अरुणिमा सिन्हा का जीवन परिचय (Arunima Sinha Biography in Hindi)

अरुणिमा सिन्हा कौन है? (Who is Arunima Sinha in Hindi)

आज, ऐसी एक बहादुर लड़की के बारे में जानेगें “अरुणिमा सिन्हा का जीवन परिचय (Arunima Sinha Biography in Hindi)“। यह बड़ी ही बहादुर और साहसी लड़की है।

अरुणिमा सिन्हा की जीवनी किसी से प्रेरित नही है, बल्कि अरुणिमा सिन्हा की जीवनी समाज में रहने वाले असमाजिक तत्वों को हराने की कहानी है। जिन्दगी में असफलता तब नहीं होती है, जब हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाते है।

अरुणिमा सिन्हा का जीवन परिचय (Arunima Sinha Biography in Hindi)
अरूणिमा सिन्हा का जन्म 1988 में हुआ था। भारत से राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वालीबाल खिलाड़ी तथा माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय दिव्यांग हैं।

यह तब होता है जब हमारे पास पर्याप्त लक्ष्य नहीं होता है। यह प्रेरणादायक कहानी हैं, ऐसी कहानी हैं जो आपको अन्दर तक झझकोर कर रख देगी। जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी की समाज में बहुत सारे असमाजिक तत्व पनंप चुके है।

समाज में पाप बढ़ता ही जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को कानून से डर नहीं रहा है। यह सिर्फ अरुणिमा सिन्हा का जीवन परिचय ही नहीं है, बल्कि ये वीरता, दृढ़ता और दृढ़ संकल्प की दास्तां हैं।

ये कहानी एक ऐसी आत्मा यानि अरुणिमा सिन्हा का जीवन परिचय है। जो इस दुनिया में बहुत कम है। जहाँ हर कोई आसान रास्ते का चुनाव करना चाहता है।

वहां पर कुछ असमाजिक तत्वों की वजह से एक लड़की अरुणिमा सिन्हा का जीवन पर काले समय की तरह ऐसा मंडराते है की पूरी जिन्दगी भर असर छोड़ जाते है।

लेकिन अरुणिमा सिन्हा के सपनों को नहीं कुचल पाते है। आज मुझे आप सब को एक ऐसी कहानी बताने का मौका मिला है।

जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली महिला दिव्यांग ‘अरुणिमा सिन्हा’ का जीवन कठिनाइयों से भरा रहा है। अरुणिमा सिन्हा ने वो कर दिखाया। जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी!

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अरुणिमा सिन्हा का जन्म कब और कहाँ हुआ था? (Arunima Sinha ka Janm Kab Hua Tha)

नामअरुणिमा सिन्हा
जन्मदिन20 जुलाई 1988
जन्म स्थानअंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश
माता-पिता का नामनहीं पता
शिक्षा एवं प्रशिक्षणमाउंटेनियरिंग पाठ्यक्रम (नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग)
पेशावॉलीबॉल, पर्वतरोही
पुरस्कारपदम् श्री, तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड, अमेजन इंडिया
किताबबोर्न अगेन ऑन द माउंटेन (2014)
मुख्य उपलब्धिएवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली दिव्यांग भारतीय महिला
पसंदीदा क्रिकेटरयुवराज सिंह

अरुणिमा सिन्हा का जन्म 20 जुलाई, 1988 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। अरुणिमा सिन्हा जब 3 साल की थी तब उनके पिता का देहांत हो गया था। उनको बचपन से खेलों में रूचि थी।

वह स्कुल में भी बढ़-चढ़ कर खेल प्रतियोगिता में भाग लेती थी। वह एक राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी थी। समय के साथ वॉलीबॉल के क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश को पहचान दिलाना ही अरुणिमा सिन्हा का लक्ष्य भी बन गया था।

अरुणिमा सिन्हा मेहनत करने में कभी पीछे नहीं हटी है। उनके घर वालों को भी यकीन था कि एक दिन अरुणिमा अपना सपना जरुर पूरा कर लेगी।

लेकिन उनको क्या पता था की उनकी बेटी के साथ कोई हादसा भी हो सकता है। वो अपनी बिटिया के लिए सपने संजो रहे थे। लेकिन जरुरी नहीं होता है की जैसा सोचे वैसा ही होता है।

अरुणिमा सिन्हा का जीवन को एक दुर्घटना ने नाटकीय रूप से पूरी तरह बदल कर रख दिया। वह लड़की कभी नहीं सोचो होगी की उसके साथ कुछ ऐसा भी होगा।

अरुणिमा सिन्हा का शिक्षा (Arunima Sinha ka Shiksha in Hindi)

