

विन्सटन चर्चिल, द्वितीय विश्वयुद्ध 1940-1945 के समय ‘इंगलैंड के प्रधानमंत्री‘ था।

चर्चिल प्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ और प्रखर वक्ता था। वो सेना में अधिकारी भी रह चुका था।

साथ ही वह इतिहासकार, लेखक और कलाकार भी था। वह इंगलैंड का एकमात्र ऐसा प्रधानमंत्री था।

जिसे ‘नोबेल पुरस्कार‘ से सम्मानित किया गया था।

“वीर सावरकर का जीवन परिचय” विन्सटन चर्चिल, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में इंग्लैंड को जीत लिया।

लेकिन वह आम चुनाव हार गए और उनकी पार्टी सरकार नहीं बना सकी।

यह भी पढ़े- आर्टिकल 370 क्या है? (Article 370 Kya Hai) – पूरी जानकारी हिंदी में।

तो क्या इसका मतलब यह है कि विन्सटन चर्चिल विफल रहे?

सिकंदर” भले ही युद्ध के मैदान में जीता हो, लेकिन इतिहास “पोरस” की असली जीत बताता है।

वे ईंटें जो दस हाथ पृथ्वी के नीचे दब गए। धन्य हैं वे ईंटें जो नींव की ईंटें बन जाती हैं।

क्योंकि कलश और मीनार उसी पर तो खुली हवा में सांस लेते हैं।

स्वतंत्रता सेनानी सावरकर (Veer Savarkar Kaun The) भारत के स्वतंत्रता संग्राम की वह नींव की ईंट है।

जिस पर 1920 के बाद एक इमारत खड़ा हो सका। जिस के कंधों पर चढ़ कर कोई राष्ट्रपिता बना और कोई लोकनायक कहलाया।

यदि यह ईंट गिरती है। तो स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास धुल में मिल जाना चाहिए।

सावरकर की अनन्त प्रासंगिकता भारतीय इतिहास में “वीर सावरकर” (Veer Savarkar) रहे, आज भी है और भविष्य में भी रहेंगे।

शायद ऐसे ‘हीरो‘ को ढूंढना मुश्किल है। अगर ‘सावरकर‘ ने हथियारों के बल पर क्षत्रिय बनकर अंग्रेजों को नहीं हराया होता।

तो इतिहास में “भगत सिंह” पैदा नहीं होते और इस देश में “आज़ाद हिंद फौज” की स्थापना नहीं होती।

तुम हमें खून दो हम तुम्हे आजादी देंगे” आजादी लेने की जिसने लालसा की उन सब के प्रणेता या जनक सावरकर ही हैं।

वीर सावरकर का इतिहास (History of Veer Savarkar in Hindi)

History of Veer Savarkar in Hindi
  • अपनी किशोरावस्था में, सावरकर ने एक युवा संगठन का गठन किया।
  • उस संगठन का नाम “मित्र मेला” रखा गया।
  • इस संगठन को राष्ट्रीय और क्रांतिकारी विचारों में लाने के लिए रखा गया था।
  • सावरकर विदेशी वस्तुओं के खिलाफ थे।
  • स्वदेशी के विचार का प्रचार करते थे।
  • 1905 में, उन्होंने दशहरे पर एक अलाव में सभी विदेशी सामानों को जला दिया।
  • अपनी पुस्तक “द हिस्ट्री ऑफ इंडियन इंडिपेंडेंस” सावरकर ने 1857 के सिपाही विद्रोह में इस्तेमाल किए।
  • छापामार युद्ध के गुर के बारे में लिखा है।
  • 2002 में अंडमान और निकोबार द्वीप पर “पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे” का नाम बदल दिया गया।
  • उसका नाम “वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा” रखा गया।
  • इंग्लैंड के राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से वीर सावरकर ने साफ मना कर दिया।
  • जिसके कारण उन्हें वकालत करने से रोक दिया गया।
  • सावरकर दुनिया के अकेले ऐसे इंसान थे, जिनको 2 बार आजीवन कारावास की सजा मिली।
  • जिसे सावरकर ने पूरा किया और उसके बाद राष्ट्र जीवन में सक्रिय हुए।
  • वीर सावरकर ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रध्वज के बीच धर्म चक्र लगाने का सुधाव दिया था।
  • जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार किया।

वीर सावरकर का जन्म कब हुआ (When was Veer Savarkar Born in Hindi)

