अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियाँ (Akbar-Birbal Stories in Hindi) हिंदी में।

अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar-Birbal Story in Hindi)

अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar-Birbal Story in Hindi)– जलालुद्दीन अकबर, जिन्हें आमतौर पर अकबर के नाम से जाना जाता था और जिन्हें बाद में ‘अकबर-महान’ के नाम से जाना जाने लगा था। वह भारत के तीसरे और पहले मुग़ल सम्राट थे। अकबर हुमायूँ का पुत्र था। जिसने भारत में पहले ही मुग़ल साम्राज्य का विस्तार किया था। मुगल सम्राट अकबर के दरबार में, नौ सदस्यों के समूह का एक प्रमुख सदस्य था। जिन्हें नवरत्न के रूप में जाना जाता है। बीरबल के पास प्रशासनिक और सैन्य कर्तव्यों का अधिकार था। लेकिन अपनी बुद्धि और समझ के कारण, वह अकबर के बहुत करीब थे।

अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar Birbal Story in Hindi) हिंदी में।

‘अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar-Birbal Story in Hindi)’ हर किसी की जुबान पर हैं। जब बच्चे खाना नहीं खाते या सोते नहीं हैं, तो उन्हें ‘अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar-Birbal Story in Hindi)’ सुनाई जाती हैं जो काफी मज़ेदार होती हैं। तो आये शुरू करते है “अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar-Birbal Story in Hindi)”। एक रात अकबर और बीरबल दोनों को नींद नहीं आने की बीमारी लग गई थी। अब सारी रात जगकर रात काटना तो उनके बस में नहीं था। तब बीरबल अकबर को कहानियां सुनाया करते थे। यह क्रम चलता गया कि एक बार बादशाह कहानी सुनते तो एक बार बीरबल। यह सिलसिला पूरी-पूरी रात चलता रहता। एक रात की बात है। जब बीरबल को नींद से हालत खस्ता थी। लेकिन अकबर को कहानी सुनना था। इसलिए बीरबल ने एक पुरानी कहानी सुनाना शुरू कर दिया।

बेचारा बीरबल कहानी सुनाते जाते और अकबर हूं-हूं करते जाते।

पुरानी कहानी सुनने की वजह से अकबर को नींद आ गयी और वह हूं-हूं करना बंद कर दिया। बीरबल के मन में एक विचार आया और वह एक नई कहानी सुनाना शुरू कर दिया। जो इस प्रकार थी। एक किसान ने अपने अनाज को सुरक्षित रखने के लिए कोठरी तैयार कराई। लेकिन उसमें एक छोटा सा छेद रह गया। उससे चिड़िया का आना-जाना आसान हो गया। एक चिड़िया आई दाना चुनी और फुर्र करती उड़ गई। “फिर क्या हुआ बीरबल?” अकबर ने आधी नींद में पूछा।

तब बीरबल ने कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा की ‘दूसरी चिड़िया आई। वह भी दाना चुगकर फुर्र हो गई।’ अकबर ने फिर पूछा। “इसके बाद क्या हुआ?” बीरबल ने कहा की तीसरी चिड़िया आई दाना चुगकर वह भी फुर्र हो गई। यहां तक की चिड़ियों की संख्या पचास हो गई। अकबर बादशाह ने तंग आकार कहा- “यह तुमने क्या फुर्र-फुर्र लगा रखी है। कहानी को आगे बढाओ।” बीरबल ने मुस्कुराया और कहा अभी तो कुछ भी नहीं जहांपनाह!

अभी तो हजारो चिडियां इसी तरह अपनी-अपनी बरी से आएंगी और अपना भाग्य का दाना चुगकर फुर्र हो जाएगी। बीरबल की यह बात सुन कर अकबर हंसने लगते है। वह समझ जाते है की बीरबल को कहानी सुनाने का मन नहीं है। खूब उपाय सोचा तुमने बीरबल। जाओ सो जाओ। इतना सुनते ही बीरबल सोचा “जान बची तो लाखो पाए।” बीरबल अपने घर निकल गया। अकबर-बीरबल की कहानी का अगला कहानी जो इस प्रकार है।

अकबर के पांच सवाल-जवाब (Five Questions of Akbar in Hindi)

एक दिन की बात है। बादशाह अकबर अपने दरबार में पहले से ही आ गए थे। एकाएक बादशाह को पांच सवाल सूझे, जो की सारे दरबारीयों से पूछा। सवाल ये था –

  1. फूल किसका अच्छा?
  2. दूध किसका अच्छा?
  3. मिठाई किसकी अच्छी?
  4. पत्ता किसका अच्छा?
  5. राजा कौन अच्छा?