अरुणिमा सिन्हा की प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश से ही पूरी हुई थी। उसके बाद अरुणिमा सिन्हा ने नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग, उत्तरकाशी से माउंटेनियरिंग कोर्स किया था।

हालांकि इनको पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा खेल कूद में रुचि थी। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल भी खेला है।

हालांकि ये वॉलीबॉल एवं फुटबॉल दोनों की अच्छी खिलाड़ी थी। इसके लिए अरुणिमा सिन्हा ने काफी प्रैक्टिस भी की थी।

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अरुणिमा सिन्हा का ट्रेन एक्सीडेंट कब हुआ था? (Arunima Sinha ka Train Accident Kab Hua Tha)

यह बात है 12 अप्रैल साल 2011 की रात की, जब अरुणिमा सिन्हा पद्मावती एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली आ रही थी। उस समय अरुणिमा सिन्हा ने एक गोल्ड चेन पेहन रखा था।

बरेली के पास कुछ अज्ञात बदमाशों ने उनके डिब्बे में प्रवेश किया। अरुणिमा को अकेला पाकर वे उनकी चेन छीनने लगे। जब अरुणिमा ने उनका विरोध किया तो उन चोरों ने अरुणिमा को चलती ट्रेन से फेंक दिया।

ट्रेन से निचे गिरते ही वह ट्रेन से टकरा गई और उनका एक पैर उनके शरीर से अलग हो गया। वह लड़की रात भर दर्द से चिलाती रही। लेकिन उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया।

वह लड़की रात भर ट्रेन की पटरियों के बिच रोती चिल्लाती रही, और तो और उनके कटे पैर से जो खून निकल रहा था उसकी गंध पा कर वहा के चूहे उनके पैर को रात भर खाते रहे अरुणिमा सिन्हा दर्द से तडपती रही।

ट्रेन से गिरने से अरुणिमा का एक पैर ट्रेन के नीचे आ गया। वह पूरी रात ट्रेन ट्रैक पर पड़ी थी, और 49 से अधिक ट्रेनें उनके पैर पर से जा रही थीं लेकिन वह खुद को बचाने में असमर्थ थीं।

सुबह होते ही पास के गावं के लोगो ने जब अरुणिमा सिन्हा को जख्मी हालत में देखा तो उसे पास के एक हॉस्पिटल में ले गए। वहां का डॉक्टर ने कहा की उनके कटे हुए पैर में इन्फेक्शन हो चूका है।

अगर पैर को काटा नहीं गया तो उनको बचाना मुस्किल हो जायेगा। अरुणिमा का जान बचाने के लिए डॉक्टर ने घुटने के नीचे से उनका पैर काट दिया।

उनकी अच्छा इलाज करवाने के लिए डॉक्टर ने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), दिल्ली में भेज दिया। वहां पर उनकी इलाज चार महीने लगातार चलता रहा।

अब अरुणिमा सिन्हा का एक पैर नहीं था। जिसकी वजह से वह अब फुटबॉल और वॉलीबॉल नहीं खेल सकती थी। डॉक्टर ने जब यह बात बताई तो अरुणिमा बेशुद सी हो गयी।

डॉक्टर ने उनको एक कृत्रिम (Artificial) पैर लगा दिया था और फुल बेड रेस्ट की सलाह दी गई थी। अरुणिमा के परिवार को लग रहा था कि शायद उनकी बेटी का भविष्य अब अंधकार में है क्योंकि वो दिव्यांग हो चुकी है। लेकिन उनको क्या पता की उनकी बेटी में अभी साहस और बहादुरी बाकी था।

अरुणिमा सिन्हा का कैरियर (Arunima Sinha Career in Hindi)

उस दुर्घटना के बाद अरुणिमा सिन्हा ने सोचा की अब कुछ अलग करने का समय है। अब उन्होंने ठान लिया की माउंट एवरेस्ट पर चढ़ेगी। “माना पड़ेगा अरुणिमा सिन्हा को जो उस हालत में भी वह बहुत बड़ा करने का जिद्द ली।”

यह फैसला अरुणिमा ने इसलिए लिया की वह खुद को साबित करना चाहती थी सिर्फ अपने लिए! किसी और को या दुनिया को दिखने के लिए उन्होंने खुद को साबित नहीं किया।

लेकिन हम जिस समाज में रहते है। वहा शुरू से ही लड़की को कमजोर नजरिये से देखा गया है। वैसे ही अरुणिमा सिन्हा को भी लोग यह कहते की अब तुम कुछ नहीं कर पाओगी।

जब डॉक्टर ने यह सुना की वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना चाहती है तो उनको मना कर दिया गया। उनकी जिद्द को देखते हुए लोगों ने यह भी बात करने शुरू कर दिए की उसका दिमाग ख़राब हो गया है।

वह मानसिक रूप से अब बीमार होने लगी है। लेकिन किसी को भी यह बात कहने की कोई हक़ नहीं था। अरुणिमा सिन्हा क्रिकेटर युवराज सिंह से प्रेरित है। जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को टकर दे सकते है तो फिर वो क्यों नहीं?