“वीर सावरकर का जन्म कब हुआ (Veer Savarkar ka Janm Kab Hua Tha)” भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इस महान योद्धा का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले में उया था।

वहा के भगुर गाँव में सम्वत 1940 वैशाख कृष्ण 6 तदनुसार 28 मई 1883 में दिन सोमवार को रात्रि में 10 बजे जन्म हुआ।

इस महान योद्धा का पूरा नाम “विनायक दामोदर सावरकर” रखा गया।

इनको घर में “तात्याराव” के नाम से बुलाया जाता था। उस समय विनायक 1 बहिन एवं 3 भाई थे।

यह भी पढ़े- संचार क्या है? (What is Communication in Hindi) – जाने हिंदी में।

वीर सावरकर का परिवार (Veer Savarkar ka Parivar)

“वीर सावरकर का परिवार (Veer Savarkar ka Parivar)” में वीर सावरकर के बड़ें भाई का नाम “गणेश दामोदर सावरकर” एवं छोटे भाई का नाम “नारायण दामोदर सावरकर” था।

इनके भाइयों को घर में यानि “नारायण दामोदर सावरकर” का नाम ‘बालरव‘ था।

वही “गणेश दामोदर सावरकर” का नाम ‘बाबाराव‘ था। अब विनायक धीरे-धीरे बड़ा होने लगा।

देखते-देखते विनायक 6 साल का हो गए। इनके माता-पिता ने इन्हें गांव के एक स्कूल में पढ़ने के लिए नामांकन करा दिया।

वीर सावरकर को कौन सी कथा सुनना पसंद था?

सावरकर स्कुल से जब आते थे। तब घर पर माता-पिता उन्हें रामायण-महाभारत की कथा बड़े प्रेम से सुनाते थे और यह बड़े चाव से सुनते थे।

सूर्य महाराणा प्रताप एवं शिवाजी की शौर्य गाथायें सुनाते तो उसका बाल मन “मैं भी ऐसा ही वीर बनूँगा” के भाव उठाता था।

स्कूल में भी उनकी अनोखी बुद्धिमत्ता और अद्भुत देखा गया है। विनायक अपनी प्रतिभा के कारण सभी के स्नेह और नेता भी बन गए।

वीर सावरकर को माँ-बाप का साथ

1792 में, जब सावरकर की आय केवल 6 वर्ष थी। उनकी माता की महामारी से मृत्यु हो गई।

मां का अचानक मृत्यु होने के कारण इन सबके पालन पोषण का भार इनके पिता के कंधों पर आ पड़ा।

लेकिन इनके पिता ने घर के काम काज का बंटवारा इतनी निपुणता से किया कि बालकों को माँ की मृत्यु की कमी नहीं अखरी।

पिता ने कुलदेवी दुर्गा की पूजा करने का भार विनायक को दिया, जिसे वे बहुत लगन से करते थे।

इस काम का उनके जीवन में प्रेरक महत्व भी रहा है। माँ भगवती का आशीर्वाद उनके साथ हमेशा रहता था।

पाँचवीं कक्षा तक गाँव में अध्ययन करने के बाद, वह उच्च शिक्षा के लिए अपने बड़े भाई के साथ नासिक चले गए।

नासिक में विनायक अपनी समान आयु के छात्रों की एक मित्र-मंडली बनाकर उन्हें राष्ट्रीय गीतों एव विचारों से अवगत कराने लगे।

10 साल की उम्र से ही, उन्होंने मराठी में कविताएं लिखना शुरू कर दिया।

उन्हें पूना के प्रसिद्ध समाचार पत्रों में प्रकाशित करना शुरू कर दिया।

विनायक अपने साथियों के साथ ‘केसरी‘ जैसे राष्ट्रीय विचारों के समाचार पत्र माँगकर अपने सहयोगियों के साथ देश की स्थिति के बारे में सोचते थे।

इन दिनों अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध महाराष्ट्र में एक लहर दौड़ रही थी।

वीर सावरकर के माता पिता का नाम (Veer Savarkar parents Name in Hindi) – वीर सावरकर के माता का नाम “राधाबाई” था और पिता का नाम “श्री दामोदर सावरकर” था।

वीर सावरकर का विवाह (Veer Savarkar ka Vivah Kab Hua Tha)

वीर सावरकर का विवाह “यमुनाबाई” से हुआ था। इनकी शादी 1901 में हुआ था।

जब इनकी शादी हुई तो विनायक दामोदर की उम्र 14 साल की थी और यमुनाबाई की उम्र 11 साल की थी।