बादशाह के सरे सवालों को सुनकर सारे दरबारी अलग-अलग फूलों का नाम लेकर अच्छा बाताते रहे। दुसरे सवाल का जवाब में कोई गाय तो कोई भैंस तो कोई बकरी का दूध अच्छा बताया। तीसरे का जवाब में कोई गन्ना तो किसी ने अंगूर तो किसी ने मिठाई बताया। चौथे जवाब में किसी ने केले के पत्ते किसी ने निम के पत्ते को अच्छा बताया। पांचवें जवाब में सारे दरबारियों ने अकबर को सबसे अच्छा राजा बताया। लेकिन राजा को दरबारियों के जवाब से संतुष्टि नहीं मिली। कुछ समय बाद दरबार में बीरबल आए, तो बादशाह ने उनसे सरे सवालों का जवाब पूछे।

बीरबल ने जवाब दिया, “बादशाह सलामत!”

पहला का जवाब है- कपास का फूल सबसे अच्छा होता है। इससे सारी दुनिया का नंगापन ढक जाता है। दूसरा का जवाब है- माँ का दूध सबसे अच्छा होता है। इससे बच्चा तंदरुस्त रहता है। तीसरा का जवाब है- मिठाई यानि मिठास जुबान की अच्छी होती है। जिससे दुसरे भी खुश रहते है। चौथे का जवाब है- पत्तो में पान का पत्ता सबसे अच्छा है। इसे खा कर दुसमन भी दोस्त बन जाते है। पांचवें का जवाब है- राजाओं में इंद्र सबसे अच्छे है। जिनके हुक्म से बारिश होती है और उससे अनाज पैदा होता है। बीरबल का ये जवाब सुनकर बादशाह और सभी दरबारी बहुत खुश हुए। अकबर-बीरबल की कहानी का अगला कहानी जो इस प्रकार है।

बीरबल की समझदारी (Birbal ki Smjhdari in Hindi)

एक बार की बात है, बादशाह अकबर का दरबार लगा हुआ था। तभी भरे दरबार में एक औरत रोती हुई अपने साथ एक आदमी को लेकर आई और बादशाह से बोली, “आलमपनाह! इस आदमी ने मेरे सारे गहने छीन लिए है।” जब बादशाह ने उस आदमी से इसका वजह पूछा तो वह आदमी हाथ जोड़ कर बोला, “जहांपनाह! मै परदेशी आदमी दिल्ली शहर देखने आया था। रास्ते में यह औरत मुझे मिली और बोली की यह आपके दर्शन करायेगी। आपके दर्शन करने की लालच में इसके साथ मै यहाँ आ गया।

मै बिलकुल सच्च कह रहा हूँ। मैंने इसके कोई गहने नहीं छीने है। यह सुनकर वह औरत बोली, “हुजुर! यह आदमी झूठ बोल रहा है। मै बिलकुल सच्च कह रहा हूँ। मैंने इसके कोई गहने नहीं छीने है।” बादशाह कोई भी नतीजा नहीं निकल पाए। यह सारी बाते बीरबल सुन रहे थे।

उन्होंने उस औरत से पूछा की “जेवर कितने के होंगे?” औरत ने जवाब दिया, “करीब पांच सौ रूपये के।” बीरबल ने शाही खजाने से पांच सौ रूपये मंगाए और चुपके से एक सिपाही को देकर कहा  कि उस आदमी को समझा दे की बीरबल का हुक्म पाते ही रूपये वह औरत को दे दे।

उस आदमी ने पांच सौ रूपये उस औरत को सभी के सामने दे दिए।

औरत खुश हो कर रूपये लेकर अपने घर की तरफ चली। जब वह औरत चली गई तब बीरबल ने उस आदमी से कहा, “जाओ, उस औरत से रूपये छीन लाओ, रूपये लेकर ही लौटना।” आदमी हुक्म पाते ही उस औरत के पीछे रूपये छिनने चला गया। बीरबल ने अपने दो गुप्तचरों को उस घटना को देखकर सही-सही खबर लेने के लिए भेज दिया था।

उस आदमी ने औरत से पैसे छिनने की पूरी कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। गुप्तचर पहले ही आ कर सारी घटना को बीरबल को सुना दिया। थोड़ी देर बाद ही वह और उस आदमी को लेकर दरबार में आई और बोली. “हुजुर! जो रूपये अपने मुझे दिलवाए है। उसे यह आदमी मुझसे रस्ते में छीन रहा था। मैंने इसकी एक ना चलने दी और आपके पास ले आई।” बीरबल ने यह सुनकर उस औरत से कहा, “तुमसे इसने रूपये छीन लिए या नहीं?”