लेकिन हमारा समाज विशेषकर लड़कियों को आगे बढ़ने का हैसला नहीं देता है। जब अरुणिमा सिन्हा अस्पताल से रिहा हुए तो वह सबसे पहले, पहली भारतीय महिला माउंट एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल पाल के पास पहुच गयी।

बछेंद्री पाल ने भी अरुणिमा की हालत को देखते हुए उन्हें ट्रेनिंग देने से इंकार कर दिया। लेकिन फिर बछेंद्री पाल को भी अरुणिमा की जिद्द के आगे घुटने टेकने पड़े। तब उन्होंने बछेंद्री पाल के निर्देश के तहत प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।

पर्वतरोही बछेंद्री पाल के निरीक्षण से अरुणिमा सिन्हा ने अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी। तब 21 मई 2013 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर एक नया इतिहास रचते हुए ऐसा करने वाली पहली विकलांग भारतीय महिला होने का रिकार्ड अपने नाम कर लिया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FaQs

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा कौन है?

उत्तर- भारत से राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी तथा एवरेस्ट शिखर पर चढ़ने वाली पहली भारतीय दिव्यांग हैं।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा कहाँ की रहने वाली है?

उत्तर- अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश की रहने वाली है।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा का जन्म कब हुआ?

उतर- 20 जुलाई 1988 को हुआ था।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा शादीशुदा हैं?

उत्तर- हाँ, अरुणिमा सिन्हा शादीशुदा है।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा की शादी कब हुई थी?

उत्तर- 21 जून 2018 में हुआ था।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा की लव मैरिज या अरेंज मैरिज है?

उत्तर- अरुणिमा सिन्हा ने लव मैरिज शादी की है।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा के पति का नाम क्या है?

उत्तर- अरुणिमा सिन्हा के पति का नाम “गौरव सिंह” है।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा ने अपना पैर कैसे खो दिया?

उत्तर- कुछ अज्ञात बदमाशों ने उन्हें ट्रेन से भेक दिया था।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा का ट्रेन एक्सीडेंट कब हुआ था?

उत्तर- 12 अप्रैल साल 2011 में।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा को अम्बेडकर नगर रत्न पुरस्कार कब मिला?

उतर-  2016 में।

प्रश्न- अरुणिमा सिन्हा माउंट एवरेस्ट पर कब चढ़ी?

उत्तर- 21 मई 2013 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर फतह की थी।


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निष्कर्ष (Conclusion)

सभी के जीवन में एक लक्ष्य होता है, कुछ लक्ष्य अपनी सफलता की कहानी लिखते हैं और कुछ कहानियाँ दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। अक्सर जब हम ऐसे दोराहे पर होते है।

जहां हमें लगता है शायद यही हमारी कहानी का अंत है कई बार वही अंत किसी नई कामयाबी की कहानी की शुरुआत होता है। जैसा कि अरुणिमा सिन्हा के साथ हुआ। अरुणिमा सिन्हा माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय दिव्यांग महिला है।

जिसे पहले वॉलीबॉल खिलाड़ी के रूप में जाना जाता था। उन्हें भारत में प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है। जिन्होंने पैर के बिना माउंट एवरेस्ट जीता। माउंट एवरेस्ट हिमालय पर्वत की श्रृंखला का वो पर्वत जो दुनिया में सबसे ऊंचे पर्वत के तौर पर जाना जाता है। माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 29, 002 फीट है।

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर आम लोग भी चढ़ने के लिए कई बार सोचेंगे। लेकिन ऐसे में एक दिव्यांग महिला का इस चोटी पर विजय प्राप्त करना किसी सपने से कम नहीं है। लेकिन कहते है ना जिंदगी के रास्ते और आपकी हिम्मत आपको हर कठिनाई पार करा ही देती है। शायद इसलिए अरुणिमा सिन्हा भी ये कारनामा कर पाई।

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Karuna Tiwari is an Indian journalist, author, and entrepreneur. She regularly writes useful content on this blog. If you like her articles then you can share this blog on social media with your friends. If you see something that doesn't look right, contact us!

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