यमुनाबाई का जन्म महाराष्ट्र के जौहर राज्य में हुआ था। इनके पिता एक उच्च अधिकारी थे।

इनके पिता का नाम “श्री रामचन्द्र चिपलूणकर” था।

यह भी पढ़े- विज्ञापन क्या है? (What is Advertising in Hindi) – जाने हिंदी में।

यमुनाबाई को उनके पिता प्यार से “माई” कह कर बुलाते थे।

शादी के बाद तात्याराव (Veer Savarka) ने पूना के फर्ग्युसन कॉलेज से बी.ए. किया।

कुछ समय बाद कानून की पढ़ाई के लिए श्री तिलकजी ने मदद की और श्यामजी कृष्ण वर्मा की मदद से ‘शिवाजी छात्रवृत्ति‘ मिल गयी।

उस समय ‘माई’ की उम्र 14 साल की थी।

वीर सावरकर अद्वितीय और प्रथम थे। (Veer Savarkar Activity Kaise The)

  • स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर देशभक्ति के आरोप में कॉलेज से निकल दिया था।
  • यह पहले निकाले जाने वाले विश्व इतिहास के पहले छात्र थे।
  • वे राजनैतिक क्षितिज पर पहले नेता थे।
  • जिन्होंने 1905 में पूना में विदेशी कपड़ों की होली जलाई।
  • भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की।
  • वीर सावरकर (Veer Savarkar) पहले भारतीय छात्र थे।
  • जो इस उद्देश्य के साथ इंग्लैंड में पढ़ने गये।
  • कि वहाँ जाकर अंग्रेजों की अपनी ही भूमि पर भारत के स्वाधीनता की उचित मांग विश्व के सम्मुख रखी जा सके।
  • वहां भारतीयों को संगठित करने के साथ-साथ अंग्रेजों की पद्धति (Method) और ढंग का अध्ययन भी कर सकते हैं।
  • वीर सावरकर (Veer Savarkar) पहले भारतीय देशभक्त थे।
  • जिन्होंने 1858 के तथाकथित ‘गदर’ को 1858 के ‘आजादी की गर्मी’ के रूप में घोषित किया।
  • इसे तार्किक रूप से साबित करने वाले पहले भारतीय देशभक्त थे।
  • उन्होंने एक बड़ी तथ्यात्मक पुस्तक लिखी।
  • जिसे क्रांतिकारियों ने “भगवत गीता” के समान सम्मानित किया।
  • वह विश्व इतिहास में पहले लेखक थे।
  • जिनकी पुस्तक 1857 की स्वतंत्रता के समय दो सरकारों (इंग्लैंड और भारत) ने प्रकाशन और मुद्रण से पहले ही जब्त घोषित किया था।
  • वीर सावरकर (Veer Savarkar) विश्व इतिहास के पहले और शायद एकमात्र व्यक्ति थे।
  • जिन्हें एक देश से दूसरे देश में एक कैदी के रूप में भारी सुरक्षा के तहत ले जाया गया।
  • आप पहले राजनीतिक कैदी थे। जिन्होंने अंग्रेजों की तरह चालाक शक्ति को भी चकमा दिया
  • और जहाज की शौचालय की खिड़की से समुद्र में तैर गए और एक विदेशी भूमि (फ्रांस) में जा पहुंचे।
  • फ्रांस सरकार द्वारा उसके दायित्व को पूरा न किए जाने के कारण, प्रधानमंत्री को लोगों की मांग पर इस्तीफा देना पड़ा।
  • वीर सावरकर (Veer Savarkar) विश्व इतिहास के प्रथम राजनैतिक बन्दी थे।
  • द हेग (The Hague) नीदरलैण्ड के पश्चिमी भाग में स्थित है।
  • जिनका मुकदमा हेग (Hague) के अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में चला एवं जिसके निर्णय की विश्व भर में प्रतिक्रिया हुई।
  • वीर सावरकर पहले व्यक्ति थे। जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद भी राजनीतिक कारणों से ‘बैरिस्टर’ की उपाधि से वंचित किया गया।
  • वीर सावरकर पहले राजनैतिक कैदी थे।
  • जिन्हें एक साथ दो आजीवन कारावास (50 वर्ष) की सजा सुनाई गई थी।
  • लेकिन वह मृत्युञ्जयी (Death knight – स्वर्ग गमन शूरवीर) हो कर लौटे।
  • वीर सावरकर पहले व्यक्ति थे। जिनकी स्नातक की डिग्री भी राजनीतिक कारणों से बॉम्बे विश्वविद्यालय द्वारा रद्द कर दी गई थी।
  • वीर सावरकर दुनिया के पहले और एकमात्र कवि हैं।
  • जिन्होंने बिना कागज कलम के जेल की दीवारों पर पत्थर या कांटे से लिखकर महाकाव्यों को लिखा।
  • वीर सावरकर दुनिया के ऐसे अकेले एकमात्र साहसी व्यक्ति थे। जो खुद एकान्त कोठरी में बंद रहते थे।
  • जो खुद एकान्त कोठरी में बंद होने के बावजूद भी : स्वधर्म पर आघात होते हुए देख कर, न केवल अंडमान जैसे खूंखार जेल- में हिन्दुओं पर अत्याचारों को रोका।
  • इन्होने हिन्दुओं पर अत्याचार से किया जाने वाला धर्मान्तरण न केवल भविष्य के लिए रुकवाया।
  • बल्कि पिछले 15-20 वर्षों से भी धर्मान्तरित व्यक्तियों को स्वधर्म में लौटाया।
  • वीर सावरकर पहले राजनेता थे। जिन्होंने यह स्पष्ट घोषणा किया कि ‘हिन्दुत्व ही राष्ट्रीयत्व’ है और ‘धर्मान्तरण ही राष्ट्रांतरण’ है।
  • वीर सावरकर ही एकमात्र नेता थे। जिन्होंने स्पष्ट रूप से ‘राजनीति के हिन्दूकरण’ और ‘हिन्दुओं के सैनिकीकरण’ का मंत्र दिया।