औरत बोली- “इसने कोशिश तो बहुत की , लेकिन मैंने नहीं दिए।” “झूठ मत बोलो- इसने छिनने की पूरी कोशिश नहीं की होगी।” “नहीं हुजुर इसने छिनने की पूरी कोशिश की, लेकिन मैंने नहीं छिनने दिए।” तब बीरबल ने उस औरत को डांटकर कहा, “जो आदमी तुमसे पैसे नहीं छीन सकता वह जेवर कैसे छीन सकता है। सारे रूपये दे कर औरत वहा से चली गई।”

सबसे उज्जवल कौन (Sbse Ujjval Kaun Hai in Hindi)

एक दिन बादशाह अकबर अपने दरबार में बैठे हुए थे। तबी उन्होंने दरबारियों से एक प्रश्न किया, “बताओ, सबसे उज्जवल क्या होता है?” दरबारियों में से किसी ने कपास कहा, किसी ने दूसरी चीजों का नाम बताए। सबके बताने पर दूध और कपास को सबसे उज्जवल मन गया। बीरबल अभी तक शांत बैठे थे।

उन्हें शांत बैठा देखकर बादशाह ने बीरबल से कहा, “तुम्हारी क्या राय है?” बीरबल ने उत्तर दिया, “बादशाह सलामत! मेरी समझ से तो सबसे उज्जवल सूरज की रोशनी है। बादशाह अकबर ने कहा, “तुम्हें इस बात को सच्च साबित करना होगा।” बीरबल ने यह बात मान ली।

सबसे उज्जवल कौन का जवाब देने के लिए बीरबल ने ऐसा काम किया की बादशाह का होश उड़ गाये।

एक दिन दोपहर के वक्त जब बादशाह आराम कर रहे थे। तो बीरबल ने एक कटोरा दूध और चार खिले हुए कपास के फूल ले जाकर उनके कमरे के दरवाजे पर रख दिया। कमरा चारों तरफ से बंद था, उसमे रोशनी बिलकुल नहीं आ रही थी। यह काम बीरबल ने चुप चाप किया था। जब बादशाह अकबर आराम करके उठे तो वह सीधे दरवाजे की तरफ गए और उनकी ठोकर लगकर सारा दूध गिर गया।

दरवाजा खोलने पर जब रोशनी हुई तो बादशाह को दूध और कपास के ठीक दरवाजे के पास पड़े देख कर बडा आश्चर्य हुआ। जब कमरे से बहार निकले तो बीरबल को वहा देख कर समझ गए कि यह सब बीरबल की ही की हुई है। बादशाह ने दूध और कपास को दरवाजे के पास रखने की वजह पूछी।

बीरबल ने शांत स्वर में उत्तर दिया की आपने उस दिन उज्जवल को साबित करने के लिए कहा था। आज मैंने साबित कर दी है। अपने जैसे ही दरवाजा खोलाा सूरज की रोशनी के आने के बाद ही आपको दूध और कपास दिखाई दिया। अब तो आप मानते है ना कि सबसे उज्जवल सूरज की रोशनी होती है। बादशाह खुश हुए।

बीरबल की खिचड़ी कहानी (Birbal ki Khichdi in Hindi)

कड़ाके की ठंड में, एक दिन बादशाह अकबर ने अपने राज्य में घोषणा की कि महल के पीछे बहती नदी में जो आदमी रात भर खड़ा रह जायेगा। उसे शाही खजाने से पुरस्कार दिया जायेगा। घोषणा सुनकर एक गरीब धोबी ने सारी रात नदी में खड़े-खड़े बिता दी और अगले दिन दरबार में आकार इनाम मांगने लगा। बादशाह ने उस धोबी से सवाल किया, “तुम्हारे पास क्या सबूत है कि, तुम सारी रात नदी में खड़े थे?” धोबी ने जवाब दिया,

“जहापनाह! मैं कल पूरी रात महल की छत पर जल रही चिराग को देखता रहा।” बादशाह ने फिर सवाल किया? “इसका मतलब तो यह हुआ की महल की चिराग को रोशनी की गर्मी के कारण सर्दी से बचते रहे। इसलिए तुम इस इनाम के हक़दार नहीं हो।” धोबी उदाश हो कर वहा से सीधे बीरबल के पास जा कर बोला। दरबार में बादशाह ने इनाम देने से साफ मना कर दिया है। धोबी ने सारी बात बीरबल को बता दिया। बीरबल ने गरीब को आश्वाशन दे कर घर भेज दिया।

बीरबल ने अकबर को समझाने के लिए खिचड़ी बनाने का प्रोग्राम किया।

बीरबल की खिचड़ी कहानी (Birbal ki Khichdi in Hindi)