वीर सावरकर का साहित्य रचना (Veer Savarkar ka Sahitya ka Itihas Hindi)

वीर सावरकर ने अपना आधा जीवन अंडमान की जेल में अपने देश की स्वतंत्रता के लिए व्यतीत किया था।

स्वतंत्रता-युद्ध के योद्धा के रूप में, स्वतंत्र लक्ष्मी की पूजा की, वही माँ सरस्वती की पूजा करने में पीछे नहीं रहे।

सावरकर जी ने कई हजारों लेख, कविताएँ, नाटक, उपन्यास, निबंध आदि लिखे।

ताकि भारतीय युवकों को युगों-युगों तक राष्ट्र-भक्ति या देशभक्ति की प्रेरणा मिलती रहे। लेकिन एक बात पर गौर करने वाली है।

जब सावरकर जी अंडमान की जेल में थे। तभी वह लेख, कविताएँ, नाटक, उपन्यास, निबंध, साहित्य आदि लिखे थे।

परन्तु उनके पास कोई कागज और कलम नही हुआ करते थे और वह जेल के दीवारों पर नुकीले पत्थर और नुकीले काँटों से रचना किये थे।

आप कल्पना भी नहीं कर सकते है की कितनी कठिनाई भरा वो दिन होगा। जिसमें उनके अन्दर देश-भक्ति की आग को तेज करती चली गई।

वीर सावरकर के साहित्यिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता (Veer Savarkar ke Sahityik Jivan in Hindi)

वीर सावरकर के साहित्यिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने साहित्य के हर हिस्से पर अपने लौह-लेखनी का सफल प्रयोग किया।

उन्होंने काव्य, महाकाव्य, खंड-काव्य, एकांकी, नाटक, उपन्यास आदि।

इन विषयों पर साहित्य और समाज के लिए सफल काम किए है।

उन्होंने मराठी में 4000 से अधिक रचना और अंग्रेजी में 1500 से अधिक रचना किये है।

वीर सावरकर ने बहुत कम उम्र में वीर-रस से भरी रचनाएँ लिखना शुरू कर दिया था।

उनकी कई शक्तिशाली कविताएँ बचपन में मराठी पत्रों में प्रकाशित हुई थीं।

लंदन जाने के बाद, वीर सावरकर ने भारतीय युवाओं को सशस्त्र क्रांति के दर्शन की शिक्षा देने के लिए 1858 का स्वतंत्रता समर ग्रन्थ’ लिखा।

इस ग्रन्थ को कई बार जब्त किया गया था। लन्दन में ही वीर सावरकर ने इटली के वीर योद्धा ‘मैझिनी का जीवन-चरित्र’ था।

न्होंने ‘सिखों का रोमांचक इतिहास’ भी लिखा था। जिसे तुरंत ब्रिटिश शासन ने जब्त कर लिया था।

उन्हें दो आजीवन कारावास की सजा देने के बाद, सावरकर को अंडमान भेज दिया गया।

यह भी पढ़े- जनसंचार का परिभाषा (Definition of Mass Communication in Hindi)

वीर सावरकर कोल्हू चलाने के बाद बचे समय में क्या करते थे?

उन्होंने अंडमान में भी कोल्हू चलाने के बाद बचे समय में साहित्य की आराधना करने लगे।

लेखन-सामग्री के अभाव में जेल की दीवार पर पत्थर के नुकीले टुकड़ों से उन्होंने काव्य लिखा।

उन्होंने अण्डमान में ही ‘कमला‘ और ‘गोमान्तक‘ नामक दो खण्ड-काव्य लिखे थे।

गोमांतक‘ में उन्होंने गोवा में पुर्तगाली ईसाई पादरियों द्वारा हिन्दुओं पर किये गए अत्याचारों का चित्र चित्रित को दर्शाया है।

देश के अनेक प्रसिद्ध कवियों ने मुक्त कण्ठ से ‘गोमान्तक‘ की प्रशंसा की है।

वीर सावरकर ने अंडमान के जेल जीवन पर आधारित ‘कालापानी‘ नामक एक सुंदर उपन्यास भी लिखा था।

‘कालापानी’ मराठी एवं हिन्दी में प्रकाशित हुआ है।

आततायी कृपाण‘ से “महार हरिजन जाति की एक वीर महिला” ने अपना धर्म व अपने सतीत्व की रक्षा की।

इस महिला के जीवन से प्रभावित हो कर ‘उःशाप‘ नामक नाटक लिखे थे।

संगीत संन्यस्त खड्ग‘ और ‘उत्तर क्रिया‘ ये दोनों नाटक भी उन्होंने लिखे थे।

बोधिसत्व‘ नाटक उनकी एक ऐसे रचना थी जो अधूरा ही रहा।

प्रभात प्रकाशन द्वारा मुद्रित दस खण्डों में उनकी पुस्तकों एवं निबन्धों को इस क्रम में प्रकाशित किया गया है

  1. प्रथम खंड– पूर्व पीठिका, भगूर, नाशिक शत्रु के शिविर में लंदन से लिखे पत्र।
  2. द्वितीय खंड– मेरा आजीवन कारावास, अण्डमान की कालकोठरी से, गांधी वध निवेदन, आत्महत्या या आत्मार्पण, अंतिम इच्छा पत्र।
  3. तृतीय खंड– काला पानी, मुझे उससे क्या? अर्थात् मोपला कांड, अंधश्रद्धा निर्मूलक कथाएँ।
  4. चतुर्थ खंड– उःशाप, नवम खंड, हिंदुत्व, बोधिवृक्ष, संन्यस्त खड्ग, उत्तरक्रिया, प्राचीन अर्वाचीन महिला, गरमागरम चिवड़ा, गांधी गोंधल।
  5. पंचम खंड– 1857 का स्वातंत्र्य समर, रणदुंदुभि, तेजस्वी तारे।
  6. षष्ट खंड– छह स्वर्णिम पृष्ठ, हिंदू पदपादशाही।
  7. सप्तम खंड– जातिभंजक निबंध, सामाजिक भाषण, विज्ञाननिष्ठ निबंध।
  8. अष्टम खंड– मैझिनी चरित्र, विदेश में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, क्षकिरणे, ऐतिहासिक निवेदन, अभिवन भारत संबंधी भाषण।
  9. नावम खंड- हिंदुत्व, हिंदुत्व का प्राण, हिंदुराष्ट्र दर्शन, नेपाली आंदोलन, लिपि सुधार आंदोलन।
  10. दशम खंड– कविताएँ, विविध लेख, भाषाशुद्धी लेख।

वीर सावरकर की कविता (Savarkar Poem in Hindi)