बादशाह ने अगले दिन बीरबल को दरबार में नहीं पाकर, एक सेवक को उन्हें बुलाने के लिए भेजा। सेवक ने आकार सुचना दी कि बीरबल ने कहा कि जब उनक खिचड़ी पूरी तरह पक जाएगी। तभी वह दरबार में आ सकते है। बादशाह अकबर को यह सुनकर बडा आश्चर्य हुआ। वह अपने दरबारियों को साथ लेकर बीरबल के घर पहुंचे।  वहा उन्होंने देखा की दो लम्बे बांसों के ऊपर एक हांडी में चावल डालकर उसे लटकाया गया है और जमींन पर आग जला रखी है तथा बीरबल उसके करीब बैठे हैं।

बादशाह ने तुरंत पूछा- “बीरबल क्या तमाशा लगा रखा है? क्या इतनी दूरी पर हांडी में खिचड़ी पक जाएगी?” बीरबल ने उत्तर दिया “हुजूर जरुर पक जाएगी।” अकबर ने उत्सुकतावश पूछा। “कैसे?” बीरबल ने कहा “जहांपनाह! ठीक वैसे ही जैसे महल के ऊपर जल रहे जिराग की गरमी के कारण धोबी सारी रात नदी के ठंठे पानी में खड़ा रह सकता है।” बादशाह बीरबल का यह तंज सुनकर लज्जित हुए और उन्होंने धोबी को बुलाकर पुरस्कार दिया।

बीरबल की मजदूरी कहानी (Birbal ki Majduri ki Kahani in Hindi)

एक दिन बादशाह अकबर अपनी बेगमों को साथ लेकर बगीचे में फूल चुन रहे थे। उसी वक्त वहा बीरबल भी आ गये। एक बेगम बोली, “आलमपनाह! अपना दीवाना बड़ा हंसमुख और नकलची है। हम भी उससे प्रश्न करेंगे।” बादशाह अकबर ने बीरबल को अपने पास बुलाया। बीरबल ने कुछ नहीं कहा और वह भी चुपचाप फूल चुनने लगा।  दूसरी बेगम ने कहा, “यह मजदूर बड़ा अजीब है।

बिना बोले काम करता है?” बीरबल ने फ़ौरन जवाब दिया, “बेगम साहिबा! एक मजदूर पहले ही काम कर रहा है। जो आप उसे देंगी वही मुझे भी दे देना।” बीरबल का जवाब सुनकर बेगमें दंग रह गई। फिर उन्होंने बीरबल से कुछ नहीं कहा।

बीरबल की युक्ति (Birbal ki Yukti in Hindi)

एक बार की बात है, बादशाह अकबर का दिल मजहबी झोकों में हिलोरे मार रहा था। इसी दौरान अचानक बीरबल वहां आ गए। बादशाह ने कहा “बीरबल तुम मुसलमान (इस्लाम) को अपना लो।” बीरबल बोला “पृथ्वीनाथ! इसका सोच-समझ कर उत्तर दूंगा।” वह दरबार से चला गया। महंतो की टोली में आया और उनके गुप्त रूप से समझाकर कहा “आप लोग सावधान रहें बादशाह आप लोगों को मुसलमान बनाना चाहते है।”

यह वाक्य सुनकर सभी महंत भड़क उठे और वे अपना एक दल बना कर बादशाह के पास पहुंचे। महंतो का सरदार सबसे आगे खड़ा हो कर बोला “जहांपनाह! हम मुसलमान नहीं बनेंगे।” बीरबल ने बादशाह को जताकर कहा “हमारे जहांपनाह! जब इतनी छोटी जाती के लोग भी अपना धर्म नहीं बदला चाहते तो दूसरो से कैसे इस बात की आशा की जाए?” बादशाह को बीरबल की युक्ति समझते देर न लगी और वो हंस पड़े।

इन्हें देखे-

निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, मैंने इस पोस्ट में “अकबर बीरबल की कहानी (Akbar Birbal Story in Hindi)” को बताया। बादशाह अकबर के सबसे चहिते नव रत्न में से एक बीरबल थे। जो बादशाह के हर समस्या का समाधान बीरबल के पास होता था। अकबर बीरबल की कहानी सबसे जयादा लोकप्रिय है। इसे बच्चो में सुनने का सबसे ज्यादा उत्सुकता होती है।

आपने इस पोस्ट में पढ़ा की किस तरह अकबर बीरबल की जोड़ी को लोगो ने पसंद भी किया और साथ ही दरबारियों को बीरबल खटकते भी थे। बीरबल को ना चाहने वाले चाहते थे की वो बीरबल को दरबार से किसी भी तरफ निकलवा दे। लेकिन बीरबल अपने बुद्धि से सभी के ऊपर भारी पड़ते थे।

अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियाँ (Akbar-Birbal Stories in Hindi) हिंदी में।
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