जो बरसों तक सड़े जेल में, उनकी याद करें।
जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें।
याद करें काला पानी को,
अंग्रेजों की मनमानी को,
कोल्हू में जुट तेल पेरते,
सावरकर से बलिदानी को।
याद करें बहरे शासन को,
बम से थर्राते आसन को,
भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू
के आत्मोत्सर्ग पावन को।
अन्यायी से लड़े,
दया की मत फरियाद करें।
उनकी याद करें।
बलिदानों की बेला आई,
लोकतंत्र दे रहा दुहाई,
स्वाभिमान से वही जियेगा,
जिससे कीमत गई चुकाई,
मुक्ति माँगती शक्ति संगठित,
युक्ति सुसंगत, भक्ति अकम्पित,
कृति तेजस्वी, घृति हिमगिरि-सी,
मुक्ति माँगती गति अप्रतिहत।
अंतिम विजय सुनिश्चित, पथ में,
क्यों अवसाद करें?
उनकी याद करें।

वीर सावरकर की मृत्यु कैसे हुई (Veer Savarkar Ki Maut Kaise Hui)

8 नवंबर 1963 को सावरकर की पत्नी यमुनाबाई का निधन हो गया।

1 फरवरी 1966 को, सावरकर ने दवा, भोजन और पानी का त्याग कर दिया।

जिसे उन्होंने आत्मारपन (मृत्यु तक उपवास) कहा।

अपनी मृत्यु से पहले, उन्होंने एक लेख लिखा था। जिसका शीर्षक था “आत्मारपन“।

जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि जब किसी का जीवन का मिशन समाप्त हो जाता है और समाज की सेवा करने की क्षमता नहीं रह जाती है।

तो जीवन को समाप्त करने के बजाय मौत का इंतजार करना बेहतर है।

26 फरवरी 1966 को बॉम्बे में, उनके निवास पर मृत्यु से पहले उनकी स्थिति को “बेहद गंभीर” बताया गया था, और वो साँस लेने में कठिनाई का सामना किये।

डॉक्टर उनका इलाज करने में विफल रहे। ठीक उसी दिन सुबह 11:10 बजे उनकी मृत्यु हो गई।

अपनी मृत्यु से पहले, सावरकर ने अपने रिश्तेदारों को केवल देखने की इच्छा प्रगत किया था।

उनका अंतिम संस्कार उनके बेटे “विश्वास” द्वारा अगले दिन बॉम्बे के सोनपुर इलाके में एक विद्युत शवदाह गृह में किया गया था।

उनकी अंतिम संस्कार हिन्दू धर्म के अनुसार किया गया। उनके दाह संस्कार में शामिल होने वाले भीड़ ने शोक व्यक्त किया था।

वीर सावरकर के परिवार में उनका एक बेटा “विश्वास” और एक बेटी “प्रभा चिपलूनकर” है।

उनका पहला बेटा प्रभाकर बचपन में ही मर गया था।

वीर सावरकर जयंती (Veer Savarkar Jayanti in Hindi)

वीर सावरकर की जयंती 28 मई को मनाई जाती है।


इन्हें भी देखें-


निष्कर्ष (Conclusion)

“वीर सावरकर का जीवन परिचय (Biography of Veer Savarkar in Hindi)” भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे।

न्हें प्रायः स्वातंत्र्यवीर, वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय वीर सावरकर को जाता है।

“वीर सावरकर का जीवन परिचय” वे न केवल स्वाधीनता-संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे।

लेकिन महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे।

वे एक ऐसे इतिहासकार भी हैं। जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र की विजय के इतिहास को प्रामाणिक ढंग से लिपिबद्ध किया है।

उन्होंने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिखकर ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया था।

“वीर सावरकर का जीवन परिचय” वे एक वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाटककार थे।

उन्होंने परिवर्तित हिंदुओं के हिंदू धर्म को वापस लौटाने हेतु सतत प्रयास किये एवं आंदोलन चलाये।

मुझे उम्मीद है की “वीर सावरकर का जीवन परिचय (Veer Savarkar ka Jivan Parichay)” पर यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा।

अगर आपको “वीर सावरकर का जीवन परिचय (Biography of Veer Savarkar in Hindi)” पर पोस्ट अच्छा लगा तो अपने दोस्तों और सोसल मीडिया पर शेयर जरुर करे।

अगर आपको “वीर सावरकर का जीवन परिचय (Veer Savarkar ka Jivan Parichay)” को समझने में कोई भी समस्या हो रही है,

तो आप अपने सवालों को कमेंट करें। हमारी टीम आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देगी।

Karuna Tiwari is an Indian journalist, author, and entrepreneur. She regularly writes useful content on this blog. If you like her articles then you can share this blog on social media with your friends. If you see something that doesn't look right, contact us!

Leave a Comment

error: DMCA Protected !!
74 Shares
Share74
Tweet
Pin
Share